गुरुवार, 28 जून 2018
आभार
बुधवार, 27 जून 2018
धनगाँव के बजार मा
आ जाबे मोर रानी तैंहा,,, धनगाँव के बजार मा.
गुपचुप खावाहूँ तोला रे गोरी--२ लेहूँ सोला सिंगार ना.
करे मुखारी जामुन डारा,,, पानी ल धरे कटोरा मा.
पथरा होगे मोर आँखी हा,,,बही ओ तोर अगोरा मा.
तोर मया होगेंव दिवाना,,,किजरँव खारे खार मा.
आ जाबे मोर रानी तैंहा,,,,.....
कोयली कूहुके आमा के डारा,,,मोर मँजूर मन नाचय ओ.
पड़की परेवना मारय ताना,,,संगी जँहुरिया हाँसय ओ.
चारो कोती तोरेच चेहरा,,,घूमत रहिथे घर दुवार मा.
आ जाबे मोर रानी तैंहा,,,
घरे बनाय छाये ल खपरा,,,कँऊवा बइठे छानी मा.
मन मोहागे तोर पाछू,,,जादू भरे तोर बानी मा.
सूतत उठत तोरेच सुरता,,,का अँजोरी अँधियार मा
आ जाबे मोर रानी तैहा,,,
©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*२७/६/१८/७/४०पू.*
गुरुवार, 21 जून 2018
दोहे तोषण के
गलती मेरी देख के,करना मुझको माफ!
जितने मन में मैल है,हो जाए सब साफ!!
देख सखी बरसात में,पवन मचाए शोर!
नाचत मयुरा देख के,मनवा उठे हिलोर!!
जब सावन आषाढ़ मे,मेढक शोर मचाय!
होकर दिल मजबूर ये,चाहत गीत सुनाय!!
सावन में सब है हरा,झूमता खेती खार!
होती हरियाली परब,मगन भए संसार!!
फूँक फूँक रखलो कदम,मन में रखलो बात!
लेकर दीपक सब चलो,कट जाएगी रात!!
चल चल साथी साथ तू,ले मशाल जो हाथ,
करता सबपे है दया,मेरे दीनानाथ!!
मेरा तेरा कुछ नहीं, सब माया बाजार!
है दो दिन की जिंदगी,सबसे करलो प्यार!!
इस कलयुग संसार में,केवल हो विश्वास!
धरम करम होगा सदा,है तोषण को आस!!
आता जाता कुछ है नहीं,कैसे लिखता छंद!
पढ़ा लिखा ज्यादा नहीं, हूँ मैं जी मतिमंद!!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
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महूं ह कतेक मजबूर हंव। मितवा तोरले गजब दूर हंव। बिछड के जहुरिया तोर ले फुटहा दरपन सही चुर चुर हंव। आचार्य तोषण