शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

इंसान बनादे..(मुक्त गजल तोषण दिनकर)

सुन मेरे भगवान सुन मेरी पहचान बनादे।
आदमी हूँ आदमी मुझे बस इंसान बनादे।

नफरत न हो किसी से जब तक है जिंदगी ,
जान बीते खातिरदारी में मेजबान बनादे।

सहारा बेसहारों का भूखे का निवाला बनूँ,
बढ़ाता चलूँ सबकी कद कदरदान बनादे।

रखूँ समेट कर ये सारे गुलशन जहाँ का,
मुस्कुराते गुलों का मियाँ बागबान बनादे।

फक्र करे तुझ पर दिनकर ए आसमान,
खुशियों से भरा एक हिन्दुस्तान बनादे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

किताब

विश्व किताब दिवस म नानकुन कुण्डलियाँ
बाँटे सगरो बात सुन,जेकर निही हिसाब।
हवय ज्ञान के कोठरी,कहिथे सखा किताब।
कहिथे सखा किताब,सुनव गा संगी भइया।
बने गोठ सब राख,गलत ला देवव तिरिया।
कह तोषण कविराज,गजब के बतिया छाँटे।
बानी रोठ किताब ,ज्ञान के सागर बाँटे।

-तोषण दिनकर

बाकी है...

*बाकी है...*

मुश्किलों के दौर में एक आस बाकी है।
दूर तुम भी दूर हम भी एहसास बाकी है।

सम्हाले रख्खा है अब तलक ये दिल को,
आने को अभी नया मधुमास बाकी है।

जल्द मिटेंगे गिले शिकवे बुरे वक्त सारे,
दिन नव किरण का पल खास बाकी है।

सुनी पड़ी मधुबन ओ कान्हा रसिया की,
सुर्ख हुए वृंदावन की महारास बाकी है।

चाहत "दिनकर" को मिलने की तुझसे,
करने को बस रब से अरदास बाकी है।

-तोषण कुमार "दिनकर"

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

कुण्डलियाँ दिनकर की


1.
गुंगे बहरे हो चले,माने कभी न बात।
अपनी धुन में हाँकते,दिन हो चाहे रात।
दिन हो चाहे रात,रहो करते मनमानी।
मिलकर अपना देश,बात ये सबने ठानी।
लगी चाल पर रोक,लगे है लाखों पहरे।
गाँव ठाँव में लोग,फिरे है गुंगे बहरे।

2.
रहती जिसमें है अकड़,सुखे वृक्ष वो जान।
निन्दा उसके भाग में,पाये कभी न मान।
पाये कभी न मान,लाख जो ठोकर खाते।
खोते अपने लोग,छुटे हैं सारे नाते।
कह दिनकर कविराज,मीठ जो मधुरस बहती।
बोल बड़े अनमोल, हिया के भीतर रहती।

-तोषण दिनकर

रंग जीवन के

कलम की सुगंध छंदशाला
नमन मंच
19/04/20
घनाक्षरी
-रंग जीवन के

अंग अंग भीगे रंग लेकर नई उमंग,
दिन रहे होली रात दिवाली मनाइये।

सरसो के रंग लिए हियरा जो भंग पिए,
आम बन डाल पर मन को लुभाइये।

हरी-हरी धरती ये शीतल जो करती है,
झरझर नदियों सा,तरंग जगाइये।

सुख दुख संग लिये,जीवन में रंग लिये,
बांट चले भाईचारा रंग ये चढ़ाइये।

-तोषण दिनकर

रविवार, 19 अप्रैल 2020

घनाक्षरी विधान

नमस्कार
आज एक सुंदर गेय छन्द के बारे में जानते हैं ।
*छन्द : मनहरण घनाक्षरी*
*लक्षण*
मनहरण घनाक्षरी छन्द एक वार्णिक वृत्त है, जिसमें *कुल 4 पद* होते हैं तथा प्रत्येक पद में *4 चरण* होते हैं तथा 16 - 15 वर्णों पर यति, चारों पद समतुकांत, तथा अंत गुरु होने का प्रावधान है ।
इसे अन्य रूप में 8, 8, 8, 7 वर्णों पर क्रमशः यति के स्वरूप में पढ़ा एवं रचा जाता है ।

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*विशेष - घनाक्षरी, दो शब्दों 'घन' और 'अक्षरी' से बना है । यहाँ 'घन' शब्द के अनेक अर्थ हैं -
*पहला अर्थ -* सघन : अर्थात् इस छन्द में शब्दों का सघन बुनाव ही इसकी गेयता को श्रेष्ठ बनाता है । चूँकि यह वार्णिक छन्द है, इस हेतु 'लघु' अथवा 'गुरु' मात्रा पर पृथक् भार दिया जाना आवश्यक नहीं, दोनों मात्राओं पर समान ही बल दिया जाना चाहिए ।
*दूसरा अर्थ -* मेघ : अर्थात् गेयता में मेघ की गर्जना के समान ध्वनि उत्पन्न हो । इसका अत्यधिक प्रयोग वीर रस की रचनाओं में दृष्टिगोचर होता है ।
*तीसरा अर्थ -* बड़ा हथौड़ा : अर्थात् रचना की गेयता और प्रवाह  इस प्रकार हो जैसे कि रचनाकार अपनी रचना से हथौड़े से प्रहार करने के बराबर प्रभाव उत्पन्न कर रहा हो ।
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आइए एक उदाहरण द्वारा इसके वर्ण विधान को समझने का प्रयास करते हैं ।

*विषय - गाँव*
*छन्द - मनहरण घनाक्षरी*

माटी वाले घर रहें, पद्म सरोवर रहें,
कोयल की कुहू-कुहू, कौआ काँव-काँव जी ।
वट लता झूल-झूल, बाग सजें फूल-फूल,
शांति भरी अनुभूति, पीपल की छाँव जी ।
आधुनिक बन भले, गाँव नगरों को चले,
धरोहर मुनियों की, लगी काहे दाँव जी ।
सोंधी गंध माटी रहे, वन नदी घाटी रहे,
सपना यही है मेरा, गाँव रहे गाँव जी ।।


*1. पद विधान*

कुल पदों की संख्या - 4 पद
प्रत्येक पद में चरणों की संख्या - 4 चरण
*1 चरण , 2 चरण*
*3 चरण , 4 चरण*


*2. वर्णक्रम/वर्ण विधान*

*प्रथम पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

माटी वाले घर रहें (8 वर्ण)
I  I    I  I  I I  I I 

पद्म सरोवर रहें, (8 वर्ण)
I  I  I  I  I I I I

कोयल की कुहू-कुहू, (8 वर्ण)
I   I  I   I   I   I  I  I

कौआ काँव-काँव जी (7 वर्ण)
 I    I    I  I  I   I  I

इसी प्रकार
*द्वितीय पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

वट लता झूल-झूल (8वर्ण), बाग सजें फूल-फूल, (8वर्ण)

शांति भरी अनुभूति(8वर्ण), पीपल की छाँव जी (7वर्ण) ।

इसी प्रकार
*तृतीय पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

आधुनिक बन भले (8वर्ण), गाँव नगरों को चले (8वर्ण),
धरोहर मुनियों की (8वर्ण),  लगी काहे दाँव जी (7वर्ण)

इसी प्रकार
*चतुर्थ पद*
1 चरण (8 वर्ण), 2 चरण (8 वर्ण)
3 चरण (8 वर्ण), 4 चरण (7 वर्ण)

सोंधी गंध माटी रहे (8वर्ण), वन नदी घाटी रहे (8वर्ण),
सपना यही है मेरा (8वर्ण), गाँव रहे गाँव जी (7वर्ण) ।।

*3. कुल वर्ण विचार*
प्रत्येक *पद* में 

(प्रथम + द्वितीय) चरण = 8 + 8 = 16 वर्ण
(तृतीय + चतुर्थ) चरण = 8 + 7 = 15 वर्ण

*4. मात्रा विचार*

प्रत्येक पद के अंतिम चरण में *गुरु* का विधान अर्थात् गुरु मात्रा वाले वर्ण का स्थान होना ।
*(विशेष - प्रवाह की सुगमता हेतु इसे क्रमशः "लघु - गुरु" के क्रम में रखा जाता है )*
अवलोकन करें - 

काँव जी ■ छाँव जी ■ दाँव जी ■ गाँव जी
S  I   S      S  I   S    S  I  S         S  I   S

*5. समतुकांत*
चारों पदों में समतुकांत का होना अनिवार्य

काँव जी ।
छाँव जी ।।
दाँव जी ।
गाँव जी ।।

*6. अन्य ध्यातव्य बिंदु*

 # प्रवाह की उत्कृष्टता एवं नाद सौंदर्य को बढ़ाने के लिए, प्रथम एवं द्वितीय तथा तृतीय चरणों में भी सम तुकान्त /अन्त्यानुप्रास रखे जा सकते हैं ।
 # संयुक्त शब्दों का कम प्रयोग ।
 # जोड़ी वाले शब्दों का प्रयोग, यथा
   2 वर्णों वाली जोड़ी (2, 2, 2, 2)
     (माटी वाले घर रहें)
   2 एवं 4 वर्णों वाली जोड़ी (2, 2, 4) (2, 4, 2) (4, 2, 2)
      आधुनिक बन भले (4, 2, 2)
      शांति भरी अनुभूति (2, 2, 4)
       पद्म सरोवर रहें (2, 4, 2)
 # इसके अतिरिक्त विषम पदों के प्रयोग में ध्यातव्य - 
    सभी सम पद ( (2, 2, 4) (2, 4, 2) (4, 2, 2) (2, 2, 2, 2) (4, 4) ) - उत्तम

    विषम-विषम-सम पद (3, 3, 2) - उत्तम
    सम-विषम-विषम पद (2, 3, 3) - पचनीय
    विषम-सम-विषम पद (3, 2, 3) - वर्जित


गुरुओं द्वारा अर्जित ज्ञान एवं अल्प अनुभव के अनुसार मनहरण घनाक्षरी छन्द विधान को एक उदाहरण द्वारा समझाने का प्रयत्न किया गया । उम्मीद है यह ज्ञान आपको किसी नए छन्द के विधान के साथ, उसकी रचना को प्रेरित करे ।

साखी गोपाल पण्डा
बरमकेला, रायगढ़
7828163183

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

विज्ञात छंद की बधाई

परम आदरणीय गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी को नवनिर्मित छंद *विज्ञात छंद* की सृजन करने पर बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं एवं सभी रचनाकारों को मैं साधुवाद ज्ञापित करता हूं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि आप हम सब ने मिलकर साक्षी बने और एक नए छंद के निर्माण में हम सब ने अपनी सहभागिता प्रदान की और एक नए छंद की उत्पत्ति दिनांक 10/ 4 /2020 को विज्ञात छंद के रूप में हुई ।एक बार पुनः परम आदरणीय गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी को बहुत-बहुत बधाई कलम की सौगंध छंद साला की संचालिका दीदी अनीता मंदिलवार 'सपना' जी को भी बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएं
💐💐💐💐💐💐💐💐
तोषन कुमार चुरेन्द्र 'दिनकर' 
डौंडीलोहारा बालोद छ.ग.

दिनकर

दिनाँक -15/04/2020
वार- बुधवार
विषय - चित्राभिव्यक्ति
विधा- मुक्त छंद

संचालक -पूनम दुबे वीणा
समीक्षक-अर्चना पाठक 'निरंतर'

संचालक मण्डल  ✒ कलम की सुगंध

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कनक प्रभा लिए दिनकर देखो
धरा पे निखरी किरणों संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

देख जिनको कीच अंतर से
खिलखिलाती सर पे कमल
मोती रूप धर ओस की बूंदे
बरसी चांदनी धरा धवल
मेघा देखकर संग पवन
लेकर आती नयी तरंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

चिड़िया चहके देखके जिनको
वन उपवन पुष्प मुस्काते
पर्वतमाला से झरने झरझर
गतिशील की गीत गाते
लेकर नव उन्वान बढ़ता
भरकर सपने सप्त रंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

खेतों में धान इतराते
भीनी महक की धार लिये
कोयल कुके आम की डाली
बसंत राग मल्हार दिये
कृष्ण की बंशी जा पड़ती
झूमते सुर सप्त स्वर संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

दिनकर तेरे रूप अनेक
नव ऊर्जा संचार करे
दैहिक दैविक भौतिकता के
सारे दुख संताप हरे
रोम रोम होता पुलकित
खिल उठता सर्वंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

तोषण कुमार "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद 
छत्तीसगढ़

प्रतिक्रिया:-
आज चित्र अभिव्यक्ति पर सृजित रचनाओं की समीक्षा समीक्षक अर्चना पाठक निरंतर

1आदरणीय तोषण कुमार चुरेंद्र सुरेंद्र जी- आपने दिनकर ,पुष्प और पूरी प्रकृति को समेटती अति सुंदर रचना सृजित की है आप की भाषा शैली बहुत ही उत्तम है शिल्प सधा हुआ सुंदर कृति बधाइयाँ👏👏👏

2 वंदना सोलंकी जी- दिनकर की ढलती *लालिमा रक्तिम आभा मानो* एक अल्हड़ बाला की बहुत ही सुंदर सृजन आपका अनुपम कल्पनाशीलता शिल्प अति उत्तम बधाइयांँ अनंत शुभकामनाएँ👏👏👏
3- आशा भारद्वाज जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ आपकी *पवन उठाए हैं खुशियां* क्या कहने भाव पक्ष बहुत सुंदर अद्भुत सृजनशीलता बधाइयाँ👏👏

4-कुसुम कोठारी जी - *नव विहान  भोर* की लालिमा और आदित्य के आगमन का बहुत सुंदर  सृजन किया ।आपकी रचना शैली अनुपम है भाषा सुगम, सुबोध शत-शत बधाइयाँ

👏👏
आप की दूसरी रचना सुरमई शैया से उषा के सिंदूरी पाँव गजब की कल्पनाशीलता। पायल छन की सुनहरी किरणों के घुंघरू बिखरे वाह वाह 👏बहुत उत्कृष्ट 👌अनुपम कल्पनाशीलता की दाद देनी पड़ेगी सुंदर उपमान और अलंकारों से सुसज्जित बेहतरीन सृजन बधाइयाँ👏👏

5 अनीता सुधीर जी -अनीता सुधीर जी आपने बहुत ही सुंदर कुंडलियाँ  सृजित की है ।अनुपम छटा बिखेरती प्रकृति की सुंदर छवि ।अति उत्तम शिल्प, भाषा शैली सुबोध ,बधाइयाँ👏👏

6- सुनील बाजपेई शिवम जी 

आपने चित्र अभिव्यक्ति पर बहुत ही सुंदर प्रकृति का चित्रण किया है कल्पनाशीलता अनुपम और सरल भाषा का प्रयोग उत्तम सृजन बधाइयाँ👏👏

7- प्रतिभा प्रसाद जी -चित्र अभिव्यक्ति पर प्रकृति का सुंदर चित्र उकेरती सरल भाषा से आपने अभिव्यक्ति को सजाया है झूम-झूम धरा का यूँ इठलाना वाह बहुत सुंदर पंक्तियां अनुपम सृजन बधाइयाँ👏👏

8- चंद्र किरण शर्मा जी 

आपने चित्र पर बहुत ही सुंदर सृजन किया भौंरा गुन गुन करें पुष्प नया रूप धरे ।अतुल प्रकाश पर्व नव रूप भाये है क्या सुंदर पंक्तियाँ है आपकी  बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏
9- पूनम दुबे वीणा जी -आपने श्रृंगार में डूबी वसुधा जो चारों ओर हरी भरी दिख रही, बहुत बहुत ही सुंदर भावपूर्ण पंक्तियां आपने लिखी हैं और एक सुंदर गीत लिख डाला आपने चित्र पर बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏

10 डॉ कमल वर्मा जी 

 आपने सुहानी भोर पर चौपाई छंद में बहुत ही सुंदर *पूर्व में है लाली* छाई रंग बिखेरे उषा आई सुंदर पंक्तियाँ अद्भुत सृजन 👌मनमोहक बधाईयाँ👏👏

11 महेंद्र सिंह भाटी जी 

आपने पुष्प पर बहुत ही सुंदर कविता लिखी हैं और भंवरा फूल इनको प्रेमी जोड़ों के साथ जोड़कर बहुत ही सुंदर भावपूर्ण सुजन दिया है इससे पूरी धरती में खुशियाँ ही खुशियाँ फैली हैं सुंदर
👏👏👏

12 सरोज साहू जी आपने मुक्त छोड़ो बहुत ही सुंदर रचना की है
नव आभा और उमंग ले सुंदर सृजन👏👏

13 इन्द्राणी साहू साँची जी

ताटंक छंद में गीत सृजन 
अति उत्तम 👏👏👏
बधाई, शुभकामनाएँ

14 अनुराधा चौहान सुधी जी
अंतर्मन में उल्लास लिए मन खुशियों की आस लिए सुंदर पंक्तियाँ अनुपम से बधाइयाँ👏👏
15 कृष्णा पटेल जी 

आपने बहुत सुंदर भाव  पर सृजन किया बेहतरीन 👌👌बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏

16 धनेश्वरी धरा जी

 आपने सुंदर दो कुंडलियाँ रच डाली और भाव पक्ष उत्तम, शिल्प सधा हुआ बेहतरीन सृजन चित्र पर बधाइयाँ👏👏


आज चित्र पर आप सभी ने बहुत ही सुंदर सृजन किया आप सभी को बधाइयाँ ,अनंत शुभकामनाएँ।🙏







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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

मोर मन पंछी परेवना रे...

मोर मन पंछी परेवना रे...

मोर मन पंछी परेवना रे 
उड़ँव फिरँव असमान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

नदिया नरवा पहाड़ मा किंजरँव
संग लेके पुरवाई
रूख राई बन नाचँव गावँव
बनके हवा हवाई
होत संझनिया लहुटँव मँयहर
निकलँव तुरते बिहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा....

नहाके आथँव गंगा धार ले
भोला ल भांथ नवाथँव
चारों धाम के तीरथ करथँव
धरती के गुन ला गाथँव
करथे मन नंइ सुरतावँव संगी
बइठके रूखवा टिपान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा.....

भेद भाव ला जाने नाहीं
राग मल्हरिहा गाथे
बनके कोयली कुहके बन मा
सबके मन ला भाथे
खेत खार का भर्री भांठा
भाथे मोला दइहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

दोहा पंथी करमा ददरिया
बाँस गीत के तारी
बंदन करथे रात दिन सब
छत्तीसगढ़ महतारी
हरियर हरिय रुख राई के
चले पवन खलिहान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा...

कहिथे दिनकर सबला संगी
मन ला टन्नक राखव
सुमता के दीया जला के
सुख दुख मिलके बाँटव
इही रीत हे जग जीव जगत के
राखव बिधि बिधान मा
मोर बर काहीं नाका नंइहे
किजरँव पूरा जहान मा


-तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.





पानी का मोल

दिनाँक :- १३/०४/२०
दिन :- सोमवार
विधा :- दोहा 
विषय :- पानी का मोल 
एक प्रयास संस्कृत शब्द वनम के प्रयोग के साथ ....

मरु में जाकर देख ले, 
                वनम वनम अंकाल।
प्यासी धरती ताकती,
                जीवन है बेहाल।।१।।

पंछी तरसे है वनम,
                नहीं ताल का शोर।
सूखती रोती है नदी,
                देखे मेघा मोर।।२।।

पेड़ बिना संसार में,
                नहीं वनम की चाल।
पेड़ से है जिन्दगी, 
                जीवन है खुशहाल।।३।।

पानी के उपयोग का, 
                रखें सभी ये ध्यान।
जनम वनम अनमोल है,
                कहते संत सुजान।।४।।


बिना वनम जग जीव सब,
                कहते एक ही बोल।
'दिनकर' रक्षा अब करो , 
                पानी है अनमोल।।५।।


-तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 12 अप्रैल 2020

अपील

हमारे देश प्रदेश की सरकार हम सबके लिए वृहद रूप से राहत पहुंचाने का कार्य कर रही है जनधन खाता में ₹500 नगद भुगतान किया जा रहा है 2 महीने का चावल बीपीएल के तहत निशुल्क दिया जा रहा है। और तो और उज्जवला गैस योजना के तहत मार्च अप्रैल और मई माह तक सिलेंडर रिफिलिंग मुफ्त । तो क्या हम अपने घर से 1 किलो चावल ₹100 पैसा नहीं दे सकते आइए अपनी सोच को ऊंचा करें और देश के हित में कार्य करें।
                 कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते हमारे भारतवासी और प्रदेश वासी बड़े ही गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। ऐसे में हम सबका फर्ज बनता है कि हम सब देशवासियों प्रदेशवासियों के सहयोग के लिए यथाशक्ति तथा भक्ति के अनुसार 4 आना 8 आना किलो डेढ़ किलो या उससे अधिक दान कर सकें। यह हम सबके लिए बड़े ही गर्व की बात होगी। सरकार जब हमारे लिए इतना सोच रही है तो हमारा फर्ज भी बनता है कि हम भी कुछ अपने देश के लिए अपने प्रदेश के लिए करें ।तो आइए हम सब मिलकर देश के हित में नेक कार्य करें और अपनी यथाशक्ति अनुसार देश को दान दे। 
                  कहा गया है ...देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे... तो आइए इस गीत को चरितार्थ करते हुए हम एक दूसरे के सहयोगी बने जिससे कि किसी का कल्याण हो सके। आइए हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री जी का और माननीय मुख्यमंत्री जी का साथ दें । 
                   गीत कहता है ....नदिया न पिए कभी अपना जल, वृक्ष न खाए कभी अपना फल ,अपने तन को मन को धन को, देश को दे जो दान रे वह सच्चा इंसान रे वह सच्चा इंसान रे....
                   भारत माता की जय, जय छत्तीसगढ़,जय जवान, जय किसान ,जय विज्ञान, जय हिंदुस्तान, स्वास्थ्य कर्मी जिंदाबाद, पुलिस विभाग जिंदाबाद,जय हिंद...
बहुत-बहुत धन्यवाद।

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

कोरोना


विषय :- कोरोना

कोरोना देख ले, रोवात हावय जानले।
छोड़व कुकरी झनी खावव, बात यहु मानले।
आहे कहिथे बिदेशी, वायरस समझव बने।
मिलके सब मार डालव, पेलत छाती तने।

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तोषण कुमार दिनकर
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...