आवत नंइहे जोड़ी मोर होगे बतर के बेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
खेती किसानी के चेत नंइहे कइसे तैं बिलमाये
नांगर बइला के हाल.नंइहे कोन ऐला समझाये
दिन बादर बरसात के धराय नंइहे पेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
फूटे परे हे छानी परवा घर हवै बिन हाल के
होगे जइसे मोर जिंनगी बिन पाती जस डाल के
पानी बिन मछरी तड़पे खोजै अपन डेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
पानी बिन जस धरती तरसै देखत बादर कोती
आजा 'तोषण' घर म तैहा गांव म हीरा मोती
कबले तैहा मारत रहिबे एती तेती के फेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
