सुरता हा आथे तोर, आरो ले ले मोर।
तोर मया म होगेंव दीवाना, धीरज नँइहे थोर।।
सुरता.....
कोन जनी का रोग हमावय,खवई पियई कछु नँई भावय।
तोर मया के बदरा बैरी,रही रही आँखी म छावय।।
मोर हिरदे के भीतरी, झुले चंदा चेहरा तोर....
सुरता.....
कोयली सही तोर बोली,मन ल मोर भावय ना।
बिना तोला देखे गोरी,रहय नँई तो जावय ना।।
जिनगी मा आके तैहा,करदे जग अंजोर....
सुरता....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा