रविवार, 1 दिसंबर 2019

मानवता

एक प्रयास

*विधा-मनहरण घनाक्षरी* 

*विषय - मानवता*


मानवता ध्यान रहे,
                जरा न गुमान रहे,
तालियां मिलेगी सदा,
                सारे हिन्दुस्तान में।।१।।

नेकी कर आगे बढ़,
               बाधाओं से नित लड़,
डर भर जाये सारे, 
               जागते शैतान में।।२।।

नरेन्द्र विवेक बने,
              शिकागो मे जाके तने,
पाठ दिया मानवता,
              जाकर जहान में।।३।।

हम सब मिल साथी,
              बाँध चले परिपाटी,
कुसुम अनेक खिले,
              नेह के बागान में।।४।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मानवता

हास होती मानवता,जाग उठी दानवता,
कैसी ये विडंबना है,मेरे हिन्दुस्तान मे।

बेटी बहू जाए कहाँ,पुकार लगाये कहाँ,
घिरे हुये इत उत,कलयुगी हैवान में।

न्याय कुछ ऐसा मिले,हैवानों के पग हिले,
कुछ नहीं रहाअब,बातों के कृपाण में।

तोषन अब नही सहे ,मिलकर सब कहें,
लाओ कुछ अब नया,विधि के विधान में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

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