शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद पूर्णिमा


शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

माता पचरा

शुभ नवरात्रि
माता पचरा
 
मैया जी के अंगना मा सजे दरबार हो...
चलो जाबो मैया ला मनाबो हो माया मोर....

मैया जी के बरनन ला बरनी नंइ तो जाय हो...
लीला हे अगम अपार हो माया मोर....

मैया जी सेवा बर भगतन आये हो...
लाली फूल चुनरी चढ़ाये हो माया मोर...

एक्कीस बहिनिया संग पांच भाई पंडवा हो...
ब्रह्मा बिषनु शंखर आय हो माया मोर...

दया मया के मैया आशीष देबे हो...
दंडाओशरन पंइया लागँव हो माया मोर...

ढोल नंगारा मैया ढम ढम बाजे हो...
तोषण हा पचरा सुनाय हो माया मोर...


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

बेटी

एक प्रयास सादर समीक्षार्थ

अरविंद सवैया[ सगण ११२ x ८ +लघु ] 
सरल मापनी --- 112/112/112/112/112/112/112/112/1

अपनी बिटिया चहकी बगिया चिड़िया बनके अँगना मनुहार।
पढ़ने गढ़ने बढ़ने चलती विपदा हरती करती सुविचार।
सजती धजती तितली छम सी गिरती फिरती उड़ती गुलनार।
दुरगा कलिका रुप नौ जननी हरलो हमरी मइया दुखसार।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

दाई के नवरात


दोहा गीत
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लाज सभा मा राखले,राहँव सबके मीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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आगे दिन नवरात के,रिगबिग चमके जोत।
हाँसत घर मा जात हे,आथे जेहर रोत।।
रखबे मुड़ मा हाथ तै,दया मया पीरीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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करे भगत गोहार सुन,बाढ़त हावय पाप।
छलकत गघरी देख तै,आजा लेबर नाप।।
पीरा हरले भगत के,सत के होवय जीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।
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दुर्गा दाई रूप नौ,सबके मनला भाय।
जय माता की संग मा,जय जयकार लगाय।।
तोषण दिनकर हे भजे,साँझ बिहान सुखीत।
तोर दया ले आज मैं,गावत हावँव गीत।।
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तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
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शिवनाम

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