बुधवार, 17 जनवरी 2018

तरु है दादा

१७-१-१७
का हाइकु

तरु  है  दादा
परिवार  का  मूल
नेक  इरादा

जीवन  मेरा
पिता  का  आशीर्वाद
छाँव  का  घेरा

मूरत  माँ  की
ममता  का  आँचल
तीरथ  झाँकी

भातृ  का  स्नेह
दुलार  भउजी  की
कंचन  मेह

बहन  की  राखी
स्नेह  भरी  रसरी
उड़ती  पाखी

तोषण कुमार चुरेन्द्र
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सोमवार, 15 जनवरी 2018

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

तन्हाइयों में

तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र

मुक्त मुक्तक

*तोषण कुमार चुरेन्द्र की कलम से*

[1/7, 2:09 AM] Toshan Kumar Churendra:

रब कहता है

मैं वो करीगर हूं पत्थर को भगवान बना देता हूं
सुनो अबोध बालक को इंसान बना देता हूं
करले जरा मेरी पहचान रे तोषण
सारे जग में तुम सबकी पहचान बना देता हूं

[1/7, 2:13 AM] Toshan Kumar Churendra:

करले मेरी भक्ति तुझे मालामाल कर दूंगा
सोंचा न हेगा तु जग में निहाल कर दूंगा
एक मैं ही हूं सबका साथी तोषण
गरीब को अमीर अमीर को कंगाल कर दूंगा

[1/7, 2:18 AM] Toshan Kumar Churendra:

रहमत तेरी मुझ पर दाता हर कदम बरसता रहे
दुखो का न हो सामना जीवन सदा सरसता रहे
मिलकर बांटूं तेरी गाथा करता रहूं सिर्फ तेरा ध्यान
सब में हे प्रेम भाईचारा विश्व में सदा समरसता रहे

[1/7, 2:25 AM] Toshan Kumar Churendra:

मंच से हमारे हे विप्रवर आपको सादर बिदाई है
आगत का हम करेंगे स्वागत यही आदर पहुनाई है
मधुर मधुर सी तान से  पल्वित धरा हमारा है
सुन दर्शक दीर्घा स्रोता समाज ने जोरदार तालियाँ बजाई है

[1/7, 2:33 AM] Toshan Kumar Churendra:

हरी की हरियाली देता संतो
राम नाम गुन गाने का
भक्त और भगवान को एक दुसरे से मिलाने का
पीली आपको इशारा करेगी पांच मिनच है शेष
छा जाए लालिमा मंच में समझो जाना अपना देश

[1/7, 2:37 AM] Toshan Kumar Churendra:

जिनगीच के राहत ले लकर लकर तै करबे
लकर लकर तै झन कर संगी एक दिन तै हफरबे
हफरे के पहिली करले जोरा गाले तै सिया राम ल
संवरे नही जियत ले संगी मरे के बाद संवरबे

[1/7, 2:40 AM] Toshan Kumar Churendra:

जियत ले हे तोर मोर कोनो नइ देवय साथ गा
रुपिया पैसा महल अटारी जावय नइ तो साथ गा
राम रमैय्या जपले तैहा मन में धरले ध्यान जी
पार लगाही दसरथ नंदन मोर सिया पति रघुनाथ गा

[1/7, 2:50 AM] Toshan Kumar Churendra:

ए तन माटी के खिलौना
पानी परे घुर जाही जी
रुपिया पैसा धन डोगानी
काम घलो नइ आही जी
जियत भरके संगी साथी
मरेम पीताम्बर ओढ़ाही जी
रापा कुदारी म गड्ढा करके
भुइया म तोला गडियाही
नइ खवाय तोला  तात पेज
दसकरम म भोग लगाही जी
तोर कमइ ल फुदर फुदर के
नंगत मजा उड़ाही जी
राम नाम सुमरन करले संगी
इही काम तोर आही जी
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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