शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

कब होही तोर दरसन

*कब होही तोर दरसन*

कब होही तोर दरसन
होबे कब तैहा परसन
मया ल तोरले पायबर
होवत हे मोला अड़चन

होही कब मोर आस पूरा
जिनगी तोर बिन हे अधूरा
मर जहूँ तइसे लगथे मोला
धकले करथे मोर जीवरा

कब मनाबो जी हम होरी
बँधाही कब मया के डोरी
रस्दा ल तोर देखत रहिथों
चंदा ल देखय जस चकोरी

तै मोर राधा बनवारी मैं
बिन रंग के पिचरारी मैं
हावस चंदा कस दूरिहा
हँव जस अँधियारी मैं

सपनाथंव तोला रात कून
दया नइ लागय थोरकून
काबर तै कलपावत हस
बात मान लेतेस मोर सून

तडपत हँव तोर मया बर
लेवस नइ तैह मोर खबर
का अइसन बात होगे हे
अब नइ धर सकंव सबर

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९६१७५८९६६७
९८२६७००३१९

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

धरती वंदना

धरती दाई तोर अबोध लइका कइसे करँव मँय बखान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ

भारत माता के दुलौरिन बेटी छत्तीसगढ़ तँय कहावय
अरपा पैरी महानदी के धार ह सुग्घर बोहावय

तोर अछरा के छंइहा म दाई लहरावय धान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

बीर नरायन गैंदसिह नायक तोरेच सेवा बजाइन हे
मान तोर राखेबर दाई अपने प्रान गँवाइन हे

ए भुंइया कोन्हा कोन्हा लागय सोनहा खान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

शबरी के जूठा बोईर ल खाइस राम ह जिहा आके
धन्य होगे हमर भुंइया नवधा भगति ल पाके

गंगा मंइया तेलीन सत्ती सबके महिमा गान ओ
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोर कोरा लागे हमर बर संऊहत तीरथ धाम असन
तोर मान रखेबर दाई करबोन जुरमिल के जतन

आही बेरा पाछू नइ घूंचन छोंड़ देबो हम प्रान ओ...
तोर कोरा म जनम धरिन तुलसी कबीर रसखान ओ...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत राग

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
*चयनित हाइकु*

बेटी वसंत
टेसू भरा आँगन
श्वास पर्यन्त ।

✍🏻वीणा शर्मा

बसन्त आया
कुंहूकुंहू कोयल
प्रसन्न चर्या ।

✍🏻तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे        

बसंत आया
सुगन्धि नाच उठी 
जग बौराया ।
                                   
✍🏻सूर्यनारायण गुप्त "सूर्य"             
           
मन बसंत
खिला स्नेह की कली
महके रिश्ते ।

✍🏻रामेश्वर बंग

लुटा बसंत
कामुक था महंत
जीवन अंत ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

फूल रंगोली
है धरा कैनवस
रचे प्रकृति ।

✍🏻मीनाक्षी भटनागर

मासूम कली
घर आँगन खिली
लगती भली ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

भ्रमर गूँजें
मकरंद लालसा
पुष्प मित्रता ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

कुच कलश
थरथराने लगे
काम के पुष्प ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

प्रकृति नटी
मधुमय उमंग
हँसे सुमन ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

बिटिया कली
मन आँगन खिली
चाहत मिली ।

✍🏻डाॅ. संजीव नाईक

खिली कोंपल
मासूम सी किल्कारी
गूंजा आँगन ।

✍🏻उषा साहिबा

पीली सरसों 
केशरी है पलाश 
पुष्प सुवास । 

✍🏻सुशील शर्मा

रंग अनंत 
चित्रकार बसंत 
सजा दिगंत  ।

✍🏻सुशील शर्मा

बासन्ती भोर
पलाश दिनकर
क्षितिज कोर ।

✍🏻किरण मिश्रा

नैन भ्रमर
मुकुलित कँवल
मनस सर !

✍🏻किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा"

डाली का फूल
नाजुक सी जिन्दगी
करे कबूल ।

✍🏻बलजीत सिंह
     
तितली  रानी
रंगीन  फूलों  पर
हुई  दीवानी ।
     
✍🏻बलजीत  सिंह

फूलों की बातें
हवा हौले-से सुने
कहानी बुने ।

✍🏻पुष्पा सिंघी

भौंरा गुंजारे
जैसे कोई तपस्वी
मन्त्र उच्चारे ।

✍🏻डा.आनन्द शाक्य

पत्तियां देखें
पुष्प, भौंरे, बसंत
बनके संत ।

✍🏻शेख़ शहज़ाद उस्मानी

नवोढा कली
बिखरी अधखिली
भाग्य का खेल ।

✍🏻सुरंगमा यादव

रजनी भागी
किरणों की थपकी
कलियाँ जागी ।

✍🏻ऋतुराज दवे

भंवरा गाये
कलियों को रिझाये
पराग पाये ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

अल्हड़ कली
सहमी सी संभली
उर में अलि ।

✍🏻दाता राम पुनिया

आया बसंत
धरती आच्छादित
फूले रसाल ।

✍🏻स्नेहलता "स्नेह"

न तोड़ कली
जग में आने तो दो
खुशियाँ देगी ।

✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

खिले सुमन
इठलाए चमन
पुलके मन ।
    
✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

बसंत राग
कोयल गाती कैसे ?
बनके कैदी ।

✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत ऋतु
सभी के मन भाए
जी भरमाए ।

✍🏻मधु गुप्ता "महक"

छाये बसन्त
हर मन तरंग
फूले पलास।

✍तेरस कैवर्त्य "आँसू"

फूल को देख
अलि गुनगुनाये
बाग में झूमे ।

✍🏻सविता बरई

ऋतु बसंत
कुहुकिनी कुहूके
डाल में झूले ।

✍🏻सविता बरई

आया बसंत
आम्र  कुंज महके
फूले पलाश ।

✍🏻केवरा यदु

ऋतु बसंत
कामदेव ने भेजा
खुशी अनंत ।

✍🏻भीष्मदेव होता
        
सरसों फूले
बसंत आगमन
चेहरे खिले ।

✍🏻अनिता मंदिलवार "सपना"
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

शिव भजन

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शिव भजन

पहिने बाघंबर साला गलेयन में मुंड के माला...
आसन लगाए तँय पहाड़ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला..

मांथे मा चंदा सोहे गंगा मइया साथ मा
एक हाथ तिरशुल सोहे डमरु धरे हाथ मा
नंदी के तैहा चढ़इया भृंगी हे सेवा बजइया...
परबतिया हे तोर साथ मा
तोर तीर आएंव भोला सुनले गोहार ला...

अवघढ़िया तोला कहिथे,बम भंगिया तोला कहिथे
साँप डेढ़ू बिचछी कुच्छी सब संग मा तोर रहिथे
महादेव तैहा कहैया किरपा तै सब पे करइया
करदे तै किरपा के बौछार ला

तोर तीर आएंव भोला सुनले ले होबार ला

तोषण कुमार चुरेन्द्र
arhkepagakalagi.blogspot.com

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

चली बयार

*" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "*
💐💐💐💐💐💐💐

*09 फरवरी आज के हाइकु का विषय :-*
       *बसंत*
       *बयार*
       *रंग*
       *सरसों*
       *गुलाब*

    *चयनित हाइकु*

*01. गुलाब रोया*
*शहीद से लिपट*
*सुपुत्र खोया ।*

*✍🏻स्नेहलता वर्मा*

*02. परसा फूले*
*फागुन रंग खिले*
*वन झाड़ में ।*

*✍🏻नरेश कुमार जगत*

*03.चली बयार*
*लिये फागुन राग*
*जग रंगोली ।*

*✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र*

*अतिरिक्त : ----*

*01.रंग-बिरंगे*
*प्रसूनों से सज के*
*प्रकृति झूमे ।*

*✍🏻सविता बरई*

💐💐💐💐💐

*विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी*
*हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी*
*संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयार
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगोली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

सात घंटे

सात घंटे

वो  तेरे सात घंटों का साथ
पल - पल  हर पल है खास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

रहता  है  तेरी बातों में नशा
भा  जाती  है  तेरी हर अदा
अकेले में  रहती  है साथ तू
रोम -रोम में है तेरा एहसास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

तुम मुझसे रुठती मैं तुझसे
दोनों  का यूं मानना मनाना
कभी होंगे न जिंदगी में हम
कभी  भी  कहीं  भी उदास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

हमारा रिश्ता  बरसो पुराना
भूला न  पाएगा  ये जमाना
बारहमासी  प्रेम   है अपनी
बनी रहेगी ये सदा मधुमास
दूरी है मुझसे गम नही कोई
रहती तू सदा  दिल के पास

मर  भी जाऊंगा जो मैं अगर
इश्क मेरा रहेगा हमेशा अमर
तुझको पाने को मेरा ये दिल
जन्म जनम लेता रहेगा साँस
दूरी  है  मुझसे गम नही कोई
रहती  तू सदा  दिल के पास

तोषण कुमार चुरेन्द्र

तेरे दर पे

*तेरे  दर  पे  आकर  फरियाद  करता  हूँ.*
*हर  घड़ी  हर  पल  तुझे  याद  करता हूँ.*
*सुनना या ना सुनना  मेरी  मर्जी  है  तेरी,*
*आसरा से जिंदगी खुद आबाद करता हूँ.*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७*

माँ की सुरत

माँ की सूरत
आईना बेटियों की
नेक नियत...

तेरी ही छवि
दे माँ नव जीवन
बनूँगी रवि...

बनूँ तूफान
मुश्किलों से मैं लड़ूँ
हारे चट्टान...

बिटिया प्यारी
सीता सावित्री मनु
राज दुलारी...

शिवा की माता
जिंदादिली जीजा की
भाग्य निर्माता...

चलूँ उड़ते
स्वच्छंद अंबर पे
मन झूमते...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत बयार

" हाइकु मंच छत्तीसगढ़ "
      09/02/2018
आज के हाइकु का विषय
          💐💐💐

फरवरी माह को ध्यान में रखते हुए ये विषय :-

बसंत//बयार
//रंग//सरसों //गुलाब

विषय प्रदत्त : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

समीक्षिका : आ. अनिता मंदिलवार "सपना" जी

हाइकु चयनकर्ता : आ. देवेन्द्र नारायण दास जी

संचालक : प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

को सादर संप्रेषित....

*बसंत*

खिले  पलाश
मदमाती  बसंत
आम्र  मञ्जरी...

*बयार*

चली  बयारें
लिये  फाल्गुन  राग
जग  रंगीली...

*रंग*

रंग  परब
छटा  इंद्रधनुषी
उड़े  गुलाल...

*सरसों*

पीली  सरसों
हरीतिमा  धरा
घानी  चुनरी...

*गुलाब*

सुर्ख  गुलाब
प्रेम  परिचायक
जगाते  ख्वाब...

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...