बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

बसंत राग

*💐🙏🏻~ हाइकु मञ्जूषा ~🙏🏻💐*
                   *(क्र. - 09)*
          *दिनांक 19/02/2018*
                 *दिन - सोमवार*   
          *हाइकु सृजन का विषय*

                       *कली*
                       *पुष्प*
                      *भ्रमर*
                      *बसन्त*

        *विषय संदर्भित हाइकु सृजन काल प्रातः 08.00 से रात्रि 08.00 बजे तक ।*

*विषय प्रदाता - आ. किरण मिश्रा जी*
*संचालक - प्रदीप कुमार दाश "दीपक"*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
*चयनित हाइकु*

बेटी वसंत
टेसू भरा आँगन
श्वास पर्यन्त ।

✍🏻वीणा शर्मा

बसन्त आया
कुंहूकुंहू कोयल
प्रसन्न चर्या ।

✍🏻तुकाराम पुंडलिक खिल्लारे        

बसंत आया
सुगन्धि नाच उठी 
जग बौराया ।
                                   
✍🏻सूर्यनारायण गुप्त "सूर्य"             
           
मन बसंत
खिला स्नेह की कली
महके रिश्ते ।

✍🏻रामेश्वर बंग

लुटा बसंत
कामुक था महंत
जीवन अंत ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

फूल रंगोली
है धरा कैनवस
रचे प्रकृति ।

✍🏻मीनाक्षी भटनागर

मासूम कली
घर आँगन खिली
लगती भली ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

भ्रमर गूँजें
मकरंद लालसा
पुष्प मित्रता ।

✍🏻ज्योतिर्मयी पंत

कुच कलश
थरथराने लगे
काम के पुष्प ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

प्रकृति नटी
मधुमय उमंग
हँसे सुमन ।

✍🏻देवेन्द्रनारायण दास

बिटिया कली
मन आँगन खिली
चाहत मिली ।

✍🏻डाॅ. संजीव नाईक

खिली कोंपल
मासूम सी किल्कारी
गूंजा आँगन ।

✍🏻उषा साहिबा

पीली सरसों 
केशरी है पलाश 
पुष्प सुवास । 

✍🏻सुशील शर्मा

रंग अनंत 
चित्रकार बसंत 
सजा दिगंत  ।

✍🏻सुशील शर्मा

बासन्ती भोर
पलाश दिनकर
क्षितिज कोर ।

✍🏻किरण मिश्रा

नैन भ्रमर
मुकुलित कँवल
मनस सर !

✍🏻किरण मिश्रा "स्वयंसिद्धा"

डाली का फूल
नाजुक सी जिन्दगी
करे कबूल ।

✍🏻बलजीत सिंह
     
तितली  रानी
रंगीन  फूलों  पर
हुई  दीवानी ।
     
✍🏻बलजीत  सिंह

फूलों की बातें
हवा हौले-से सुने
कहानी बुने ।

✍🏻पुष्पा सिंघी

भौंरा गुंजारे
जैसे कोई तपस्वी
मन्त्र उच्चारे ।

✍🏻डा.आनन्द शाक्य

पत्तियां देखें
पुष्प, भौंरे, बसंत
बनके संत ।

✍🏻शेख़ शहज़ाद उस्मानी

नवोढा कली
बिखरी अधखिली
भाग्य का खेल ।

✍🏻सुरंगमा यादव

रजनी भागी
किरणों की थपकी
कलियाँ जागी ।

✍🏻ऋतुराज दवे

भंवरा गाये
कलियों को रिझाये
पराग पाये ।

✍🏻गंगा पांडेय "भावुक"

अल्हड़ कली
सहमी सी संभली
उर में अलि ।

✍🏻दाता राम पुनिया

आया बसंत
धरती आच्छादित
फूले रसाल ।

✍🏻स्नेहलता "स्नेह"

न तोड़ कली
जग में आने तो दो
खुशियाँ देगी ।

✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

खिले सुमन
इठलाए चमन
पुलके मन ।
    
✍🏻रविबाला "सुधा" ठाकुर

बसंत राग
कोयल गाती कैसे ?
बनके कैदी ।

✍🏻तोषण कुमार चुरेन्द्र

बसंत ऋतु
सभी के मन भाए
जी भरमाए ।

✍🏻मधु गुप्ता "महक"

छाये बसन्त
हर मन तरंग
फूले पलास।

✍तेरस कैवर्त्य "आँसू"

फूल को देख
अलि गुनगुनाये
बाग में झूमे ।

✍🏻सविता बरई

ऋतु बसंत
कुहुकिनी कुहूके
डाल में झूले ।

✍🏻सविता बरई

आया बसंत
आम्र  कुंज महके
फूले पलाश ।

✍🏻केवरा यदु

ऋतु बसंत
कामदेव ने भेजा
खुशी अनंत ।

✍🏻भीष्मदेव होता
        
सरसों फूले
बसंत आगमन
चेहरे खिले ।

✍🏻अनिता मंदिलवार "सपना"
💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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