*कब होही तोर दरसन*
कब होही तोर दरसन
होबे कब तैहा परसन
मया ल तोरले पायबर
होवत हे मोला अड़चन
होही कब मोर आस पूरा
जिनगी तोर बिन हे अधूरा
मर जहूँ तइसे लगथे मोला
धकले करथे मोर जीवरा
कब मनाबो जी हम होरी
बँधाही कब मया के डोरी
रस्दा ल तोर देखत रहिथों
चंदा ल देखय जस चकोरी
तै मोर राधा बनवारी मैं
बिन रंग के पिचरारी मैं
हावस चंदा कस दूरिहा
हँव जस अँधियारी मैं
सपनाथंव तोला रात कून
दया नइ लागय थोरकून
काबर तै कलपावत हस
बात मान लेतेस मोर सून
तडपत हँव तोर मया बर
लेवस नइ तैह मोर खबर
का अइसन बात होगे हे
अब नइ धर सकंव सबर
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
९६१७५८९६६७
९८२६७००३१९
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें