शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

लेखनी


कुण्डलियाँ
लिखती जाए लेखनी,बदले है इतिहास।
योगदान भी आपकी,महके बन मधुमास।
महके बन मधुमास,पवन देखो लहराये।
जले नवीन मशाल,गीत जोशीला गाये।
करते नाज समाज,गगन में तारा दिखती।
देता नव संदेश,कलम जो निशदिन लिखती।।
रचना-
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

नीति नियम


पढ़ा लिखा इन्सान कोई जब 
नीति नियम पर प्रश्न उठाये।
कौन भला दुनिया में उसको 
पैर पकड़ कर समझाये।
बेमतलब की बात करे जो 
खाली पीली माथ खपाये।
अपनी पे आ जाये कोई 
उल्लू जैसे आँख दिखाये।


नीति नियम भ्राता ज्ञाता 
सब कोई अपनी हाँके जाने।
गाँव नगर लाक हुआ पूरा  
फिर भी अपनी ही है ताने। 
चलता कोई राह नहीं है 
सच्ची कितनों के समझाने।
मुर्ख बने फिरते हैं जन कोई 
बात नहीं एक न माने।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

कोरोना से जंग

एक बार फिर कोरोना से जंग है।
फीका- फीका फागुन का रंग है।

लगा भारत पर प्रतिबंध देखिये,
कोई मित्र नहीं किसी के संग है।

न ही कोई शोर शराबा नगर में,
न शराब पीये न ही कोई भंग है।

बरस बीता एक कोरोना कहर में,
फिर भी देखो अंतर्मन में उमंग है।

अमन  व सौहार्दभाव से मिलिये,
मिलकर  मनाये होली सतरंग है।

देवें परिचय एक्य सूत्र 'तोषण'
सतत जन-जन जीवन उमंग है।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा

बेरंग ही सही

बेरंग ही सही मना लिए
अब की बार होली फिर से
कोई लगाया नहीं गुलाल
न किसी मारी पिचकारी
ये कैसी है होली.....???

खुशियों में मानो ग्रहण लग गया
शैतान कोरोना काल सत्यानाश
बच्चों की चहचाहट नहीं थी
न ही नगाड़े की धुन कहीं
देखा न किसी के माथ रोली
ये कैसी है होली.....??

अबीर गुलाल का नहीं निशाँ
डी जे भी थे सब बंद पड़े
थिरकन नहीं थे पाँव पे
खड़े खड़े दूर से ताक रहे थे
एक दूजे को हमजोली
ये कैसी है होली.....??

ऐसा दिन न मिले किसी को
न छाये कभी गम के बादल
दुआ है परवरदिगार से मेरी
कुबुल करना सरकार अभी
भीगे बरस अगले सूखे चोली
ठीक से हो नित होली....√√ 

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा

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