छत्तीसगढ़ी
कज्जल छंद
बेटी
बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।
ये सबके बनाथे काज।
रखथे बेटी मोर लाज।
बनके तैहा शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।
चंदा जइसे तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।
मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय देर भले सवेर।
कोनों तोला दे नटेर।
आँखी देबे तै तरेर।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा