*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
पानी तैं पियादे मोला सुन भइय्या मोर.
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर...
बड़ धुर ले आवत हावंवमोर बेटी के गाँव ले
सुरता लेतेंव बरतरीबइठ थोरिक छाँव में
जीवरा मोर जुड़ा जातिस माढ़े मनमोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर..
हावय बड़धुरिहा संगी मोर गाँव धनगाँव
कोयली जिंहा गावय गाना कंऊवा करे काँव
खरखरा के तीर परथे लेले थोरिक शोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर....
सेवा करले पुन कमाले जिनगी के सार हे
जिनगी के नंइहे ठिकाना सार उपकार हे
काहत हावय तोषण ह बात मान मोर
मिटा जाही बने बाबू पियास तइहा मोर.....
तोषण कुमार चुरेन्द्र
क्या जमाना हैं
मुद्दतों बाद खुदा ने हमसे पूछा-बेटा !
जमीं पे आके कर क्या रहे हो ?
हमने कहा -या खुदाया ! जो आप
करते हैं ऊपर से .....
वही कर रहे हैं हम नीचे से ...
भला क्या?खुदा ने हमसे पूछा।
हमने कहा- जहाँ के लोगों को देखने का........
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...