जिनगी मा कभू घमंड झन करबे. माटी के बने हस माटी मा मिलबे.
*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।* *रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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