छूने की चाहत चाँद को पर हाथ नहीं जाता
गेसुओं पे उसके सोने का यूँ दिन नहीं आता
बड़ी ही कश़्मकश़ में है जिन्दगी अपनी यारों
गम ए जुदाई का यूँ ही जहर पीया नहीं जाता
गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018
नहीं जाता
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
शिवनाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
-
वफा तो हम करते रहे जहान में अपनों से, किसी ने जफा की और किसी ने बेवफाई। -आचार्य तोषण -आचार्य ...
-
सुराज के पता नइहे गरमे गरम सूरज आवत हे। जेठ बइसाख सही चइत मा आके लू झपावत हे। खोजय छंइहा गांव जवइय्या घाम म सेंकावत हे। आही सुराज एक दि...
-
महूं ह कतेक मजबूर हंव। मितवा तोरले गजब दूर हंव। बिछड के जहुरिया तोर ले फुटहा दरपन सही चुर चुर हंव। आचार्य तोषण