गुरुवार, 7 जुलाई 2016

सफलता की सीढ़ी

सफलता की सीढ़ी
चींटी जैसे दाना लेकर
पर्वत हमको चढ़ना है।
आंधी और तूफान में
दीपक जैसे जलना है।
चलना है साथ एक हो
हाथ सबका पकडना है।
हो सुगंधित सारा चमन
बन पुष्प ऐसे महकना है।

कितनी भी आए कठिनाई
स्वयं हमको लडना है।
नमन करे दुनिया हमको
गढ़ हमको गढ़ना है।
छोड़ दुनिया को पीछे
हमको आगे बढ़ना है।
सफलता की सीढियों पर
हमें निरंतर चढ़ना है।।

 

सुसंस्कार/सुसंस्कृति

सुसंस्कार/सुसंस्कृति
^^^^^^^^^^^^^^
कभू फूल त कभू कांटा
झोरा म लेल परही।
मझधार म फंसे डोंगा ल
पतवार म खे ल परही।।
देश,आघू बढाना हे त
अवइयय्या पीढ़ही ल
सुसंस्कार दे ल परही।।
^^^^^^^^^^^^^^
बदलगेहे परिवेश देश के
बदलत हे नैतिक अधार।
खवइ-पियइ घलो बदलगे
बदलगेहे अचार बिचार।।
सत अहिंसा क्षमा दया
रिहिस संस्कृति मूलाधार
आज के चकाचउंध में
बनगेहे जइसे निराधार।।
^^^^^^^^^^^^^^^^
भरत भुंइया म जनम धरिन
राम लछमन बीर हनुमान हे
पबरित भुंइया के भाग जगाके
बढाइस निरंतर एखर मान हे।
प्रहलाद हमर संस्कृति के शान हे
सुसंस्कारिता जिनगी के परान हे
सुसंस्कृत लइका भविस देश के
संस्कृति पुरखउती के मुसकान हे।।
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
-आचार्य तोषण

हेलमेट

वाह! का सुन्दर
समसामयिक चित्रण
बिना हेलमेट पहिरे
पेटरोल झन डलाबे।
नी पहिरबे
हेलमेट
डंडा म मार खाबे।।

  ।।जय छत्तीसगढ़।।

ॐॐ॥शीतला दाई॥ॐॐ

*****************
ॐॐ॥शीतला दाई॥ॐॐ
*****************
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।
छंऊनी बनाके लीम छंईहा मा
दाई ह आसन साजे हे।।
*****************
चइत कुंवार मेला भराए
भक्तन सब सकलाए हे।
मांगे मनौती पाए सुघर
दाई आशीष बरसाए हे।।
चंपा चमेली फूल मोंगरा के
दसमत फूल ह साजे हे
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
******************
नाक म नथनी कान म बाली
हांथ म चुरी लाली हे।
नांव आनी बानी हे दाई के
शैलपुत्री कुष्मांडा काली हे।
लाली लाली करे सिंगार
चुनरी लाली साजे हे।
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
मोर गांव के तरिया तीर मा
शीतला दाई ह बिराजे हे।।
*****************
शीतला माता की जय
*****************
आचार्य तोषण
*****************

आजकाल

आजकाल
अनुष्का संन चुटकुला म
विराट घुंस्सा होवत हे।
शरम करव इंसान हो
अपन कमेंट म बोलत हे।।

हमर देश के बेटी लइका
सफलता म बढत जात हे।
महामहिम राष्ट्रपति के हांथ ले
नेहवाल सम्मान पात हे।।
पेटरोल अगर डलाना हे
हेलमेट पहिर के जाबे।
बिना हेलमेट पहिरे भैय्या
मोटर सायकिल झन चलाबे।।
हमर देश के सियान ह
स्वच्छ भारत बनात हे।
गांव सुधरे देश सुधरही
घर घर शौचालय बनवात हे।।
बेटी पढ़ाव बेटी बचाव
सब झन ह गोहरात हे।
बेटी पढही बिकास गढही
पूरा देश ह सोरियात हे।
-आचार्य तोषण

चेहरा

चेहरा अइसने झन बनाए कर।
हांस के सबझन सन गोठियाए कर।
जीथे तोला देख के कोई संगवारी
बने मुच मुच ले मुसकुराए कर।।
आचार्य तोषण

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सबला हंसात रबो।।

ए मया के पिंजरा मा एकेझन, तड़पे बर छोड़ देस।
दगा दे देस मोला बैरी ,रटले मोर दिल टोर देस।।

 एक एक रोज हर रोज के लिए।
जिन्दगी की नई खोज के लिए।
नीत करते रहना नेक कर्तव्य
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खुशी के बेरा ल खुशनसीब बनाबो।
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खुशी के बरत दीया हिरदे मा जलाबो।
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भले जमाना म हमन रोवत राहन
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लेख अइसन लिख के सबला हंसात रबो।।
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 हाय टुरी तोर आंखी के कजरा।
खोपा मा झुले मोंगरा के गजरा।
घायल करदेहस जम्मो टुरा ल
मार डरही तोर कातिल ए नखरा।

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खुशी के बेरा ल खुशनसीब बनाबो।
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खुशी के बरत दीया हिरदे मा जलाबो।
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भले जमाना म हमन रोवत राहन
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लेख अइसन लिख के सबला हंसात रबो।।
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चिरई के चींव चींव सही चहकत रहिथे बेटी।

चिरई के चींव चींव सही चहकत रहिथे बेटी।
बगिया म हजारों फूल सही महकत रहिथे बेटी।
बेटा ह एक्के कुल ला करे उजागर भइय्या
दुनो कुल ला सूरूज बन उजागर करत रहिथे बेटी।
आचार्य तोषण

."गोलू के बिहाव "

ए रचना ह मोर गोलू कका ल समर्पित हे
जेहा भारत माता के सेवा करत हे
।ओखर फोटू संग मा...
."गोलू के बिहाव "
******************
नांव हावय नूतन गोलू
लइका हमर बबा के।
मडवा म जमके नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के।।
******************
संगे बाढेन संगे खेलेन
खाएन अरम पपइय्या।
मैं बनगेंव गुरूजी संगी
गोलू बनगे सिपईहा।।
करे देश के रक्षा संगी
बन्दुक गोली चलाके।
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥१॥
******************
दंता श्री ला नेवता देके
मडवा ल परघाबोन।
ढेड़हीन ढेडहा मीलके
सुघर चूलमाटी लाबोन
मडवा बने सजाबो संगी
करसा दीया जलाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥२॥
******************
हरदी चढही हमर कका के
मंगल गीत ल गाबोन।
मैन नाचा झुमरही संगी
बनेच हरदाही मताबोन।
पिंवराही गोलू के काया
तेल हरदी मा सनाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥३॥
******************
बाजा बाजही आचार्य जी के
केंवरा ददरिया गाबोन।
दोहा परही नूतिश भाई के
मोहरी निशान गदकाबोन।।
डमउ डफरा बेन्जो तासा
सरगम सबे जमाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥४॥
******************
गोलू बनही दूल्हा राजा
सुट बूट पहिराबो जी।
महर महर ममहावै कका ह
फॉग परफ्यूम लगाबोन जी।।
नइ राहंव महूं हा पाछू
जाहूं सफारी चमकाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥५॥
******************
दरबारी नवागांव मा
जाबोन जी बरतिया।
कोनो जाही मारशल मा
कोनो जाही फटफटिया।।
हम तो जाबोन रे भैय्या
याद के बोलेरो लगाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥६॥
******************
लगन परही गोधुली बेरा मा
सब के मन हरसाही गा।
होही कन्यादान रे भैय्या
करजा जम्मो छुट जाही गा।।
आही काकी हमर अंगना
दाई ददा ल रोवाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥७॥
******************
होही धरम टीकावन घर मा
बबा, डोकरी दाई के हांथ ले।
आही गोलू के ममा मामी
सब परिवार ल साथ ले।।
रावटे परिवार आशीष दिही
हजारों हाथ लमाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥८॥
******************
लाडू बरा खाबोन संगी
संग मा सबला खवाबो।
जुग जोड़ी सलामत रहे
अइसन दुआ मनाबो।।
ग्रुपिंग फोटो खिचाबो सबे
एक जगा जुरियाके
मडवा म जम के नाचबो
बिहाव हे गोलू कका के.॥९॥
******************
रचनाकार-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव, डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छ. ग.
४९१७७१
मुहूबाईल:९६१७५८९६६७

बन जाए अनेक।।

मड़वा म मिलबो संगी मोर।
आश पूरा करहूं बलम तोर।
तोर संन जीए मरे के कबले
मन मा समाय आस हे मोर।
तोर मोर के चक्कर मा परे हे संसार ह।
हमर कब कही गुनथो माया के बजार ह।।
 बन जाए कतको बैरी दुश्मन जमाना हमर।
चमकही बिदिंया बरोबर छत्तीसगढ़ हमर।
 मोला मया मिलत नइहे ,मोर बर सब बेकार।
दवा मया के खाए बिन, चोला मोर बीमार।।
 राख बिवेक चालिए,सदा राह नेक।
एक-एक जोड़िए, बन जाए अनेक।।

बाबा समागम

बाबा समागम
भक्त: बहुत दिन ले बेरोजगार हों ,नौकरी नी मिलत हे ,का करो?
बाबा: ऐखर पहिली तंदूरी चिकन कब खाए रेहे?
भक्त: आज तक नी चखे हो।
बाबा: तभे किरपा कम होवत हे।पहिली कोनहो फाइव स्टार होटल मे बइठके चिकन तंदूरी खा किरपा दौड़ के आही नौकरी घलो लग जाही।
भक्त:बाबा होटल के बिल ल का किरपा भरही?
बाबा: बिल भरे के पैसा नइहे त इंहा आए काबर?
भक्त: जतिक रिहिस ओला एन्ट्री फीश मे जमा करदेंव अब पैसा कहां ले लांव।
बाबा: अच्छा आहनचो किरपा कम होवत हे। अच्छा बता चना कब ले नी खाहस ?
भक्त: रोजेच तो चना खाके गुजारा करत हंव।
बाबा: आज ले चना खाएबर बंद करदे। किरपा आए के शुरू होजही। चना के पैसा बांचही तेकर चिकन तंदुरी खालेबे। सब बने हो जही।
भक्त: अरे चना ल नी खाहूं त जीहूं कइसे?
बाबा: ए मोर समस्या नोहे।
भक्त:मोर दोनो किडनी खराब हे लीवर सड़ गेहे डाक्टर मन जवाब दे डरे हे कुछु करव बाबा।
बाबा: ठर्रा कब ले नी पीएहस?
भक्त: का बात करथस बाबा मे तो चाय काफी ल घलो हाथ निलगांव।
बाबा: ईही तो बात हे एकरे पाएसे किरपा कम होवत हे। जिनगी मे ठर्रा नीपीबे त किडनी लीवर सब खराब होही। जा पहिली ठर्रा पीके आ।
भक्त:मोर बिहाव नी होत हे बाबा।
बाबा: बिहाव मे लाडू कबले नी खाहस?
भक्त:काली परनदिन नरनदिन त खाए रेहेव बाबा।
बाबा: दुसर के बिहाव मे रोज रोज लाडु खाबे त किरपा कहां ले आही। अब बरफी खा जलदी बिहाव होजही।
भक्त: बाबा मेहा बड पढथौ फेर परीक्षा मे पास नी होवव।
बाबा: अच्छा कामा पढाई करतहस।
भक्त:बी एस सी करतहंव।
बाबा: कोन कोन से सबजेक्ट हे ?
भक्त: फिजिक्स कैमेस्ट्री मैथ्स बाबा।
बाबा: एखरे सेती किरपा नी आत हे। काली ले राजनीति अउ दर्शन शास्त्र के पढाई कर अउ बी एस सी के पेपर देवा पास हो जबे।
तथास्तु॥

tk

भरे गरमी मंझनिया बबा,चटले भोंभरा जनाय।
पटवा भाजी जिर्रा चटनी कोदइ बासी सुहाय।।

गरब गुमान न कीजै, सकल मान घट जाय।
शीश सबन को दीजै, अपन मान बढ़ जाय।।
आचार्य तोषण

दारू

नानकून प्रयास
समारू आरूग मंदहा।समारू के बिहाव होय चार पांच साल बितगे राहय। एको झन दीया जलइय्या नी राहय। बिचारा ह अपन दुनो झन मंदिर मंदिर जेती नी तेती लइका पाए बर चक्कर कांटत राहय। बइगा गुनिया झारा फूंका आनी बानी के उदीम करत रिहीस। गोसइनिन थोरकून पढे लिखे रिहीस त कथे-"हस्पीटल मा जातेन का चेक करातेन ।सब समस्या के हल हो जतीस।" समारू मानबे नइ करे। तभोले ओखर गोसइनिन ह एक दिन हस्पीटल लेग जथे। त चेकिंग मा पता चलथे कि समारू के ददा बने के कोई चारा नइहे। समारू सन्न खागे। कारन पुछिस त डाक्टर बतइस एखर मूल कारन तोर दारू पियइ हरे। तब ओला समझ मा आइस ।अउ उही दिन ले कसम खइस आज के बाद अब कभू दारू नइ पियो। अउ सबझन ला घलक चेताहूं। कि दारू कभू झन पीना।
॥नशा नाश के जड॥
आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा

मया के गोठ ल का कहांव

मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७
मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७
मया के गोठ ल का कहांव
आथे मोला गजब रोवासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
सुरता ह तोर लामे रहिथे
हेराय बासी ह माढे रहिथे
सुध मा तोरे होगेंव दीवाना
जहुरिया उड़ावय हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
काम बूता म मन नइ लागे
कोन जनी आके का झपागे
किंजरौ जंगल झारी बैरी
तन मन मा भरगे थकासी।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
आजा रे बैरी तोला गोहरांव
रात अउ दिन तुहिला बलांव
आजा पिरोही मोर तीर मा
खिल जही चेहरा मा हांसी।।
चलदेहे मोला छोड़ के बैरी
होगे मोर टोटा के फांसी।।
-आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग. ४९१७७१
मुहबाइल ९६१७५८९६६७

आना

उनका आना जाना अजब इत्फाक था
हम बैठे थे इंतजार में बैठे ही रह गए।।

नसीब

मुझे अपने नसीब से, कोई गिला नहीं।
लिखा है जो रब ने ,मुझको मिला वही।।
-आचार्य तोषण

हाल-ए-दिल

हाल-ए-दिल का कांहव मुंहू ले कुछु फूटय नही ।
आंखी सबला कहि डारे ओला कुछु सुझय नही।।
-आचार्य तोषण

लाली गाल

लाली गाल दिखत हे।
चेहरा तोर कमाल दिखत हे।
बने मनाय होहू आप मन होरी
मुच मुच ले मुसकान दिखत हे।।
-आचार्य तोषण

होत बिहनिया भुंइया मा

होत बिहनिया भुंइया मा
सुरूज ह अंजोर बगरात हे।
एखर सेवा म जुट जावव
सुघर संदेसा पहुंचात हे।।
धरले बासी पताल चटनी
भुंइया के सेवा करेबर।
हरिहर सोनहा बाली के
निंदई कोड़ई करेबर।
हरियाय सुघर धान खेत मा
लहर लहर लहरावय।
झुमै नाचय मन हा संगी
खुसी के गीत ला गावय।
करिया बादर सुख के गागर
रिमझिम बरसय पानी।
फागून के रंग मा सनाय
जइसे लागय जिनगानी।
सबो डाहर छाहे हरियारी
भुंइहा भाग संवरात हे।
इही खुशी मा मोरो मन हा
फूलय नही समात हे।।

दीपक हूँ मैं

दीपक हूँ मैं तो सदा जलूँगा ही।
आंधी और तूफां से लडूँगा ही ।
आगे रहूं मैं या पीछे तुम्हारे
राह पे तेरे साथ साथ चलूँगा ही।
-आचार्य तोषण

सपना


सपना कभू रोवाथे अऊ कभू हंसाथे।
सपना ह मोर मयारू संन भेंट कराथे।
झन बना तै कभू सपना ल शमशान,
सपना,एक दुसर ल जीएबर सिखाथे।।
-आचार्य तोषण

कोन रंग लगावंव तोला

कोन रंग लगावंव तोला
मोला समझ नी आत हे।
देख मया के रंग लगे
सब रंग मन शरमात हे।।
-आचार्य तोषण

सौभाग्य

अपने विचारों को प्रकट करना अपने हाथ की बात है।
आपको पसंद करना या ना करना बात की बात है।
जो आपका सम्मान करे नतमस्तक होके
उनका सम्मान करना सौभाग्य की बात है।।
आचार्य तोषण

नमन है

नमन है शत शत नमन है
जिनके रक्त से सिचिंत चमन है।
आओ जरा याद करे वीरों को
अर्पित किया अपना तन मन है
आचार्य तोषण

पथरा ह

पथरा ह मारय ,अऊ पथरा ह टोरय।
पथरा ह एक दुसर ल, मया म जोरय।
पिसय मेंहदी अपन , हाथ हमर रंगाय।
हथौड़ी के मार ले,मंदिर रहय पूजाय।।
आचार्य तोषण

सुघर एसो होरी में।

अबीर गुलाल लगाबो सबला
सुघर एसो होरी में।
एक दुसर ल बांध के चलबो
मया पीरीत के डोरी में।।

आस अऊ बिसवास के
भाव सुघर बने रहय।
रंग भरे संसार म सब
सरभर ले रंगे रहय।।

झन रहय कोनो बैरी दुश्मन
एक दुसर के मितान बनय।
अमन शांति संदेश देवइय्या
एक घांव हिन्दुस्थान बनय।।

भेदभाव के खोचका पाटव
होरी के हे अतरी शोर।
कहत हवय आचार्य तोषण
बधई शुभकामना लेलव मोर।।
-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव, डौंडीलोहारा
बालोद छ. ग.४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

होरी तिहार

सबोझन ल होरी तिहार
अरकरहाचकन ले बधाई

आज हावय होलिका दहन
मिलके आज सब इही कहन ।
मिटय जर मूल ले सब बुरई
एकता भाव के सांथ रहन।।

बुराई ऊप्पर अच्छाई के
सुघ्घर अकन ले जीत हे।
मनखे,मनखे के काम आवै
एखर ले बढ़िहा का रीत हे।।

आज होलिका दहन में
सब कुरीति ल जलाबो।
मया भरे परब मा संगी
मया के दीया जलाबो।।

-आचार्य तोषण
ग्राम-धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद, छ. ग.
९६१७५८९६६७

नकल करे बर अकल लगाएल परही।


॥श्री गरूवे नम:॥
नकल करे बर अकल लगाएल परही।
गलती करबे त घलो सुधराएल परही।
बिन गुरू के गलती नइ सुधरै संगी,
सुधरे अऊ सुधारे बर गुरू बनाएल परही।


छत्तीसगढ़ के माटी जइसने बनाबे तइसने बनहूं।
मैं ओ पानी अंव जे रंग ला डारबे ओइसने रंगहूं।।

काम कर कुछ ऐसा तब नाम हो पाएगा।
इसके बिना पगले दिल क्या जीत पाएगा।

 पल पल रंग बदलना गिरगिट का काम है
हम तो इंसान है इंसान बन कर रहे तो अच्छा है।

 का कांहंव कछु कहे नही जाए।
बोली अंतस मा रहे नही जाए।
मोर तो मन अभी रिहिस नही
वाह वाह कहे बिन रहे नही जाए।।



तिरछी नजरों से यूं न देखिये
डर... हमें लगता बहुत है।
आपको देखकर हमारी नजरें
कहीं कोई खता तो न कर बैठा।

-आचार्य तोषण

-आचार्य तोषण

होरी हे।

देदनादन शराररा होरी हे।
फागुन मे माते छोरा छोरी हे।
माते कृष्ण कन्हैया संग मा
बृज के राधा गोरी हे।।
-आचार्य तोषण

धनगांव भुइंय्या के घुर घुरहा माटी

मय तो धनगांव भुइंय्या के घुर घुरहा माटी अंव गा।
हंथ्थी जेला रमंज के रेंगय अइसन छोटकु चांटी अंव गा।
नाननान लइका जेला खेले अइसन फुटहा बांटी अंव गा।।
नोनी के गोड़ मा बाजै छुनछुन अइसन हटहा छांटी अंव गा।।
-आचार्य तोषण

मया के पीरा

मया के पीरा काखर कर गोहरांव
कोन ला सोरियांव कोन ला बतांव।
खुदे त मे रोवत हावंव जिनगी मा
कोन ला गुदगुदांव कोन ला हंसांव।।
-आचार्य तोषण

॥नरसिंह अवतार कथा॥

॥नरसिंह अवतार कथा॥

जय बिजय है दोऊ भाई
हरि के है पहरेदार।
प्रभु दरश को आए जब
चार झन रिषी कुमार।।

रोक कहा जाना मना
हरि आराम फरमाए।
कहे रिषी कुमार तब
हमें कोऊ रोक न पाए।।

तुम जो हमको रोके हो
तुरंत दानव हो जाओगे।
जनम तीन के बाद में
हरि से मुक्ति पाओगे।।

पहली जनम धरे दोऊ भाई
हिरण्यकश्यपु हिरण्याक्ष।
देवता पर अत्याचार करे
करे रिषीन पर कटाक्ष।।

हिरण्याक्ष ने जब धरा को
समुंद्र के अंदर डुबाया ।
तब हरि वराह रूप में
समूचा जगत बचाया।।

हिरण्यकश्यपु के घर सुंदर
भक्त प्रहलाद ने जन्म लिया।
भक्त नारद के मान बात
नारायण की भक्ति किया।

करे अत्याचार हिरण्यकश्यपु
प्रहलाद समुद्र में फेंक दिया।
भक्त का मान बचाने हेतु
हरि ने उनको गोद लिया।।

नाना भांति अत्याचार करे
भक्ति में लीन भक्त रहे।
ईश्वर इच्छा मान भक्त
नारायण नारायण जाप कहे।।

थी होलिका जिसकी बुआ
प्रहलाद ले आग में बैठ गई।
बाल न बांका हुआ भक्त का
होलिका जलकर ऐंठ गई।।

घड़ा भरा पापात्याचार का
नरसिंह ने अवतार लिया।
गोद उठा कर तब हरि ने
हिरण्यकश्यपु संहार किया।।

पुष्प वर्षा हुई स्वर्ग से
देवता करे जय जयकार।
पहला जनम सफल किया
दो रहा अभी उधार।।

॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:॥

-आचार्य तोषण

होरी

सीखात हे के धमकात हे समझ नी आत हे।
कोन जनी कते तिन डबरा ले नहा के आत हे।
होरी मनाएके अपन अपन घलक होथे तरीका
लागत हे एसो होरी सब झन अईसने मनात हे।
आचार्य तोषण

चौंरा तुलसी

सब घर सुघर अंगना मा
चौंरा तुलसी दाई के।
घर सदा खुशहाल रखय
पइंय्या लागंव महामाई के।।

राम नाम गाले

राम नाम गाले
राम नाम गाले तोर काम आही गा
अब नई गाबे त ते कब गाबे गा।
इंहा आके ते लगे हस खाय अउ कमाए बर
धन कखरो संग नइगेहे लगेहस बनाए बर
खाली हाथ आहस खाली हाथ जाबे गा
अब नई गाबे त .......
पानी ह तो पानी-पानी दुध ह दुध होही जी
जतरी जेहा हसही ओतरी ओहा रोही जी
धरम करम राम नाम संगे जाही गा
अब नई गाबे त ........
आचार्य तोषण
श्री गुरूघासीदास मानिकपुरी
मानस मंडली ग्राम धनगांव डौंडीलोहारा

-आचार्य तोषण

जस हाल तोर हे ,तस हाल मोर
काखर कर गोहराए, कोन ल सोरियाए।
मउसम म ठिकाना नईहे ,आधा बदराहा घाम
अइसने मा घला कइसे,चना लाखडी मिंजाए।
-आचार्य तोषण

मानव

मानव मानव का केहे संगी
काखर कतका मांनव।
मानव होगे हे लबरा संगी
अऊ कतका मैं जानव।।
-आचार्य तोषण

सुप्रभातम्


सुप्रभातम्
आदमी नहीं,आदमीयत को सलाम करता हूँ।
देख उसकी नेक नियत पे कलाम भरता हूँ।
यूं तो हजारो की भीड़ में मौजूद है आदमी,
सबका करे सजदा मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ।।

बाबा तुलसीदास जी लिखते भी है.
"सियाराम मय सब जग जानि।
करहुँ प्रणाम जोरि जुग पाणि।"
"जड़ चेतन जग जीव सब सकल राम मय जानि ।
बन्दउं जिनके पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।"
ध्यान मूलं गुरू:मुर्ति:पूजा मूलं गुरू पदम्।
मंत्र मूलं गुरू: वाक्यं मोक्ष मूलं गुरू कृपा।।
सीखने की है चाह अगर,रहे मन में ध्यान।
ध्यान है तब मिले गुरू,गुरू मिले तब ज्ञान।।





-आचार्य तोषण


फुल नही जो शाम ढलते मुरझाऊं
मैं तो खुशबू हूँ हर सांस बसता जाऊं।
भुलना चाहो मुझको लाख मगर
मैं वो शख्स हूँ हर किसी को याद आऊं।।
-आचार्य तोषण

होत बिहनिया।

होत बिहनिया। राम रमइय्या।झोंक भइय्या।
मंगल करइय्या।बिघन हरइय्या।बुद्धि देवइय्या।
ज्ञान बंटइय्या।बीना बजइय्या।सुर देवइय्या।
डमरू बजइय्या।बिष पियइय्या।नंदी चड़इय्या।
बंशी बजइय्या।रास रचइय्या।नांग नथइय्या।
शबरी तरइय्या।बोईर खवइय्या।रावन मरइय्या।
महिषा मरइय्या। दुरगा मइय्या कैडब तरइय्या ।
-आचार्य तोषण

,नांव इंहा रही जाय।।

करू बचन जहर बरोबर,भरे अंतस पीर समाय।
बोली मधुर अमरीत सही, सकल शरीर सींचाय॥
ए तन लोंदा माटी के,माटी म मिल जाय।
परे सपेटा कुम्हार के, घर-घर रहे पूजाय।।
आखर दुठन दीया के, घर-घर अंजोर बगराय।
मिले भाग ले मानुस तन, तन-तन के रहिजाय।।
आके मानुस ए जग में, मोर-मोर कही गोहराय।
नारी परानी संग संगवारी,कोनो साथ नही जाय।।
करले धरम करम जियतले, ले तै पुण्य कमाय।
जही पुण्य तोर संग संगवारी,नांव इंहा रही जाय।।
आहस जग मा जाबे जी, रहिबे कहां लुकाय।
संग धरे ते लकड़ी के, संग समशान पहुंचाय।।
-आचार्य तोषण

नशा

नशा नशा कहिथस, नशा नाश के जड़।
करके नशा आज, नरक रद्दा झन गढ़।
कोन बांचे कोन बांटे, अपन धन उरकाय।
नही पइसा हाथ मा,लोटा थारी बेंच खाय।।
नशा में सबके जग म,दउलत इज्जत जाय।
नशा डर नशा जहर जीते यमपुर पहुचाय।।
-आचार्यतोषण

पेड़ लगाबो...

पेड़ लगाबो...
आवौ भइय्या पेड़ लगाबो
जीनगी ल खुशहाल बनाबो।
पेड ले होथे जग हरियारी
दिन जस होरी रात देवारी
रूख राई ल देख देखके
भरजथे आंखी ए कारी
अपन भविस ल हमी बचाबो
आवौ भइय्या पेड लगाबो।।
कारखाना के गुंगवा ले
परियावरन ह होवय खराब
आज्जे हमर पारी हे भइय्या
फेर कब सोंचबोन जनाब
अपन जीनगी ल खुदे बचाबो
आवौ भइय्या पेड़ लगाबो।।
पेड़ के आज कटाई रोकव
जेखर बरखा आथे
जगा सबे हा सुंदर दिखै
देख हरियारी छा जाथे
ए भुइंय्या ल हरियाबो
आवौ भइय्या पेड़ लगाबो।।
-आचार्य तोषण

सरस्वती शिक्षा संस्थान

सरस्वती शिक्षा संस्थान
सब झन ल रद्दा बतइय्या
सरस्वती शिक्षा संस्थान गा।
जेकर रूख के छइंहा मा
मिलिस हमला पहिचान गा।।

उन्नीस सो बावन में
अंकुर ए उपजाईस हे।
थोरकिन लइका धरके
पउधा ल रुख बनाईस हे।
सुघर ठउर बनाए भईय्या
गोरखपुर गउठान गा।।
सब झन ला...
पढ़े जिहा सबके लइका
शिशु मंदिर ओला कहिथे।
भईय्या बहिनी दीदी आचार्य
शिशु मंदिर म रहिथे।
इंहा के लइका बने सबे
संसकारी गुनवान गा।
सब झन ला...
गौतम गांधी चाचा नेहरू
ए धरती म जनम धरिन।
एकलव्य बालक वीर हकीकत
अपन धरमबर जीन मरिन।
इंहा पढ़े बहिनी भइय्या
करत हे करम महान गा।
सब झन ला...
पढ़ई लिखई के संगे संग
सुसंसकारी बनाथे।
संगच्छध्वं संगदध्वं के
भाव सुघर जगाथे।
दाई सरसती के चरण म
सादर मांथ नवांन गा।
सब झन ला...
शिशु मंदिर के शिक्षा ल
सबो डहर बगराबो।
गली खोर के धुर्रा ल
सुघर कनक बनाबो।
एही खातिर आवौ सबे
करबो अब परसथान गा।
सब झन ला...
-आचार्य तोषण
सशिमं डौंडीलोहारा

होरी तिहार मा...

होरी तिहार मा...
एसो के होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो
डोकरा बबा डोकरी दाई
सबला गुलाल लगाबो।।

नई छोड़न भइय्या भउजाई
बड़का बबा अउ बड़की दाई
कका काकी दाई ददा संन
सुघर फगुवा गाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।
माते सरसो के फुलवारी
सियान मितान संग संगवारी
धरे गुलाल अबीर हाथ मा
पिचका अजब चलाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।
रंग पानी के होरी तिहार
बिन पानी हे सब बेकार
जल जीवन हे ए अनमोल
पानी हमन बचाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।
चउहान भइय्या मिलन मलरिहा
हीरा लहरी ललित टिकरिहा
जख्मी ललित महेनदर माटी
अमन देव संन नंगारा बजाबो
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो ।।
-आचार्य तोषण

शनिवार, 25 जून 2016

।। गंगा मंइया ।।

।। गंगा मंइया ।।
भुंइया ले दाई तैहर उपजे
सुघ्घर पबरित हे तोर ठांव
छत्तीसगढ़ के मान ओ दाई
बालोद तीर झलमला गांव।
बइठे हस झलमला म दाई
गंगा मंइय्या तै कहाय ओ ।
चइत कुंवार के महिना दाई
तोर अंगना मेला भराय ओ।।
रिगबिग रिगबिग जोत बरय
जग उजियारा बगराय ओ।
नर नारी तोर तीर आके
मन के मनउती पाय ओ।।
कोनो लावय सरधा के फूल
नरिहर भेला कोनो लाय ओ।
अगर कपूर धूप बांती दीया
दाई तोर बर बिसाय ओ।।
आवय कोनो रेंगत अंगना
कोनो घोंनडत आय ओ।
कोनो दाई अपन छाती म
सरधा के जोत जलाय ओ।।
नवदिन नवरात ओ दाई
करथन नवधा भगति ओ।
जुरमिल राहंन ए जग मा
दे दे अइसन शकति ओ।।
मांगव मंइय्या हाथ जोड़
आस पुरो दे तोषण के।
मोर जिनगी अंधियार हे
दीया बार मन रोशन के।
।। गंगा मंइय्या की जय ।।
******************
रचना
आचार्य तोषण
गांव-धनगांव
डौंडीलोहारा बालोद(छ. ग.)

तोर मया के चिनहा ल

तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म
ठोहूं तारा लगाके।
अगोरा म तोर बइठे हावंव
रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा
लहूं चूरी पहिराके।।
मोर मया के कुरिया ल
कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल
कब सतरंगी रंग भरबे।।
मोरो सुध तै लेले पगली
बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना
मोर जी के जंजाल हे।
मया के चिनहा देके तैहा
जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके
काबर टुंहू देखात हस।।
मर जहूं तोर सुधरई मा
जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली
जिनगी के मोर उद्धार कर।।
आचार्य तोषण

मनोकामना।।

तोर हरिहर फुलवरिया मा
सुघहर गुलाब के फुल खिले।
ददा दाई कका काकी संग
माता रानी के आशीष मिले।
जिनगी सदा दीया बरोबर
अंजोर करे जग जगजगले।

अंधियारा तीर आवय मत
दुख के झन होवय सामना
जिनगी तोर खुशहाल रहय
हावय इही नीत कामना।
माता रानी पूरा करत रहय
जम्मो तोर मनोकामना।।
आचार्य तोषण

गंगा मंइया

तोर मया के बरसा दाई झुमर झुमर के बरसय।
आस पूरो सबके माता झन कोन्हो ह तरसय।।
जल भीतरी ले जनम धरे गंगा मंइया कहाय।
नर नारी सब भक्तन मन के आस ल तै पुराय।।

जल जीवन हे

कहिथन जल जीवन हे जीवन जल हे।
एला बने संवारले तभे सबो के कल हे।
पानी अनमोल हे ए बात तैहा समझले ।
पानी ल बचाना हे गांठ पारके धरले।

॥दारू॥

॥दारू॥
का अंग्रेजी का देशी कहिले,रंग-रंग के हे दारू।
इही दारू चक्कर म,मरगे कतको मंगलू समारू।
दारू के मारे कहीं नी बांचे, थारी बटकी बेंचात हे।
दाई ददा सुवारी लइका ल,खूंन के आंसू रोवात हे।
पीए रथे दारू लटलटले,कुकूर माकुर कस सोथे।
होत बिहनिया उतारा बर,देशी दारू म मुंहू धोथे।
छठ्ठी बरही सब्बे जिनिस मा,दारू होगे हे फैशन।
बिन दारू काम नी होवय, जमाना आगे कइसन।
बर बिहाव के दिन म गाड़ी,दारू पी-पी के चलात हे।
खोधरा डिपरा देखय नीही,पेंड़ म जाके झपात हे।
एक पाव दारू पिए म,कोन जनी का मंजा आथे ।
अमरीत असन खून म,पचीस ग्राम जहर मिलाथे।
नशा म कखरो बनय नही, कहिथे नाश के जड़ ।
नशा देव तुम छोड संगी,सुघ्घर नवा जिनगी गढ़।
आचार्य तोषण

॥ बिहाव लहर ॥

॥ बिहाव लहर ॥
बर बिहाव के चारो मुड़ा
उडत हावय गजब शोर।
पोंगा बाजा अउ डीजे के
अवाज बाजय कानफोर।

जगा जगा बिहाव लाडू
बरा सोंहारी झड़कत हे।
काखरो बर पानी ठंडा
कोन्हो पियत सरबत हे।
साजे मडवा पेड़ चार के
गंडवा बाजा बाजत हे।
मैन नाचा हरदाही माते
नंगतेहे दोहा पारत हे।
दुल्हा सनाय हरदी मा
हरिहर काया पिंवराय।
दुल्हनिया घलो कम नही
मुसमुस मन मा मुसकाय।
कुम्हडा बटरा आलू दार
संग लपेटे पटवा भाजी।
टुरा टुरी राजी हावय
काय करय मुल्ला काजी।
बरतिया जाय बर लगेहे
बोलेरो वेन टाटा सफारी।
धरम टीकान म टीकय
आनी बानी लोटा थारी।
आवय दुल्हिन जब अंगना
घर मा पूजा पाठ करवाय।
बेटा बेटी के बिहाव रचाके
सबझन खुशहाली मनाय।
आचार्य तोषण

॥बेटी॥

॥बेटी॥
****************************
बेटी बनके जनम धरेंव, दाई ओ तोर कोरा मा।
दिन कटै हे दाई तोर, एकठन बेटा के अगोरा मा।
मोर छठ्ठी मा रुखा सुखा,सगा सोदर नइ मानेस ।
का बनगेंव बैरी दुसमन, अपन लइका नइ जानेस।
तहूं बेटी रेहे अपन दाई के,महूं तोरे छंइहा आवंव।
रहूं तोर संग आघू पाछू, छोड़ तोला कहां जावंव।
का बेटा हा सबरदिन,अपन पुरखा कुल तारत हे।
बेटी घलो कम नइहे, मइके ससुरार ल उबारत हे।
तइहा के बात बइहा लेगे,नवा जमाना आवत हे।
आज बेटी बेटा संन,कदम ले कदम मिलावत हे।
बेटी जागिस जीजा बाई, कोरा मा शिवा खेलाय।
गरजिस हाबे लछमी बाई, अंगरेज दूरिहा भागय।
महूं ल थोरकून पढन दे,जिनगी ल अपन गढन दे।
नांव होवय मोर संग तुहर,अइसन करम करन दे।
मरहूं देश बर जीहूं देश बर ,देश के सेवा बजाहूं।
चहूंओर ए दुनिया मा ,भारत के तिरंगा लहराहूं।
*****************************
-आचार्य तोषण
९६१७५८९६६७

सुराज

सुराज के पता नइहे गरमे गरम सूरज आवत हे।
जेठ बइसाख सही चइत मा आके लू झपावत हे।
खोजय छंइहा गांव जवइय्या घाम म सेंकावत हे।
आही सुराज एक दिन खाली फोकटे गोठियावत हे।
आचार्य तोषण

न देखा

फना कर गए जिंदगी अपनी उनकी यादों में
कमबख़्त ने पलट कर भी न देखा जाते हुए।
आचार्य तोषण

हरदावत हे।

हरदी म मोर काया हरदावत हे।
लेके बरतिया पिया आवत हे।
=================
घोडी म चढके आही राजा।
डोला बइठा ले जाही राजा।

 

नव-किरण

नव-किरण की आभा लेकर हुआ नया सवेरा।
अपने-अपने काज संवारन छोड़ा रैन बसेरा॥
आचार्य तोषण

रजनी

आत सोम जब रजनी संग,कका सूरज भागय।
करिया बदरा म चंदैनी जोगनी बरोबर लागय।।
-आचार्य तोषण

बेवफाई।

वफा तो हम करते रहे जहान में अपनों से,
किसी ने जफा की और किसी ने बेवफाई।
-आचार्य तोषण
-आचार्य तोषण

पानी भरे

करसा मा पानी भरे बर नोनी
मजा लेके पानी डोहारत हे।
मन भर ठंडा पानी पिहूं कहिके
भोंभरा के करत नही सोगारत हे।

दहेज


आज हम देखत हन हमर ए समाज के भीतर म दहेज लेना नइहे न देना नइहे कहिके गोठ बात करथे । फेर अभीन तक ले ए बिसय मा कोन्हो ढंग ले जमदरहा कदम एमा रोक लगाय बर नी उठात हे। अभी बिहाव बर मा सबे डहर दहेज के आनी -बानी के समान देखे बर मिलत हे । हम मन इही सोंच म रहिजथन कि मोर सगा संबंधी मोला कहीं कुछू कहि दिही का, ए बात धरके करजा बोडी करके दहेज लेके देके बिहाव तो कर डरथन ।ओखर बाद मरत ले छूटत रा। सियानन मन कहिथे बेटी बिहाव करे ताहन गंगा नहा डरे यहू का गंगा नंहवई ए ।दहेज के चक्कर म घर बूडी होवत हे। का एहा कभू बंद नी हो सकय ? बंद होही फेर ओकर पहिली हम मनला सोचना पड़ही । कि अब हम न दहेज देन न लेन ।
घर परिवार ल जादा खरचा उठाय ल मत परे ।करजा म लदाय झन । अइसे सोच समझ के सरकार डाहर ले सुघर अकन आदर्श बिहाव योजना निकले हे जेकर हमला लाभ लेना चहिए। अउ दहेज मुक्त अउ करजा मुक्त रहना चहिए।
-आचार्य तोषण

ALONE

तनहाई का मंजर भी अजीब होता है,
न चैन से रोने देता है न सोने देता है।
आचार्य तोषण

नदी

नदी
नित कलकल सूर
है पिरोती सुमधुर।
करती नित भलाई
रहती बदी से दूर।

अविरल बहती जाती
नित राग प्रेम सुनाती।
धरा की गोद से निकली
सबकी प्यास बूझाती ।
-आचार्य तोषण

मेरे प्यारे हिंदुस्तान की

मेरे प्यारे हिंदुस्तान की
हर बात ही निराली।
रक्षक देश की सीमा पर
खेलते होली दीवाली।
हिम आवली पर तिरंगा
लहर-लहर लहराया
महासागर हिन्द करता
हम सबकी रखवाली।
बहती जहां गंगा यमुना
गाय को मां बुलाती।
त्याग और तप की गाथा
कवि की वाणी गाती।
राम कृष्ण जन्म लिया
मां भारती के आंगन में।
तुझको कसम है मिट्टी की
न लगाना दाग दामन में।
-आचार्य तोषण

आचार्य तोषण के रचना

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॥मजदूर॥


मे मजदूर मेहनत के
पसीना खून ओगरावंव।
सरदी गरमी बरसा दिन मा
मन लगाके कमावंव।।

होत बिहनिया बासी धरके
काम बूता मा जाथंव।
भरे गरमी के मंझनिया संगी
बोरे बासी ल खाथंव।
लोग लइका झन भूख रहय
सबके सुध ह लामे।
ईटा पथरा रेती माटी
सीरमेंट गिट्टी हांथ ले जामे।
मोर दुनों हांथ ले सबके
घर कुरिया सिरजत हे।
बने हवंव मय तुंहर मन बर
येहा मोर किसमत हे।
झंऊंहा रापा गैंती ले मोर
सुघ्घर अकन यारी हे।
हमर मन बर का होली
हरेली अउ का देवारी हे।
मोर लइका झन मजदूर बनय
बढिया मेंहा पढाहूं।
जानय सब मोरो लइका ल
मय बाबू साहब बनाहूं।
मजदूर के लइका तोषण
बासी चटनी खाथन।
सुबेरे ले सांझ तक
माटी के गुण ल गाथन।।
-आचार्य तोषण

"तोषण" नाम का मतलब

"तोषण" नाम का मतलब
(Toshan Name Rashi andMeaning)
Meaning of the name
Toshan (तोषण):‘Satisfied’
Origin: Hindu / Indian
तोषण की राशि / ToshanName Rashi:वृश्चिक(Scorpio)
शुभ रत्न / Lucky Gemstone:माणिक्यशुभ
रुद्राक्ष / Lucky Rudrakash:तीन मुखी रुद्राक्ष
नामांक / Name Numerology:7
वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। वृश्चिक राशि के जातकों के आराध्य देव गणेश जी होते हैं।

छत्तीसगढ़ के तिहार

 //////////////////// ॥छत्तीसगढ़ के तिहार॥ ////////////////////
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
झुमै नाचै सब नर नारी मया के होवै बउछार गा।
 हरेली मनाबो सावन मा नांगर चढाबो रोटी चीला।
हरिहर दिखै धनहा भुंइया झुमरय माई अउ पीला।।
 बरखा रानी झिमिर झिमिर पानी देवय फुहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
 बांधय राखी बहिनी हर अपन भाई के कलाई मा।
 भाई देवय बचन बहिनी ल जान देहूं तोर भलाई मा।।
भाई बहिनी के मया देखे उतारे नजर संसार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
आगे भादो जांता पोरा समारू नंदिया दउडाय।
दाई बहिनी के तीज तिहार गौरा शंखर ल मनाय।।
आनी बानी के रोटी पीठा रांधे करे फरहार गा।
 बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
 आगे नवरात कुंआर मा चल ना जोत जलाबो।
 दशेरा संग कातिक मा घर-घर दीया जलाबो।
खाबो नवा जुरमिल संगी पाबो मया दुलार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
पूस पुन्नी के बेरा सुघ्घर छेरछेराय घर-घर जाबो।
बइठाबो टुकना म मिट्ठू मिल गीत सुआ के गाबो।।
 घर कुरिया सबके खुले अन्नकुंवर के भंडार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
फागून मस्त महीना संगी उड़ावय रंग गुलाल जी।
लइका सियान जवान मितवा दिखय सबे लाले लाल जी।।
भर पिचकारी मारत हावय एक दुसर ला बउछार गा ।
 बड़ नीक लागे संगी मोला छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
 ///////////////////// ////जय छत्तीसगढ़//// ////////////////////
 रचना:-आचार्य तोषण गांव-धनगांव डौंडीलोहारा
 जिला-बालोद, छत्तीसगढ़ पिन-४९१७७१ मोब.९६१७५८९६६७

।।भगतसिंह।।

।।भगतसिंह।।
गढ़ीस रद्दा अजादी के नवा हिन्दुस्तान बर।
भारत मां के आन बर तिरंगा के शान बर।।
अमर होगे ए दुनिया म भारत मां के लाल।
बूता बनाइस अंगरेज के बनके उंखर काल।।
भगति करिस मां भारत के भगत नांव पाइस।
हिन्द के अजादी बर मौत ल गला लगाइस।।
।।वन्दे मातरम्।।
-आचार्य तोषण

याद तेरी आती है

याद तेरी आती है कुछ पल ही सही रो लेती हूँ
तू जो नहीं पास मेरे तेरी यादों के संग हो लेती हूँ।
सेज फूल का तो नहीं मेरी किस्मत में तोषण
तन्हाईयों के कांटों में बिस्तर समझ सो लेती हूँ।।
-आचार्य तोषण

इजाजत

मुझको न दी इजाजत जहां में आने की
मेरे लिए ही अश्क आखों से बहाए जा रहे हो।
मै ही न होती तो तुम भी न होते तोषण
अंधेरे में मुंह क्यों अपना छिपाए जा रहे हो।।
-आचार्य तोषण

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...