शनिवार, 25 जून 2016

।। गंगा मंइया ।।

।। गंगा मंइया ।।
भुंइया ले दाई तैहर उपजे
सुघ्घर पबरित हे तोर ठांव
छत्तीसगढ़ के मान ओ दाई
बालोद तीर झलमला गांव।
बइठे हस झलमला म दाई
गंगा मंइय्या तै कहाय ओ ।
चइत कुंवार के महिना दाई
तोर अंगना मेला भराय ओ।।
रिगबिग रिगबिग जोत बरय
जग उजियारा बगराय ओ।
नर नारी तोर तीर आके
मन के मनउती पाय ओ।।
कोनो लावय सरधा के फूल
नरिहर भेला कोनो लाय ओ।
अगर कपूर धूप बांती दीया
दाई तोर बर बिसाय ओ।।
आवय कोनो रेंगत अंगना
कोनो घोंनडत आय ओ।
कोनो दाई अपन छाती म
सरधा के जोत जलाय ओ।।
नवदिन नवरात ओ दाई
करथन नवधा भगति ओ।
जुरमिल राहंन ए जग मा
दे दे अइसन शकति ओ।।
मांगव मंइय्या हाथ जोड़
आस पुरो दे तोषण के।
मोर जिनगी अंधियार हे
दीया बार मन रोशन के।
।। गंगा मंइय्या की जय ।।
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रचना
आचार्य तोषण
गांव-धनगांव
डौंडीलोहारा बालोद(छ. ग.)

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