गुरुवार, 31 अगस्त 2017

अंताक्षरी

मन के करबे काम तै,होही पश्चाताप।
सोचव समझव जी बने,सबले पहिली आप।

दोहा दोहा सब कहय, दोहा लिखय न कोय।
दोहा बर दोहा लिखय,सब झन छंदी होय।।

घूमत घामत आज मँय ,जाहूँ बेटी गाँव।
गाँव बीच पिपरी जगे,बड़ दुरिहा ले छाँव।।

गुरतुर तोर जुबान हे , मनमोहागे मोर।
बही अपन बस ते करे, मन हा होगे तोर।

लाल-लाल के फूल हे,लाली पटा तुँहार।
लाली ककनी अउ चुरी,गजमोती सिंगार।।

करबो खेती जोर के,सबला लेके संग।
हरिहर होही भुंइया,लाही नवा तरंग।।

लाल लहू ला देख के, भारत माता रोय।
झगरा लड़ई छोड़ के,एक रहव सब कोय।।

ढेर करे हन आज हम,घर घर कचरा देख।
साफ करन घर बार ला,भारत स्वच्छ सरेख।।

आके डेहरी तोर मँय,पारत हँव गोहार।
बिनती हे गणराज जी,सुनले बोल हमार।।

काम करव बड़ नेक के,मिलही जग में मान।
चलही सबके नाँव जी,जइसे भगत महान।।

अपन अपन में सब मगन,भला करय अब कोन।
सच्चा मनखे हे विही,भला करय सिरतोन।।

नाम राम के सार हे,जपलव सब हरिनाम।
बिना भजन के भाग में,आवय कभू न राम।।

हार जीत के बात में,होवय रेलम पेल।
आनी बानी खेल हे,जुरमिल खेलव खेल।।

काम काज संवार ले,होवत बिहना बेर।
चल चल संगी खेत में,होवय झन गा देर।।

अंताक्षरी

मन के करबे काम तै,होही पश्चाताप।
सोचव समझव जी बने,सबले पहिली आप।

दोहा दोहा सब कहय, दोहा लिखय न कोय।
दोहा बर दोहा लिखय,सब झन छंदी होय।।

घूमत घामत आज मँय ,जाहूँ बेटी गाँव।
गाँव बीच पिपरी जगे,बड़ दुरिहा ले छाँव।।

गुरतुर तोर जुबान हे , मनमोहागे मोर।
बही अपन बस ते करे, मन हा होगे तोर।

लाल-लाल के फूल हे,लाली पटा तुँहार।
लाली ककनी अउ चुरी,गजमोती सिंगार।।

करबो खेती जोर के,सबला लेके संग।
हरिहर होही भुंइया,लाही नवा तरंग।।

लाल लहू ला देख के, भारत माता रोय।
झगरा लड़ई छोड़ के,एक रहव सब कोय।।

ढेर करे हन आज हम,घर घर कचरा देख।
साफ करन घर बार ला,भारत स्वच्छ सरेख।।

आके डेहरी तोर मँय,पारत हँव गोहार।
बिनती हे गणराज जी,सुनले बोल हमार।।

काम करव बड़ नेक के,मिलही जग में मान।
चलही सबके नाँव जी,जइसे भगत महान।।

अपन अपन में सब मगन,भला करय अब कोन।
सच्चा मनखे हे विही,भला करय सिरतोन।।

नाम राम के सार हे,जपलव सब हरिनाम।
बिना भजन के भाग में,आवय कभू न राम।।

हार जीत के बात में,होवय रेलम पेल।
आनी बानी खेल हे,जुरमिल खेलव खेल।।

काम काज संवार ले,होवत बिहना बेर।
चल चल संगी खेत में,होवय झन गा देर।।

रविवार, 27 अगस्त 2017

रिश्ते

*बुनने चला हूँ रिश्तों के धागों को तोषण,*

*सुलझने के बजाय रिश्ते उलझ ही जाते है।।।*

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मंगलवार, 22 अगस्त 2017

दही लूट

१.
दही लूट बर हे मचे,अड़बड़ धूम धड़ाम।
ग्वाल बाल सब संग में,आगू हे घनश्याम।।

२.
दही लूट के बात सुन,मुँह में पानी आय।
चलव-चलव हम आज सब,चलन दही चोराय।।

३.
चोरावय मखना दही,वासु देवकी लाल।
गोप ग्वाल के संग में,लीला करय कमाल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

आओ करें हम मिलके नमन...

आओ करें हम मिलके नमन,
   भारत माता की आराधना.
ले के तिरंगा साथ बढ़ेंगे,
   बलिदानों की उपासना.

राजगुरु सुखदेव भगत सिंह,
   कितनों वीर महान हुए.
हंसते हंसते हो गए न्योछावर,
   देश खातिर कुर्बान हुए.
भारत माँ की आन बचाने,
   कर्म साहसिक साधना..... ..

वीर शिवा आजाद राणा और,
   झांसी की लक्ष्मी बाई.
बापू गांधी चाचा नेहरु,
   भारत की महिमा गाई.
आजादी के रंग में सभी ने,
   रखे जन्म सिद्ध भावना.........

गुणियों मुनियों की संतो का तप,
   हमारी अनुपम थाती है.
बलिदानी वीरों की गाथा,
   रग अपने लहराती है.
दहाड़ लेंगे बनकर सिंघम,
   त्यागे राग आलापना.......

कृति
तोषन धनगंइहा

आओ करें हम मिलके नमन...

आओ करें हम मिलके नमन,
   भारत माता की आराधना.
ले के तिरंगा साथ बढ़ेंगे,
   बलिदानों की उपासना.

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राजगुरु सुखदेव भगत सिंह,
   कितनों वीर महान हुए.
हंसते हंसते हो गए न्योछावर,
   देश खातिर कुर्बान हुए.
भारत माँ की आन बचाने,
   कर्म साहसिक साधना..... ..

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वीर शिवा आजाद राणा और,
   झांसी की लक्ष्मी बाई.
बापू गांधी चाचा नेहरु,
   भारत की महिमा गाई.
आजादी के रंग में सभी ने,
   रखे जन्म सिद्ध भावना.........

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गुणियों मुनियों की संतो का तप,
   हमारी अनुपम थाती है.
बलिदानी वीरों की गाथा,
   रग अपने लहराती है.
दहाड़ लेंगे बनकर सिंघम,
   त्यागे राग आलापना.......

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कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
१९/८/१७
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शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...