मंगलवार, 9 जून 2020
तोर मया मोर जीव के
गुरुवार, 12 सितंबर 2019
दीदार करया हूँ
चोरी छिपे सही दीदार करता हूँ।
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।
देखे कभी नमी आँखें झलक से जो,
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।
तेरे हँसी लबों की चाहत मुझे है,
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।
माना मुझे नही आता मुस्कुराना,
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।
समझो नहीं कभी गूँगा बधिर हमको,
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
सोमवार, 2 अप्रैल 2018
मोर आँखी के पुतरी
*समीक्षा बर आप सब के बीच प्रस्तुत*
*"मोर आँखी के पुतरी"*
*मोर आँखी के पुतरी कस चमकत रहिबे,*
*बनके फूल मन बगिया म महकत रहिबे!*
*झिन सिरावय मया तोर मोर बर संगी,*
*चिरइ कस हिरदे अंगना म चहकत रहिबे!*
*सावन के महिना बरसा बरोबर गुंइया,*
*बन ठन मया के बरखा बरसत रहिबे!*
*छावय झन दुख के बदरा तोर होंठ म,*
*फूल जस मंउहा खुल खुल हँसत रहिबे!*
*सरदी गरमी रीतु बरसात रहय चाहे,*
*सदा सुहागिन फूल जस सँवरत रहिबे!*
*भुल नइ पाहू तोला कभू मँय तोषण ह,*
*बइठ मया के रस्ता मोला अगोरत रहिबे.*
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद ( छ. ग.)
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