*समीक्षा बर आप सब के बीच प्रस्तुत*
*"मोर आँखी के पुतरी"*
*मोर आँखी के पुतरी कस चमकत रहिबे,*
*बनके फूल मन बगिया म महकत रहिबे!*
*झिन सिरावय मया तोर मोर बर संगी,*
*चिरइ कस हिरदे अंगना म चहकत रहिबे!*
*सावन के महिना बरसा बरोबर गुंइया,*
*बन ठन मया के बरखा बरसत रहिबे!*
*छावय झन दुख के बदरा तोर होंठ म,*
*फूल जस मंउहा खुल खुल हँसत रहिबे!*
*सरदी गरमी रीतु बरसात रहय चाहे,*
*सदा सुहागिन फूल जस सँवरत रहिबे!*
*भुल नइ पाहू तोला कभू मँय तोषण ह,*
*बइठ मया के रस्ता मोला अगोरत रहिबे.*
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद ( छ. ग.)
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