बुधवार, 5 मई 2021
बेटी की बेटी हूँ
शनिवार, 13 मार्च 2021
लोग
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020
इंसान बनादे..(मुक्त गजल तोषण दिनकर)
गुरुवार, 23 अप्रैल 2020
बाकी है...
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
बड़े दिनों बाद
शुक्रवार, 12 जुलाई 2019
सीख
सीख
मीत बनाना सीख ले।
पेड़ लगाना सीख ले।
सुख दुःख के साथी ये,
रीत निभाना सीख ले।
झुक जाते सब के लिए,
माथ नवाना सीख ले।
देते सबको वन औषधि,
दवाई बनाना सीख ले।
काटने वाले निर्मम हो,
चेत लगाना सीख ले।
मिले जिनसे शुद्ध हवा,
गुल महकाना सीख ले।
हो सावन शाम सुहानी,
मेघा बुलाना सीख ले।
सारा आलम हरा भरा,
राह दिखाना सीख ले।
परिंदों के मत शत्रु बन,
घरोंदा बनाना सीख ले।
कहे सबसे तोषन प्यारे,
जग बचाना सीख ले।
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद
गुरुवार, 30 मई 2019
जवाब नंइहे
ये मोर संगवारी तोर जवाब नंइ हे।
रहिबो संग मिलके कोन्हों खाब नंइहे।
दिही मिसाल सब हमर मितानी के,
कखरो हमर जइसे रूआब नंइहे।
जिथन हमन एक दुसर ल देख के,
राखय कोन जेकर हिसाब नंइहे।
पढ़ही ज़माना अब दुनों के कहानी,
हमर मितानी कस किताब नंइहे।
रहिथन संग दुनों सुख अउ दुख म,
टोर दिही संग कोन्हों शबाब नंइहे।
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