ये मोर संगवारी तोर जवाब नंइ हे।
रहिबो संग मिलके कोन्हों खाब नंइहे।
दिही मिसाल सब हमर मितानी के,
कखरो हमर जइसे रूआब नंइहे।
जिथन हमन एक दुसर ल देख के,
राखय कोन जेकर हिसाब नंइहे।
पढ़ही ज़माना अब दुनों के कहानी,
हमर मितानी कस किताब नंइहे।
रहिथन संग दुनों सुख अउ दुख म,
टोर दिही संग कोन्हों शबाब नंइहे।
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