घूंट कड़वा इश्क़ का अब पीया नहीं जाता।
बिना तेरे दीदार के अब जीया नहीं जाता।
कटेंगे कैसे यूं पल पल हर दिन ऐ तोषण,
तन्हाई में बेचैन दिल अब सीया नहीं जाता।
शनिवार, 19 जनवरी 2019
घूंट कड़वा इश्क़ का
गुरुवार, 17 जनवरी 2019
गणतंत्र दिवस
एक प्रयास
मनहरणघनाक्षरी /कवित्त छंद में
आन बान शान देखो,देश का निशान देखो,
लहर लहर करे,नीले आसमान में।
इसकी निराली बात,सबसे है यह खास,
वीरों की थाती मानों,बसा निगेबान में।
लाल बाल पाल भिड़े, आजादी के गीत लिये,
बन गुल जो ये खिले,मेरे बागबान में।
हमने आजादी पायी,तन मन हरषायी,
हुआ गणतंत्र अब,देखो हिन्दूस्थान में।
माथ मैं नवाऊं आज,जिनपे है हमें नाज़,
जय जय करता है,सारा हिन्दूस्थान है।
क्रांतिकारी बनकर,सुख दुःख तजकर,
मेरे हिन्दूस्थान को ये, बनाया महान है।
भित पट तुम खोलो,भारत की जय बोलो,
झूमे नाचे गाए गीत,खेत खलिहान है।
'तोषण' ये आज कहे, मिलकर सब रहे,
एकता के दीप जले,मिले परवाज़ है।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
बुधवार, 9 जनवरी 2019
अनूठा
प्रदत्त शब्द-अनूठा, अनुपम,अनोखा,अजब
आधारित दोहा सादर अभिवादन के साथ संप्रेषित
1.
अनुपम तेरी है दशा , अनुपम तेरी रीत।
बिन तेरे दीदार से , कैसे होगी प्रीत।।
2.
प्रेम अनूठा जानिए , गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन चलें , जीवन हो मधुमास।।
3.
अजब - गजब है प्रेम ये, हर लेती है प्राण।
मन को करता वश में , नैनों की ये बाण।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मंगलवार, 8 जनवरी 2019
बिरह गीत
*बिरह गीत*
मोरले का अइसे गलती होगे भूला दिए मोर प्यार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।
सपना रिहिस तोला रानी बनाके मया के कुरिया बसातेंव।
जिनगी के मोर बगइचा मा मया के फूल खिलातेंव।
नंइ सके अब सकंव रे रानी तोर बिरहा के मार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।
घेरे रहिथे मोला दुख के बादर सुरता तोर रोवाथे।
बरसा बरोबर झरथे रे आंसू बइरी मोला सताथे।
कब तै आबे मोर तीर जोही जोहत रहिथंव तरिया पार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।
बइहा बनाके कहां भूलागेस किंजरंव नंदिया के छोर मा।
झूलत रहिथे तोरेच चेहरा मोर आंखी के कोर मा
तरसे 'तोषण' आजा 'खुशी' तैं पाए बर दीदार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।
रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
पिन ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७
विशिष्ट पोस्ट
शिवनाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
-
🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷 भिलाई दुर्ग छग हाइकु 🥀ईमली🥀 मन मचला संतान के संके...
-
तरु की छाँव खेलता बचपन अपना गाँव मिट्टी चंदन निखरित मस्तिष्क कोटि वंदन बहे सरिता है धरा पल्लवित मग पुनिता कुँजती पिक लगे मनभावन द...
-
दाई के कोरा हे धान के कटोरा तिहार पोरा... सोहय धान छत्तीसगढ़हीन बेटा किसान... कौशल राज ननिहाल राम के नाचव आज... नवा अंजोर जगमगात ग...