मंगलवार, 8 जनवरी 2019

बिरह गीत

*बिरह गीत*

मोरले का अइसे गलती होगे भूला दिए मोर प्यार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

सपना रिहिस तोला रानी बनाके मया के कुरिया बसातेंव।
जिनगी के मोर बगइचा मा मया के फूल खिलातेंव।
नंइ सके अब सकंव रे रानी तोर बिरहा के मार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

घेरे रहिथे मोला दुख के बादर सुरता तोर रोवाथे।
बरसा बरोबर झरथे रे आंसू बइरी मोला सताथे।
कब तै आबे मोर तीर जोही जोहत रहिथंव तरिया पार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

बइहा बनाके कहां भूलागेस किंजरंव नंदिया के छोर मा।
झूलत रहिथे तोरेच चेहरा मोर आंखी के कोर मा
तरसे 'तोषण' आजा 'खुशी' तैं पाए बर दीदार ला।
बिन बांती के दिया बरोबर करदेस मोर संसार ला।

रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
पिन ४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७

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