समीक्षार्थ
सरसी छंद
खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।
बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।
झूलत रहिथे तोरे चेहरा,आँखी आँखी तीर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे पीरित डोर।।3।।
मुच मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,मारे हिय हिलोर।।4।।
करले जोरा अब तै गोरी,लेके आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,कर लेबे सिंगार।।5।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा