कुण्डलियाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कुण्डलियाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 25 जुलाई 2021

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम।
राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम।
बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा।
करथे बेड़ा पार,बने जी सबके हितवा।
कह तोषण कर जोड़,राम में मन मोर रमय।
मया मोह ले दूर,सबो मिलके राम जपय।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

लेखनी


कुण्डलियाँ
लिखती जाए लेखनी,बदले है इतिहास।
योगदान भी आपकी,महके बन मधुमास।
महके बन मधुमास,पवन देखो लहराये।
जले नवीन मशाल,गीत जोशीला गाये।
करते नाज समाज,गगन में तारा दिखती।
देता नव संदेश,कलम जो निशदिन लिखती।।
रचना-
तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 17 मई 2020

भाईचारा

भाईचारा छोड़कर , 
रखे कपट का रोग।
एक दुजे के आँकने , 
पैर खीचते लोग।
पैर खीचते लोग , 
बोलते मीठा सामने।
मर्यादा का पाठ , 
दिया था भगवन राम ने ।
कह दिनकर कविराज , 
आज ये सब कुछ हारा।
पीछे भरते कान , 
छोड़कर भाईचारा।

तोषण दिनकर
डौंडी लोहारा

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

किताब

विश्व किताब दिवस म नानकुन कुण्डलियाँ
बाँटे सगरो बात सुन,जेकर निही हिसाब।
हवय ज्ञान के कोठरी,कहिथे सखा किताब।
कहिथे सखा किताब,सुनव गा संगी भइया।
बने गोठ सब राख,गलत ला देवव तिरिया।
कह तोषण कविराज,गजब के बतिया छाँटे।
बानी रोठ किताब ,ज्ञान के सागर बाँटे।

-तोषण दिनकर

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

कुण्डलियाँ दिनकर की


1.
गुंगे बहरे हो चले,माने कभी न बात।
अपनी धुन में हाँकते,दिन हो चाहे रात।
दिन हो चाहे रात,रहो करते मनमानी।
मिलकर अपना देश,बात ये सबने ठानी।
लगी चाल पर रोक,लगे है लाखों पहरे।
गाँव ठाँव में लोग,फिरे है गुंगे बहरे।

2.
रहती जिसमें है अकड़,सुखे वृक्ष वो जान।
निन्दा उसके भाग में,पाये कभी न मान।
पाये कभी न मान,लाख जो ठोकर खाते।
खोते अपने लोग,छुटे हैं सारे नाते।
कह दिनकर कविराज,मीठ जो मधुरस बहती।
बोल बड़े अनमोल, हिया के भीतर रहती।

-तोषण दिनकर

मंगलवार, 17 मार्च 2020

कोरोना का डर

 कुण्डलियाँ छंद..

कोरोना का डर...

कोरोना का डर यहाँ,
            फैला चारों ओर।
कैसा है यह वायरस,
            नहीं दवा का शोर।।
नहीं दवा का शोर,
            करें नव उपचार सभी।
चिन्ता का यह फेर,
            कटे जल्दी रोग अभी।
कह तोषण कर जोड़,
            हाथ को प्रतिदिन धोना।
करना सभी विरोध,
            डरे भागे कोरोना।


चौपाल गली चौक को,
            बंद करे सरकार।
पता दवा की है नहीं, 
            जनता है लाचार।।
जनता है लाचार,
            सोचते बैठे सारे।
कोई तो उपचार,
            ढूँढ लो मोदी प्यारे।
कह तोषण कर जोड़,
            भीड़ जाओ महाबली।
दें कोरोना फेंक ,
             झुमें हर चौपाल गली।

कवि तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
सरपंच, ग्राम पंचायत धनगांव डौं.लोहारा

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...