भाईचारा छोड़कर ,
रखे कपट का रोग।
एक दुजे के आँकने ,
पैर खीचते लोग।
पैर खीचते लोग ,
बोलते मीठा सामने।
मर्यादा का पाठ ,
दिया था भगवन राम ने ।
कह दिनकर कविराज ,
आज ये सब कुछ हारा।
पीछे भरते कान ,
छोड़कर भाईचारा।
तोषण दिनकर
डौंडी लोहारा
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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