दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 21 नवंबर 2020

कोरोना की हार(तोषण चुरेन्द्र दिनकर)

*प्रतियोगिता का विषय*
*त्योहार पर कोरोना की हार*

कोरोना संक्रमण के बचाव तथा जनजागरूकता हेतु स्लोगन
---------------------------------------------
1.
दो गज की दूरी सदा,पल-पल धोएँ हाथ।
मास्क हमेशा हो लगा,कभी न घूमें साथ।।

2.
सेनेटाईजर रखें,हरदम अपने पास।
भीड़ भाड़ से सब बचें,बातें मानों खास।।

3.
सर्दी खाँसी हो अगर,करें त्वरित उपचार।
अस्पताल में जाँच से,मिटते रोग हजार।।

4.
आओ इस त्योहार में,दे कोरोना मार।
मानवता की जीत हो,कोरोना की हार।।

5.
जागरूक हम सब बनें,करें देश हित काज।
कोरोना जड़ से मिटे,करें कर्म ये आज।।

6.
जायें जब बाजार हम,या फिर चलें दुकान।
बिन मास्क लेना नहीं,कोई भी सामान।।

7.
बाल युवा बूढ़े-बड़े , रखना सब ये ध्यान ।
मास्क का उपयोग हो,तभी बचेगी जान ।।

8.
कोरोना के काल में , मिलकर ठानें आज ।
जीतेगा अपना वतन , सबको होगा नाज ।।

9.
दीवाली त्यौहार में , दमके मोती शीप ।
कोरोना तम दूर हो , घर-घर चमके दीप ।।

10.

मिलकर कर लें फैसला,कोरोना हो दूर।
सर से लेकर पॉव तक , होवे चकनाचूर।।

11.
स्वच्छ रहे संसार में,खुशियाँ मिले हजार।
खुशियों की दीपावली,कोरोना की हार।।


नाम - भैय्या डुमेश कुमार चुरेन्द्र
पिता - श्री तोषण कुमार चुरेन्द्र
कक्षा - आठवीं
विद्यालय - सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा
जिला - बालोद (छ.ग.)491771
मोबाइल - 9617589667

सोमवार, 22 जून 2020

दिनकर के दोहे

★दोहा पंच★

राख राख तैं राख ले,
                बने जतन के राख।
राखत राखत एक दिन,
                जिनगी होही राख।।

आवत बदरा देखि के,
                झूमय नाचय मोर।
सरसर सरसर हे पवन,
                मारय हिया हिलोर।।

जइसे बदरा आत हे,
                भुँइया करय बिचार।
नाँगर जूँड़ा बाँधले,
                बइला धर तइयार।।

टरर टरर मंडुक करे,
                झिंगुर मारय चीख।
धनहा भुँइया देख ले,
                निकले बढ़िहा पीख।।

छानी परवा हे चुहत ,
                जोरा करलौ थोर।
बोनी होगे हे शुरू,
                नाँगर बइला जोर।।

भुँइया के भगवान मैं,
               दिनकर हावय संग।
खेती मोरो पहिचान हे,
               भगवा हावय रंग।।

आज मोर मन हे मघन,
               उमड़त हवय बिचार।
देखव पढ़लव मिल सबो,
               लेवव छाँट निमार।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

पानी का मोल

दिनाँक :- १३/०४/२०
दिन :- सोमवार
विधा :- दोहा 
विषय :- पानी का मोल 
एक प्रयास संस्कृत शब्द वनम के प्रयोग के साथ ....

मरु में जाकर देख ले, 
                वनम वनम अंकाल।
प्यासी धरती ताकती,
                जीवन है बेहाल।।१।।

पंछी तरसे है वनम,
                नहीं ताल का शोर।
सूखती रोती है नदी,
                देखे मेघा मोर।।२।।

पेड़ बिना संसार में,
                नहीं वनम की चाल।
पेड़ से है जिन्दगी, 
                जीवन है खुशहाल।।३।।

पानी के उपयोग का, 
                रखें सभी ये ध्यान।
जनम वनम अनमोल है,
                कहते संत सुजान।।४।।


बिना वनम जग जीव सब,
                कहते एक ही बोल।
'दिनकर' रक्षा अब करो , 
                पानी है अनमोल।।५।।


-तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

सोमवार, 16 सितंबर 2019

हिन्दी

*विधा:/दोहा संग चौपाई*

*विषय :- हिन्दी*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

हाथ जोड़ विनती करूँ,हिन्दी में हो बात।
नही कभी भी छोड़ना,दिन हो चाहे रात।।
★★★★★★★★★★
हिन्दी हम सबकी हो भाषा।
मान बढ़ेगा है अभिलाषा।
★★★★★★★★★★
भारत का नित गौरव जानें।
हिन्दी भाषा अपना मानें।
★★★★★★★★★★
हिन्दी से ही जीवन अपना।
आदत में हो लिखना पढ़ना।
★★★★★★★★★★
हम सब बनकर भाषी हिन्दी।
माथ लगाये जननी  बिन्दी।
★★★★★★★★★★
आओ इसकी प्राण बचायें।
हिन्दी खातिर उदिम चलायें।
★★★★★★★★★★
हिन्दी सबकी शान है,रखे हृदय में ध्यान।
भाष विदेशी छोड़ दें,बढ़े हिन्द का मान।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

शिक्षक

सबके अपने है यहाँ,
मुखरित नये विचार।
प्रकटाती सद्भावना,
यही कलम की धार।।

शिक्षक गुण की खान है,
भरते निशदिन ज्ञान।
कृपा मिले इनकी सदा,
माँगू यह वरदान।।

करे डाँट फटकार जब,
पालें ना मन में द्वेष।
करें सदा सम्मान तो,
मिलते कृपा विशेष।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रघुवर राम की

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

कृष्ण वंदना

माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।

हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।

तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 4 सितंबर 2019

राम

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी

अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।

विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।

व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।

आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।

ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।

प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।

लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।

वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।

चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।

झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

ईश वंदना

दोहा-
बनकर साधु मैं खड़ा,दर पे तेरे आज।
हाथ जोड़ कर कामना,रख लो मेरी लाज।।

चौपाई:-
तेरे चरण मैं माथ नँवाऊँ।
होत भोर तेरे गुन गाऊँ।
कृपा तेरी मिले प्रभू मोहे।
करतल बान धनुष अति सोहे।
आए शरण नीज दीन दुखारी।
रहिहव सदा तुम मीत हमारी।
बार-बार बर माँगँव तोसे।
पाप कभी नहीं होय मोसे।
सबके घर भंडार भरौ तुम।
गलत राह में न हो कोई गुम।
सबके रहना सदा सहाई।
दाता करता यही दुहाई।

दोहा:-
रहे सदा सद्भावना,माँगू यह वरदान।
सेवक बनकर सब रहे,मिले मान सम्मान।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

बुधवार, 7 अगस्त 2019

रामायण सार

सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।

राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।

बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।

कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।

बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।

राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।

पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।

खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।

रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।

मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।

साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।

वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।

पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।

सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।

तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।

तोषन धनगंइहा

बुधवार, 31 जुलाई 2019

धनगाँव पुरान

धरती दाई तोर मैं,
माथ नवावँव आज।
तोर दया परताप ले,
बाँचय मोरो लाज।।१।।

मोर गाँव धनगाँव के,
कतका करिहँव गोठ।
अगुवा भंडारी हवय,
गुरतुर बोली पोठ।।२।।

बीच गली हनुमान के,
अड़बड़ शोभा पाय।
कतको संकट हे रहय,
चुटकी मा सिरजाय।।३।।

शीतल रुप हे शीतला,
शीतलता पहुँचाय।
पाके छँइहा मातु के,
सब झन हे हरसाय।।४।।

बिकटराव बाबा हमर,
देवता बड़का जान।
नर नारी सब देत हे,
दुनिया भरके मान।।५।।

शिव शंकर के ठाँव हे,
गाँव नहर के तीर।
करके पूजा पाठ सब,
अपन मिटावय पीर।।६।।

देवता हावय साँहड़ा,
गजब बढ़ावय मान।
जेकर किरपा ले सुनव,
गोधन बढ़थे जान।।७।।

करथे रक्षा गाँव के,
देवता कथे सियार।
कोनो अलहन नइ रहय,
सुख पुरवक संसार।।८।।

आ जाबे बुधवार के,
रहिथे गाँव बजार।
किसम किसम के तै बिसा,
हरिहर हे तरकार।।९।।

पहिली ले हे आठवीं,
हावय जी इसकूल।
जाके सब लइका पढ़े,
करय नहीं जी भूल।।१०।।

मातर मड़ई मा घलो,
रहिथे जी बड़ धूम।
खाके बीड़ा पान तै,
जोर लगा के घूम।।११।।

रहिथन संगी साथ मा,
सबके आथन काम।
सुम्मत ले गाड़ी चले,
बगरे जग मे नाम।।१२।।

तोषन कहिथे हे सखा,
राखव मीठ जबान।
होही हमरो गाँव हा,
जग में कभू महान।।१३।।

तोषन धनगंइहा

सावन

समीक्षार्थ

सावन है मन मोहना,
        बरसे मेघ फुहार।
वन में नाचे मोरनी,
        देखो पंख पसार।।

शिव शंकर के धाम को,
         चलते भक्त हजार।
हँसते गाते झूमते,
         करते जय जय कार।।

हरा भरा खलिहान अब,
         दिखते चारो ओर।
झूमते गाते पेड़ हैं,
         नदिया करते शोर।

आते बादल देख के,
          होते मगन किसान।
धरती बदले काँचली,
          हरित दिखे है धान।।

तोषन धनगंइहा

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

दोहालरी

नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र

साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा

मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७

ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com

पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१

मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा

सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥

करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥

मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥

कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥

महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥

बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥

मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥

परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥

तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥

झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥

इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥

प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥

अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥

अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥

जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥

रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥

फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥

बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥

सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥

दोहालरी

नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र

साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा

मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७

ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com

पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१

मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा

सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥

करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥

मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥

कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥

महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥

बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥

मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥

परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥

तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥

झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥

इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥

प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥

अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥

अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥

जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥

रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥

फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥

बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥

सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥

बुधवार, 9 जनवरी 2019

अनूठा

प्रदत्त शब्द-अनूठा, अनुपम,अनोखा,अजब
आधारित दोहा सादर अभिवादन के साथ संप्रेषित

1.
अनुपम  तेरी  है  दशा , अनुपम  तेरी  रीत।
बिन  तेरे  दीदार  से , कैसे होगी  प्रीत।।

2.
प्रेम  अनूठा  जानिए , गढ़ता  जो  इतिहास।
मीरा  तुलसी  बन चलें , जीवन  हो  मधुमास।।

3.
अजब  - गजब  है  प्रेम  ये, हर  लेती  है  प्राण।
मन  को  करता  वश में  , नैनों  की  ये  बाण।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 30 दिसंबर 2018

व्यंगात्मक दोहे तोषण के

*कपट कुटिल की चाल है,पिटता बिरथा ज्ञान।*
*बढ़ता देखे और को,खींचे अलग कमान।।*

*आया देखा साब को,बजा ताल से ताल।*
*तोषण बदले राह अब,देख गैर की चाल।*

*देखा हमने आज भी,व्यापित अवसर वाद।*
*खुद ही करने लग गये,लेकर माइक नाद।।*

सोमवार, 19 नवंबर 2018

मतदान

शुभ बिहान

संगी मत वाला हरव,करलव मत के दान।
सोच समझ नेता चुनव,लाही नवा बिहान।।

कीमत समझव वोट के,बनथे जी सरकार।
जावव दव मतदान सब,होवय झिन बेकार।।

नेता मन के छाँट लव,देवव सबझन वोट।
हक के खातिर मिल चलव,झन लेवव गा नोट।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

तुलसी बिहाव

*तुलसी बिहाव के ऊपर दोहा तोषण के*

जनम धरे शिव तेज ले,हवय जलन्धर नाँव।
थर-थर काँपय देवता,भागय डरके गाँव।।

बड़भगमानी हे सती,बिन्दा जेकर नाँव।
बरन करय जलन्धर के,सुघ्घर परके पाँव।।

बढ़थे अत्याचार जब,देव करय गोहार।
महादेव भोले करव,दानव के खोहार।।

लड़त लड़त जलन्धर ले,शंखर मानय हार।
जाके हरि के तीर मा,माँगत हे उपचार।।

मानय बतिया देव के,हरि होगे तइयार।
बिन्दा के सत भंग बर,चलिस हवय जी द्वार।।

होवय बिन्दा अपबरित,मरय जलन्धर आज।
सतबल ले हे जानलिस,रमारमन के राज।।

होवय शापित जब बिसनु, बनगे सालीग्राम।
होगे बिन्दा अब अमर,धरके तुलसी नाम।।

रचना तोषण के हरे,अमर कथा के सार।
भूलचूक ला दव छमा,करदव मोला पार।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

रविवार, 30 सितंबर 2018

वेश


अलग-अलग पहचान है,अलग- अलग है वेष।
भारत की ये शान है,.......कहीं नहीं है क्लेष।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...