सबके अपने है यहाँ,
मुखरित नये विचार।
प्रकटाती सद्भावना,
यही कलम की धार।।
शिक्षक गुण की खान है,
भरते निशदिन ज्ञान।
कृपा मिले इनकी सदा,
माँगू यह वरदान।।
करे डाँट फटकार जब,
पालें ना मन में द्वेष।
करें सदा सम्मान तो,
मिलते कृपा विशेष।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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