पाप पुण्य का लेखा।
कर्ता है कौन देखा?
आज मेरी कल तेरी,
सबकी बारी आनी।
जनम मरण शाश्वत सत्य,
रखिए याद जुबानी।
मेरा यहाँ न तेरा यहाँ
कोई नही बसेरा,
आते जाते रहते लोग
जग हुआ सरायखाना।
रोते आए रूलाके जाना
ये कहाँ की रीत?
आपस हो बस भाई चारा
बसी रहे बस प्रीत की गीत।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
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