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🌹काँटो बीच रहता है,
🌹🌹सारे दुख सहता है।
🌹🌹🌹खुश रखे साथियों को,
🌹🌹🌹🌹सदा मुसकात है।
🌹फूल तू गुलाब का है,
🌹🌹बनके माहताब सा है।
🌹🌹🌹रब की ये नेमत है,
🌹🌹🌹🌹खुदा की सौगात है।
🌹प्रेमी जोड़े जानते हैं,
🌹🌹प्रेम प्रति मानते हैं।
🌹🌹🌹एक दूसरे को सौपे,
🌹🌹🌹🌹होती मुलाकात है।
🌹शोभा इसकी न्यारी है,
🌹🌹लगती बड़ी प्यारी है।
🌹🌹🌹तोषण जुबाँ से बोले,
🌹🌹🌹🌹वाह जी क्या बात है।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
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