मेरी तन्हाईयों में तेरी याद आती क्यों है.
मेरे जख़्में दिल को तड़पाती क्यों है.
बहते रहते हैं मेरी आँख से आँसू हमेशा,
नसीब मेरा तुझे मुझसे छुपाती क्यों है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मेरी तन्हाईयों में तेरी याद आती क्यों है.
मेरे जख़्में दिल को तड़पाती क्यों है.
बहते रहते हैं मेरी आँख से आँसू हमेशा,
नसीब मेरा तुझे मुझसे छुपाती क्यों है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
पलता पल-पल प्रेम से,पुण्य प्रकृति परकाज!
पुलके पुंज प्रताप के,पावन हो परवाज!!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
जानस काबर तँय नही, मोर हिरदे के बात !
सुरता आथस रे बही,तँयहर सारी रात !!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
व्याकुल धरा
मेघ के नयन से
बरसे नीर
करूणा मयी
माता जगजननी
लगती प्यारी
चले कृपाण
वसुंधरा हैरान
रोती नदियाँ
भूमि तनुजा
भूमिका श्रीराम की
लंका ढहायी
सोम बरसे
राम के दरबार
जीवन धन्य
उलूक जागे
बीहड़ रजनी में
दुनिया सोता
तोषण कुमार चुरेन्द्र
दोहे तोषण के...
अनुभव तो होगा कभी,वो ममता वो प्यार.
जिनसे जीवन में मिला,स्नेह प्रेम संसार.!!१!!
जीवन ये अनमोल है,यूँ कुड़े मे न रोल.
पाप पुण्य के खेल में,बिरथा बाजा ढोल.!!२!!
मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार.
होता साथी जो यहाँ,सबको करता पार.!!३!!
रोटी कपड़ा औ मकाँ,देता सबका साथ.
मंजिल होगा पास में,लो हाथों में हाथ.!!४!!
मौसम गरमी का यहाँ,तपती जलती धूप.
ठंडा पानी सब पियो,पल पल निखरे रूप.!!५!!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
तुझसे ही मेरी सुबह है तुझसे ही मेरी शाम है
तुम ही हो जिन्दगी में मेरी लब पे तेरा नाम है.
छोड़ न जाना मुझे कभी मझधार में ए खुशी,
तुझसे ही करता रहूँ प्यार मैं यही मेरा काम है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
करनी कथनी एक हो,बांट न बिरथा ज्ञान।
करता है उपकार जो, जग में वही महान।।
प्यासे को पानी मिले,भोजन करे समान।
सबका जीवन हो सुखी, जानो संत सुजान।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
दिया तुमने जनम मुझे ये तेरा एहसान है.
माँ तेरे कदमों में ही मेरा सारा जहान है.
कर्म धर्म मेरा कितना भी अच्छा हो माँ
पूरी कायनात में माँ एक तू ही महान है
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
फूलों की खुशबूओं सी महकता रहे जीवन
पक्षियों की कलरव सी चहकता रहे जीवन
सदा रहे कायनात तेरी खुशियों से भरी हुई
दीपक की ज्योति सी दमकता रहे जीवन
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
सरस्वती माँ की चरणों में सदा बहती ज्ञान की धारा
आओ मिल सब डुबकी लगायें यह सौभाग्य हमारा
जब तक जीवन सीखते जायें इसका नहीं किनारा
बालकपन से वृद्धावस्था होता नहीं है गँवारा
ज्ञान की ज्योति होती जहाँ पर होता नहीं अँधियारा.....
हम अबोध अज्ञानी जग के हमको है कुछ आता नहीं
तेरी जैसी इस जहान में और दूजा कोई माता नहीं
शरण पड़े है मिलकर दर पे दे दो हमको सहारा......
पाकर कृपा तेरी माता हम तो धन्य हो जायेंगे
दिये ज्ञान जो तुमने दाती जग में उन्हें लुटायेंगे
ज्ञानवान विद्वान सभी हो भारत समृद्ध सारा......
तोषण कुमार चुरेन्द्र
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दो हजार उन्नीस तक, डीलेड करें पास!
लिख पढ़ लेना भाइयों,जीवन होगा खास!!
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
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राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...