व्याकुल धरा
मेघ के नयन से
बरसे नीर
करूणा मयी
माता जगजननी
लगती प्यारी
चले कृपाण
वसुंधरा हैरान
रोती नदियाँ
भूमि तनुजा
भूमिका श्रीराम की
लंका ढहायी
सोम बरसे
राम के दरबार
जीवन धन्य
उलूक जागे
बीहड़ रजनी में
दुनिया सोता
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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