*बहना का प्यार*
बहन को तीज लिवाने के लिए किसन घर से मोटर सायकल लेके निकला।मन ही मन मुस्कुराते हुए जा ही रहा था कि अचानक.....पीछे से एक मोटर सायकल वाले ने तेज रफ्तार से आते हुए किसन को ठोकर मार दी।
इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।
सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।
संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"
"जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।
"इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"