गुरुवार, 7 जुलाई 2016

दारू

नानकून प्रयास
समारू आरूग मंदहा।समारू के बिहाव होय चार पांच साल बितगे राहय। एको झन दीया जलइय्या नी राहय। बिचारा ह अपन दुनो झन मंदिर मंदिर जेती नी तेती लइका पाए बर चक्कर कांटत राहय। बइगा गुनिया झारा फूंका आनी बानी के उदीम करत रिहीस। गोसइनिन थोरकून पढे लिखे रिहीस त कथे-"हस्पीटल मा जातेन का चेक करातेन ।सब समस्या के हल हो जतीस।" समारू मानबे नइ करे। तभोले ओखर गोसइनिन ह एक दिन हस्पीटल लेग जथे। त चेकिंग मा पता चलथे कि समारू के ददा बने के कोई चारा नइहे। समारू सन्न खागे। कारन पुछिस त डाक्टर बतइस एखर मूल कारन तोर दारू पियइ हरे। तब ओला समझ मा आइस ।अउ उही दिन ले कसम खइस आज के बाद अब कभू दारू नइ पियो। अउ सबझन ला घलक चेताहूं। कि दारू कभू झन पीना।
॥नशा नाश के जड॥
आचार्य तोषण
धनगांव, डौंडीलोहारा

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