॥श्री गरूवे नम:॥
नकल करे बर अकल लगाएल परही।
गलती करबे त घलो सुधराएल परही।
बिन गुरू के गलती नइ सुधरै संगी,
सुधरे अऊ सुधारे बर गुरू बनाएल परही।
छत्तीसगढ़ के माटी जइसने बनाबे तइसने बनहूं।
मैं ओ पानी अंव जे रंग ला डारबे ओइसने रंगहूं।।
काम कर कुछ ऐसा तब नाम हो पाएगा।
इसके बिना पगले दिल क्या जीत पाएगा।
पल पल रंग बदलना गिरगिट का काम है
हम तो इंसान है इंसान बन कर रहे तो अच्छा है।
का कांहंव कछु कहे नही जाए।
बोली अंतस मा रहे नही जाए।
मोर तो मन अभी रिहिस नही
वाह वाह कहे बिन रहे नही जाए।।
तिरछी नजरों से यूं न देखिये
डर... हमें लगता बहुत है।
आपको देखकर हमारी नजरें
कहीं कोई खता तो न कर बैठा।
-आचार्य तोषण
डर... हमें लगता बहुत है।
आपको देखकर हमारी नजरें
कहीं कोई खता तो न कर बैठा।
-आचार्य तोषण
-आचार्य तोषण

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