॥नरसिंह अवतार कथा॥
जय बिजय है दोऊ भाई
हरि के है पहरेदार।
प्रभु दरश को आए जब
चार झन रिषी कुमार।।
रोक कहा जाना मना
हरि आराम फरमाए।
कहे रिषी कुमार तब
हमें कोऊ रोक न पाए।।
हरि आराम फरमाए।
कहे रिषी कुमार तब
हमें कोऊ रोक न पाए।।
तुम जो हमको रोके हो
तुरंत दानव हो जाओगे।
जनम तीन के बाद में
हरि से मुक्ति पाओगे।।
पहली जनम धरे दोऊ भाई
हिरण्यकश्यपु हिरण्याक्ष।
देवता पर अत्याचार करे
करे रिषीन पर कटाक्ष।।
हिरण्याक्ष ने जब धरा को
समुंद्र के अंदर डुबाया ।
तब हरि वराह रूप में
समूचा जगत बचाया।।
हिरण्यकश्यपु के घर सुंदर
भक्त प्रहलाद ने जन्म लिया।
भक्त नारद के मान बात
नारायण की भक्ति किया।
करे अत्याचार हिरण्यकश्यपु
प्रहलाद समुद्र में फेंक दिया।
भक्त का मान बचाने हेतु
हरि ने उनको गोद लिया।।
नाना भांति अत्याचार करे
भक्ति में लीन भक्त रहे।
ईश्वर इच्छा मान भक्त
नारायण नारायण जाप कहे।।
थी होलिका जिसकी बुआ
प्रहलाद ले आग में बैठ गई।
बाल न बांका हुआ भक्त का
होलिका जलकर ऐंठ गई।।
घड़ा भरा पापात्याचार का
नरसिंह ने अवतार लिया।
गोद उठा कर तब हरि ने
हिरण्यकश्यपु संहार किया।।
पुष्प वर्षा हुई स्वर्ग से
देवता करे जय जयकार।
पहला जनम सफल किया
दो रहा अभी उधार।।
॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:॥
-आचार्य तोषण

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