गुरुवार, 6 मई 2021
कोरोना रोकथाम स्लोगन
सोमवार, 5 अप्रैल 2021
कोरोना से जंग
बेरंग ही सही
रविवार, 24 जनवरी 2021
नेता जी
रविवार, 3 जनवरी 2021
छत्तीसगढ़िहा युवा
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....
*शरद की अमृत धार*
चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।
शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।
शरद की सर्द रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।
मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।
सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।
©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20
बुधवार, 15 अप्रैल 2020
दिनकर
शनिवार, 30 नवंबर 2019
आसुरी प्रवृत्ति
रविवार, 20 अक्टूबर 2019
मिट्टी का दीपक
मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।
रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७
गुरुवार, 12 सितंबर 2019
शिक्षक
शिक्षक
लक्ष्य का हमको ज्ञान कराते।
बिना इनके दीक्षा कहाँ पाते।
करने जग को रौशन यह जो,
बन दीपक स्वयं जल जाते।
महिमा जिनकी बर्नी न जाये।
वेद पुरान भी पार नहीं पाये।
सत्य असत्य का फर्क बताने,
सदा सज्जन के पथ अपनाये।
शिक्षक मेरे हैं राह दिखाते।
मानवता का है पाठ पढ़ाते।
जो भी इनका नित करता मान,
सदा जीवन में आशीष पाते।
गर्व जिनके मन नहीं होते।
सतत् कर्म में जुटे हैं होते।
खुद की चिंता नही है होती,
सत कर्म जीवन भर होते।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
पाप पुण्य का लेखा
पाप पुण्य का लेखा।
कर्ता है कौन देखा?
आज मेरी कल तेरी,
सबकी बारी आनी।
जनम मरण शाश्वत सत्य,
रखिए याद जुबानी।
मेरा यहाँ न तेरा यहाँ
कोई नही बसेरा,
आते जाते रहते लोग
जग हुआ सरायखाना।
रोते आए रूलाके जाना
ये कहाँ की रीत?
आपस हो बस भाई चारा
बसी रहे बस प्रीत की गीत।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
कृष्ण कन्हाई
दही चुराने माखन खाने
जन्म लिये हैं कृष्ण कन्हाई।
नटवर नागर सुख के सागर
जन्म दिवस पर लाख बधाई।
पापी को मारे संत उबारे
समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।
मातु यशोदा नंद बाबा
हलधर तेरे बड़के भाई।
मित्र सुदामा के झोली भरे तुम
खुशियाँ सारी मंगल आये।
घर घर दीप जलाए गोपी
सभी जन मिलके सोहर गाये।
दीन दुखियन के त्रास हरे
प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।
आजा नटवर लाज बचाने
कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
मंगलवार, 10 सितंबर 2019
हवाई जहाज
छोटी सी बालमन की कविता
हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।
सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।
धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन,
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।
मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।
होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
शुक्रवार, 6 सितंबर 2019
गणपति वंदना
नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।
मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।
नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।
कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
शनिवार, 24 अगस्त 2019
कृष्ण जन्मोत्सव
दही चुराने माखन खाने जनम लिये है कृष्ण कन्हाई।
नटवर नागर सुख के सागर जन्म दिवस पर लाख बधाई।
पापी को मारे संत उबारे समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।
मातु यशोदा नंद बाबा हलधर तेरे बड़के भाई।
मित्र सुदामा के झोली भरे तुम खुशियाँ सारी मंगल आये।
घर घर दीप जलाए गोपी सभी जन मिलके सोहर गाये।
दीन दुखियन के त्रास हरे प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।
आजा नटवर लाज बचाने कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
गुरुवार, 8 अगस्त 2019
दीदी आई जी दीदी आई
शिशु गीत
दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।
श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।
कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।
गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।
कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।
हर हर महादेव
॥हर हर महादेव॥
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(१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
(२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले निकले गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
(३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
(४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
(५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
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शुक्रवार, 28 जून 2019
बदरा रानी
बदरा रानी बदरा रानी
लेते आना भर भर पानी
बड़ी राह निहारत बैठे
झूम के नाचे मयुरा रानी
ऋतु सावन तुझे प्यारी
लगे धरती न्यारी न्यारी
सौंधी खुशबू मिट्टी की
है महके क्यारी क्यारी
अब ना तुम लगाओ देर
राह निहारत आंखें टेर
बरस अब कारे बदरा
समय बीते हो गयी ढेर
छाएगी मगन हरियाली
बात बोले कोयल काली
हो जगत सारा खुशहाल
जैसे सारी दुनिया पाली
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
29_06_19
बुधवार, 29 मई 2019
वाटसप थोथनापोथी
वाटसप अउ थोथनापोथी
रहिथे धियान तोर कोती
चिंता रहे सब मितान के
का भेजे हवय बिहान के
कोनो गुडमार्निग कहिथे
कतको झन सुते रहिथे
फोटू दिखथे आनी बानी
कते दादा कतको नानी
सही बात के शोर नंइहे
सबके दुख ल कोन कंइहे
का होवय अब संसार में
तोर मोर घर दुवार में
आवन सुख दुख ल बांटन
जंगल झारी लहुआ लाटन
सुमरन कलरव रामके
होवत बिहना सांझ के
//जय श्री राम जय श्री राधे//
तोषण कुमार चुरेन्द्र
विशिष्ट पोस्ट
शिवनाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷 भिलाई दुर्ग छग हाइकु 🥀ईमली🥀 मन मचला संतान के संके...
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तरु की छाँव खेलता बचपन अपना गाँव मिट्टी चंदन निखरित मस्तिष्क कोटि वंदन बहे सरिता है धरा पल्लवित मग पुनिता कुँजती पिक लगे मनभावन द...
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