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गुरुवार, 6 मई 2021

कोरोना रोकथाम स्लोगन

कोरोना स्लोगन दीवाल लिखने के लिए
संगी सबो  मास्क लगावव ।
कोरोना ला दूरिहा भगावव।

साबुन ले तुम धोवव हाथ।
सेनेटाइजर ल राखव साथ।

घर ले निकलव बाहिर झन।
बने राखव जी तन अउ मन।

गरम पानी के पान करव।
गाँठ बांध के बात धरव।

दू गज दूरी सब अपनावव।
कोरोना ला दुरिहा भगावव।

बहकावा झन तुम आवव।
कोविड वैक्सीन लगावव।

मन में राखव एके बात।
दुरी बनाके हो मुलाकात।

रोग राई के करव ईलाज।
अस्पताल मा तुरते आज।

🖋️तोषण चुरेन्द्र धनगांव
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

कोरोना से जंग

एक बार फिर कोरोना से जंग है।
फीका- फीका फागुन का रंग है।

लगा भारत पर प्रतिबंध देखिये,
कोई मित्र नहीं किसी के संग है।

न ही कोई शोर शराबा नगर में,
न शराब पीये न ही कोई भंग है।

बरस बीता एक कोरोना कहर में,
फिर भी देखो अंतर्मन में उमंग है।

अमन  व सौहार्दभाव से मिलिये,
मिलकर  मनाये होली सतरंग है।

देवें परिचय एक्य सूत्र 'तोषण'
सतत जन-जन जीवन उमंग है।


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा

बेरंग ही सही

बेरंग ही सही मना लिए
अब की बार होली फिर से
कोई लगाया नहीं गुलाल
न किसी मारी पिचकारी
ये कैसी है होली.....???

खुशियों में मानो ग्रहण लग गया
शैतान कोरोना काल सत्यानाश
बच्चों की चहचाहट नहीं थी
न ही नगाड़े की धुन कहीं
देखा न किसी के माथ रोली
ये कैसी है होली.....??

अबीर गुलाल का नहीं निशाँ
डी जे भी थे सब बंद पड़े
थिरकन नहीं थे पाँव पे
खड़े खड़े दूर से ताक रहे थे
एक दूजे को हमजोली
ये कैसी है होली.....??

ऐसा दिन न मिले किसी को
न छाये कभी गम के बादल
दुआ है परवरदिगार से मेरी
कुबुल करना सरकार अभी
भीगे बरस अगले सूखे चोली
ठीक से हो नित होली....√√ 

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा

रविवार, 24 जनवरी 2021

नेता जी

*नेता जी*

जब जब अत्याचार बढ़ा।
तब तब नव उन्वान चढ़ा।
बनकर ढाल जो सुभाष ने,
अरि के  आगे  रौद्र खड़ा।

आजादी की खातिर जिसने,
खून देने का आह्वान किया।
लेकर एक सेना की टुकड़ी,
सीना को बढ़कर तान दिया।

नेता जी नाम अमर हो गया,
नवभारत के नव इतिहास में।
ऋणी रहेगा सदा देश अपना,
ऋतु  तीनों  मधु मधुमास में।

दिनकर  यश गाता मिलकर,
ले तिरंगा देश का स्व हाथ में।
आओ जयकार करे देश की,
हिल मिल कर एक साथ में।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौं.लोहारा

रविवार, 3 जनवरी 2021

छत्तीसगढ़िहा युवा

विषय-छत्तीसगढ़ी युवा
======================

छत्तीसगढ़ के युवा जागव।
सुग्घर भुंइया सिरजावव।।1 

खांध  मा  नांगर धरलव।
धान के कटोरा भरलव।।2

छत्तीसगढ़ के बेटा रतन।
करले एखर बने जतन।।3

जोर  युवा  के  हाथ मा।
सरकार हे तोर साथ मा।।4

जम्मो युवा छत्तीसगढ़ के।
हाथ बढ़ावव  बढ़-बढ़ के।।5

छत्तीसगढ़ के युवा किसान।
जुरमिल करव करम महान।।6

छत्तीसगढ़ी  युवा के जोर हे।
जग मा जेकर करम शोर हे।।7

बेटा छत्तीसगढ़ महातारी के।
फूलवा जइसे  फूलवारी के।।8

शेर जइसे युवा के दहाड़ हे।
कांपे डोंगरी अऊ पहाड़ हे।।9

छत्तीसगढ़िहा युवा तलवार हे।
थरथरावय  जग  संसार हे।।10

दिनकर जइसे युवा दमके।
रात मा चंदा कस चमके।।11

तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"
धनगाँव ,डौंडी लोहारा
जिला बालोद छ.ग.
पिन:-491771
 मो:-9617589667

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

शरद पूर्णिमा


शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई व शुभकामनाओं के एक रचना....

*शरद की अमृत धार*

चाँदनी रात में आज चाँद खिलखिलाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।

शरद की रातें जुगनू की तरह चाँदनी चमकती है।
बूँदे  ओस की धरा पर फैली कोहिनूर दमकती है।
देख - देख नजारा गगन से दिनकर भी शर्माया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।1।

शरद की सर्द  रातें शीतलता बरसाती मन भीतर।
बगिया मुस्कुराती फूलों की खुश्बू बिखराती ईतर।
नवरसों में मदमाता भँवरा चहूँ दिक में मंडराया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।2।

मधुबन बहकने लगी आज श्याम दर्श जो होना है।
प्रेम बहार सोलह श्रृंगार लिये एक दूजे में खोना है।
राधेकृष्ण की रासलीला स्वयं शिव देखने आया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।3।

सप्त सुरों का राग लिए सतरंगी फाग महीना है।
इंद्रधनुषी रंगों की जैसी दुनिया और कहीं ना है।
शरद की अमृत धार से "दिनकर" आज नहाया है।
लगता है जैसे अंबर धरती से मिलने आया है।4।

©®
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौ.लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
30/10/20

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

दिनकर

दिनाँक -15/04/2020
वार- बुधवार
विषय - चित्राभिव्यक्ति
विधा- मुक्त छंद

संचालक -पूनम दुबे वीणा
समीक्षक-अर्चना पाठक 'निरंतर'

संचालक मण्डल  ✒ कलम की सुगंध

##################

कनक प्रभा लिए दिनकर देखो
धरा पे निखरी किरणों संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

देख जिनको कीच अंतर से
खिलखिलाती सर पे कमल
मोती रूप धर ओस की बूंदे
बरसी चांदनी धरा धवल
मेघा देखकर संग पवन
लेकर आती नयी तरंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

चिड़िया चहके देखके जिनको
वन उपवन पुष्प मुस्काते
पर्वतमाला से झरने झरझर
गतिशील की गीत गाते
लेकर नव उन्वान बढ़ता
भरकर सपने सप्त रंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

खेतों में धान इतराते
भीनी महक की धार लिये
कोयल कुके आम की डाली
बसंत राग मल्हार दिये
कृष्ण की बंशी जा पड़ती
झूमते सुर सप्त स्वर संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

दिनकर तेरे रूप अनेक
नव ऊर्जा संचार करे
दैहिक दैविक भौतिकता के
सारे दुख संताप हरे
रोम रोम होता पुलकित
खिल उठता सर्वंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

तोषण कुमार "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद 
छत्तीसगढ़

प्रतिक्रिया:-
आज चित्र अभिव्यक्ति पर सृजित रचनाओं की समीक्षा समीक्षक अर्चना पाठक निरंतर

1आदरणीय तोषण कुमार चुरेंद्र सुरेंद्र जी- आपने दिनकर ,पुष्प और पूरी प्रकृति को समेटती अति सुंदर रचना सृजित की है आप की भाषा शैली बहुत ही उत्तम है शिल्प सधा हुआ सुंदर कृति बधाइयाँ👏👏👏

2 वंदना सोलंकी जी- दिनकर की ढलती *लालिमा रक्तिम आभा मानो* एक अल्हड़ बाला की बहुत ही सुंदर सृजन आपका अनुपम कल्पनाशीलता शिल्प अति उत्तम बधाइयांँ अनंत शुभकामनाएँ👏👏👏
3- आशा भारद्वाज जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ आपकी *पवन उठाए हैं खुशियां* क्या कहने भाव पक्ष बहुत सुंदर अद्भुत सृजनशीलता बधाइयाँ👏👏

4-कुसुम कोठारी जी - *नव विहान  भोर* की लालिमा और आदित्य के आगमन का बहुत सुंदर  सृजन किया ।आपकी रचना शैली अनुपम है भाषा सुगम, सुबोध शत-शत बधाइयाँ

👏👏
आप की दूसरी रचना सुरमई शैया से उषा के सिंदूरी पाँव गजब की कल्पनाशीलता। पायल छन की सुनहरी किरणों के घुंघरू बिखरे वाह वाह 👏बहुत उत्कृष्ट 👌अनुपम कल्पनाशीलता की दाद देनी पड़ेगी सुंदर उपमान और अलंकारों से सुसज्जित बेहतरीन सृजन बधाइयाँ👏👏

5 अनीता सुधीर जी -अनीता सुधीर जी आपने बहुत ही सुंदर कुंडलियाँ  सृजित की है ।अनुपम छटा बिखेरती प्रकृति की सुंदर छवि ।अति उत्तम शिल्प, भाषा शैली सुबोध ,बधाइयाँ👏👏

6- सुनील बाजपेई शिवम जी 

आपने चित्र अभिव्यक्ति पर बहुत ही सुंदर प्रकृति का चित्रण किया है कल्पनाशीलता अनुपम और सरल भाषा का प्रयोग उत्तम सृजन बधाइयाँ👏👏

7- प्रतिभा प्रसाद जी -चित्र अभिव्यक्ति पर प्रकृति का सुंदर चित्र उकेरती सरल भाषा से आपने अभिव्यक्ति को सजाया है झूम-झूम धरा का यूँ इठलाना वाह बहुत सुंदर पंक्तियां अनुपम सृजन बधाइयाँ👏👏

8- चंद्र किरण शर्मा जी 

आपने चित्र पर बहुत ही सुंदर सृजन किया भौंरा गुन गुन करें पुष्प नया रूप धरे ।अतुल प्रकाश पर्व नव रूप भाये है क्या सुंदर पंक्तियाँ है आपकी  बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏
9- पूनम दुबे वीणा जी -आपने श्रृंगार में डूबी वसुधा जो चारों ओर हरी भरी दिख रही, बहुत बहुत ही सुंदर भावपूर्ण पंक्तियां आपने लिखी हैं और एक सुंदर गीत लिख डाला आपने चित्र पर बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏

10 डॉ कमल वर्मा जी 

 आपने सुहानी भोर पर चौपाई छंद में बहुत ही सुंदर *पूर्व में है लाली* छाई रंग बिखेरे उषा आई सुंदर पंक्तियाँ अद्भुत सृजन 👌मनमोहक बधाईयाँ👏👏

11 महेंद्र सिंह भाटी जी 

आपने पुष्प पर बहुत ही सुंदर कविता लिखी हैं और भंवरा फूल इनको प्रेमी जोड़ों के साथ जोड़कर बहुत ही सुंदर भावपूर्ण सुजन दिया है इससे पूरी धरती में खुशियाँ ही खुशियाँ फैली हैं सुंदर
👏👏👏

12 सरोज साहू जी आपने मुक्त छोड़ो बहुत ही सुंदर रचना की है
नव आभा और उमंग ले सुंदर सृजन👏👏

13 इन्द्राणी साहू साँची जी

ताटंक छंद में गीत सृजन 
अति उत्तम 👏👏👏
बधाई, शुभकामनाएँ

14 अनुराधा चौहान सुधी जी
अंतर्मन में उल्लास लिए मन खुशियों की आस लिए सुंदर पंक्तियाँ अनुपम से बधाइयाँ👏👏
15 कृष्णा पटेल जी 

आपने बहुत सुंदर भाव  पर सृजन किया बेहतरीन 👌👌बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏

16 धनेश्वरी धरा जी

 आपने सुंदर दो कुंडलियाँ रच डाली और भाव पक्ष उत्तम, शिल्प सधा हुआ बेहतरीन सृजन चित्र पर बधाइयाँ👏👏


आज चित्र पर आप सभी ने बहुत ही सुंदर सृजन किया आप सभी को बधाइयाँ ,अनंत शुभकामनाएँ।🙏







5



शनिवार, 30 नवंबर 2019

आसुरी प्रवृत्ति


समसामयिक रचना

अपने भारत  देश मे  देखो,
कानून भले कितने भी बड़े।
कैसे  बचेंगी  बेटी भँवर से ,
दानव पग -पग जो है खड़े।।१।।

देख  तेरे  संसार  में  दाता,
दुखदायिनी है घटना घटती।
शील संरक्षण खातिर औरत,
कहाँ कहाँ  रहती भटकती।।२।।

दारू गाँजा के नशेड़ी सारे,
बेटी की अस्मत लगे लूटने।
लगता ऐसा अब न्याय की,
तर तर लगे है पछीने छुटने।।३।।

कितनी बेटियां है झौंकी गई,
बुराईयों की भड़की आग में।
कब तक आतंकित रहे यहाँ,
लगे मरहम  कब  ये दाग में।।४।।

बेटी  माता बहू  रक्षा  खातिर,
आखिर जायें तो जायें कहाँ।
अंत कब होगा अत्याचार का,
तोषन का हृदय थर्राये  यहाँ।।५।।

✒✒✒✒✒
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

रविवार, 20 अक्टूबर 2019

मिट्टी का दीपक


मिट्टी का है स्वरूप मेरा, मिट्टी में ही मिल जाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

मुझसे ही आदि जगत की, और अंत भी मुझसे ही।
जब तक जलता रहूँगा जग में, ज्योति मिलेगी मुझसे ही।
है जितनें संसार में प्राणी सबमें एक ही ज्योति,
होता जीवन सब प्रकाशित और अंधेरा मुझसे ही।
साथ मिले जो सबका मुझको,मैं भी साथ निभाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

मिट्टी का दीप जान न मुझको,जीवन अपनी मिट्टी की।
दीपक लेकर करले पूजा,मातृभूमि सबकी मिट्टी की।
बन जाए अनमोल ये जीवन,हो जाये जग नाम अमर,
दीपदान कर अपने वतन पे,कर्ज चुका दे इस मिट्टी की।
बनकर ऊर्जा तेरे भाल पर,मिट्टी से तिलक लगाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

हर घर हर चौराहे पे दिखता,हर गली बाजार पे बिकता।
मेरे बिन हर आँगन सूना,रौशन हर द्वारे मिलता।
मेरी महत्ता मान लो सब,अपना वजूद जान लो सब,
मुझसे ही होता अरूणोदय,और मुझसे है पुष्प खिलता।
मुझको सब स्वीकार करलो,नित नया सवेरा लाऊँगा।
बनकर दीपक बाती संग मैं,तम को भी जीत जाऊँगा।

रचना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

शिक्षक

शिक्षक

लक्ष्य का हमको ज्ञान कराते।
बिना इनके दीक्षा कहाँ पाते।
करने जग को रौशन यह जो,
बन दीपक स्वयं जल जाते।

महिमा जिनकी बर्नी न जाये।
वेद पुरान भी पार नहीं पाये।
सत्य असत्य का फर्क बताने,
सदा सज्जन के पथ अपनाये।

शिक्षक मेरे हैं राह दिखाते।
मानवता का है पाठ पढ़ाते।
जो भी इनका नित करता मान,
सदा जीवन में आशीष पाते।

गर्व जिनके मन नहीं होते।
सतत् कर्म में जुटे हैं होते।
खुद की चिंता नही है होती,
सत कर्म जीवन भर होते।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

पाप पुण्य का लेखा

पाप पुण्य का लेखा।
कर्ता है कौन देखा?
आज मेरी कल तेरी,
सबकी बारी आनी।
जनम मरण शाश्वत सत्य,
रखिए याद जुबानी।
मेरा यहाँ न तेरा यहाँ
कोई नही बसेरा,
आते जाते रहते लोग
जग हुआ सरायखाना।
रोते आए रूलाके जाना
ये कहाँ की रीत?
आपस हो बस भाई चारा
बसी रहे बस प्रीत की गीत।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

जियें

जियें
जिंदगी
जिंदादिली
जिंदगी भर
जिंदगी के साथ
जिंदगी कट जाये।

कृष्ण कन्हाई

दही चुराने माखन खाने
जन्म लिये हैं कृष्ण कन्हाई।

नटवर नागर सुख के सागर
जन्म दिवस पर लाख बधाई।

पापी को मारे संत उबारे
समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।

मातु यशोदा नंद बाबा
हलधर तेरे बड़के भाई।

मित्र सुदामा के झोली भरे तुम
खुशियाँ सारी मंगल आये।

घर घर दीप जलाए गोपी
सभी जन मिलके सोहर गाये।

दीन दुखियन के त्रास हरे
प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।

आजा नटवर लाज बचाने
कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

मंगलवार, 10 सितंबर 2019

हवाई जहाज

छोटी सी बालमन की कविता

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।

सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती  करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।

धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन,
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।

मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।

होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गणपति वंदना

नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।

बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।

मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।

माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।

नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।

एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।

कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शनिवार, 24 अगस्त 2019

कृष्ण जन्मोत्सव

दही चुराने माखन खाने जनम लिये है कृष्ण कन्हाई।
नटवर नागर सुख के सागर जन्म दिवस पर लाख बधाई।
पापी को मारे संत उबारे समरांगण गीता ज्ञान सुहाई।
मातु यशोदा नंद बाबा हलधर तेरे बड़के भाई।

मित्र सुदामा के झोली भरे तुम खुशियाँ सारी मंगल आये।
घर घर दीप जलाए गोपी सभी जन मिलके सोहर गाये।
दीन दुखियन के त्रास हरे प्रभु तीनों तिलोक जग हर्षाये।
आजा नटवर लाज बचाने कलयुगी द्रोपदी ये गोहराये।

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

दीदी आई जी दीदी आई

शिशु गीत

दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।

श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।

कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।

गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।

कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।

हर हर महादेव

॥हर हर महादेव॥
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^
                        (१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
                        (२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले  निकले  गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
                        (३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
                       (४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
                        (५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^

शुक्रवार, 28 जून 2019

बदरा रानी

बदरा  रानी  बदरा रानी
लेते आना भर भर पानी
बड़ी  राह  निहारत  बैठे
झूम के नाचे मयुरा रानी

ऋतु सावन  तुझे प्यारी
लगे धरती न्यारी न्यारी
सौंधी खुशबू मिट्टी की
है महके  क्यारी क्यारी

अब ना तुम लगाओ देर
राह  निहारत  आंखें टेर
बरस  अब  कारे  बदरा
समय बीते हो गयी ढेर

छाएगी  मगन हरियाली
बात बोले कोयल काली
हो जगत सारा खुशहाल
जैसे सारी दुनिया पाली

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
29_06_19

बुधवार, 29 मई 2019

वाटसप थोथनापोथी

वाटसप अउ थोथनापोथी
रहिथे धियान तोर कोती
चिंता रहे सब मितान के
का भेजे हवय बिहान के
कोनो गुडमार्निग कहिथे
कतको झन सुते रहिथे
फोटू दिखथे आनी बानी
कते दादा कतको नानी
सही बात के शोर नंइहे
सबके दुख ल कोन कंइहे
का होवय अब संसार में
तोर मोर घर दुवार में
आवन सुख दुख ल बांटन
जंगल झारी लहुआ लाटन
सुमरन कलरव रामके
होवत बिहना सांझ के

//जय श्री राम जय श्री राधे//

तोषण कुमार चुरेन्द्र

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...