बुधवार, 15 अप्रैल 2020

दिनकर

दिनाँक -15/04/2020
वार- बुधवार
विषय - चित्राभिव्यक्ति
विधा- मुक्त छंद

संचालक -पूनम दुबे वीणा
समीक्षक-अर्चना पाठक 'निरंतर'

संचालक मण्डल  ✒ कलम की सुगंध

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कनक प्रभा लिए दिनकर देखो
धरा पे निखरी किरणों संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

देख जिनको कीच अंतर से
खिलखिलाती सर पे कमल
मोती रूप धर ओस की बूंदे
बरसी चांदनी धरा धवल
मेघा देखकर संग पवन
लेकर आती नयी तरंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

चिड़िया चहके देखके जिनको
वन उपवन पुष्प मुस्काते
पर्वतमाला से झरने झरझर
गतिशील की गीत गाते
लेकर नव उन्वान बढ़ता
भरकर सपने सप्त रंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

खेतों में धान इतराते
भीनी महक की धार लिये
कोयल कुके आम की डाली
बसंत राग मल्हार दिये
कृष्ण की बंशी जा पड़ती
झूमते सुर सप्त स्वर संग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग-अंग नित्य उमंग

दिनकर तेरे रूप अनेक
नव ऊर्जा संचार करे
दैहिक दैविक भौतिकता के
सारे दुख संताप हरे
रोम रोम होता पुलकित
खिल उठता सर्वंग
पवन प्रभाती जग को जगाती
भरती अंग अंग नित्य उमंग

तोषण कुमार "दिनकर"
डौंडी लोहारा बालोद 
छत्तीसगढ़

प्रतिक्रिया:-
आज चित्र अभिव्यक्ति पर सृजित रचनाओं की समीक्षा समीक्षक अर्चना पाठक निरंतर

1आदरणीय तोषण कुमार चुरेंद्र सुरेंद्र जी- आपने दिनकर ,पुष्प और पूरी प्रकृति को समेटती अति सुंदर रचना सृजित की है आप की भाषा शैली बहुत ही उत्तम है शिल्प सधा हुआ सुंदर कृति बधाइयाँ👏👏👏

2 वंदना सोलंकी जी- दिनकर की ढलती *लालिमा रक्तिम आभा मानो* एक अल्हड़ बाला की बहुत ही सुंदर सृजन आपका अनुपम कल्पनाशीलता शिल्प अति उत्तम बधाइयांँ अनंत शुभकामनाएँ👏👏👏
3- आशा भारद्वाज जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ आपकी *पवन उठाए हैं खुशियां* क्या कहने भाव पक्ष बहुत सुंदर अद्भुत सृजनशीलता बधाइयाँ👏👏

4-कुसुम कोठारी जी - *नव विहान  भोर* की लालिमा और आदित्य के आगमन का बहुत सुंदर  सृजन किया ।आपकी रचना शैली अनुपम है भाषा सुगम, सुबोध शत-शत बधाइयाँ

👏👏
आप की दूसरी रचना सुरमई शैया से उषा के सिंदूरी पाँव गजब की कल्पनाशीलता। पायल छन की सुनहरी किरणों के घुंघरू बिखरे वाह वाह 👏बहुत उत्कृष्ट 👌अनुपम कल्पनाशीलता की दाद देनी पड़ेगी सुंदर उपमान और अलंकारों से सुसज्जित बेहतरीन सृजन बधाइयाँ👏👏

5 अनीता सुधीर जी -अनीता सुधीर जी आपने बहुत ही सुंदर कुंडलियाँ  सृजित की है ।अनुपम छटा बिखेरती प्रकृति की सुंदर छवि ।अति उत्तम शिल्प, भाषा शैली सुबोध ,बधाइयाँ👏👏

6- सुनील बाजपेई शिवम जी 

आपने चित्र अभिव्यक्ति पर बहुत ही सुंदर प्रकृति का चित्रण किया है कल्पनाशीलता अनुपम और सरल भाषा का प्रयोग उत्तम सृजन बधाइयाँ👏👏

7- प्रतिभा प्रसाद जी -चित्र अभिव्यक्ति पर प्रकृति का सुंदर चित्र उकेरती सरल भाषा से आपने अभिव्यक्ति को सजाया है झूम-झूम धरा का यूँ इठलाना वाह बहुत सुंदर पंक्तियां अनुपम सृजन बधाइयाँ👏👏

8- चंद्र किरण शर्मा जी 

आपने चित्र पर बहुत ही सुंदर सृजन किया भौंरा गुन गुन करें पुष्प नया रूप धरे ।अतुल प्रकाश पर्व नव रूप भाये है क्या सुंदर पंक्तियाँ है आपकी  बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏
9- पूनम दुबे वीणा जी -आपने श्रृंगार में डूबी वसुधा जो चारों ओर हरी भरी दिख रही, बहुत बहुत ही सुंदर भावपूर्ण पंक्तियां आपने लिखी हैं और एक सुंदर गीत लिख डाला आपने चित्र पर बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏👏

10 डॉ कमल वर्मा जी 

 आपने सुहानी भोर पर चौपाई छंद में बहुत ही सुंदर *पूर्व में है लाली* छाई रंग बिखेरे उषा आई सुंदर पंक्तियाँ अद्भुत सृजन 👌मनमोहक बधाईयाँ👏👏

11 महेंद्र सिंह भाटी जी 

आपने पुष्प पर बहुत ही सुंदर कविता लिखी हैं और भंवरा फूल इनको प्रेमी जोड़ों के साथ जोड़कर बहुत ही सुंदर भावपूर्ण सुजन दिया है इससे पूरी धरती में खुशियाँ ही खुशियाँ फैली हैं सुंदर
👏👏👏

12 सरोज साहू जी आपने मुक्त छोड़ो बहुत ही सुंदर रचना की है
नव आभा और उमंग ले सुंदर सृजन👏👏

13 इन्द्राणी साहू साँची जी

ताटंक छंद में गीत सृजन 
अति उत्तम 👏👏👏
बधाई, शुभकामनाएँ

14 अनुराधा चौहान सुधी जी
अंतर्मन में उल्लास लिए मन खुशियों की आस लिए सुंदर पंक्तियाँ अनुपम से बधाइयाँ👏👏
15 कृष्णा पटेल जी 

आपने बहुत सुंदर भाव  पर सृजन किया बेहतरीन 👌👌बहुत-बहुत बधाइयाँ👏👏

16 धनेश्वरी धरा जी

 आपने सुंदर दो कुंडलियाँ रच डाली और भाव पक्ष उत्तम, शिल्प सधा हुआ बेहतरीन सृजन चित्र पर बधाइयाँ👏👏


आज चित्र पर आप सभी ने बहुत ही सुंदर सृजन किया आप सभी को बधाइयाँ ,अनंत शुभकामनाएँ।🙏







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