बागान
खिलता पुष्प
धरा के बागान में---
झूमते पक्षी.
बागान देख
नाचे मन मोर है---
बावरी होके.
आते तितली
सतरंगी बाग में--
मनवा लागे.
हुआ सवेरा
मुस्कुराता बागान---
कलियाँ देख
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
बागान
खिलता पुष्प
धरा के बागान में---
झूमते पक्षी.
बागान देख
नाचे मन मोर है---
बावरी होके.
आते तितली
सतरंगी बाग में--
मनवा लागे.
हुआ सवेरा
मुस्कुराता बागान---
कलियाँ देख
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
मोर बिसाय गजरा ल खोपा म लगाले.
आनी बानी के सोला सिंगार ल सजाले.
गजब दिन होगे रे बइरी देखे रेहेंव तोला,
एक घड़ी बइठ आँखी म अपन बसाले.
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
*समीक्षा बर आप सब के बीच प्रस्तुत*
*"मोर आँखी के पुतरी"*
*मोर आँखी के पुतरी कस चमकत रहिबे,*
*बनके फूल मन बगिया म महकत रहिबे!*
*झिन सिरावय मया तोर मोर बर संगी,*
*चिरइ कस हिरदे अंगना म चहकत रहिबे!*
*सावन के महिना बरसा बरोबर गुंइया,*
*बन ठन मया के बरखा बरसत रहिबे!*
*छावय झन दुख के बदरा तोर होंठ म,*
*फूल जस मंउहा खुल खुल हँसत रहिबे!*
*सरदी गरमी रीतु बरसात रहय चाहे,*
*सदा सुहागिन फूल जस सँवरत रहिबे!*
*भुल नइ पाहू तोला कभू मँय तोषण ह,*
*बइठ मया के रस्ता मोला अगोरत रहिबे.*
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद ( छ. ग.)
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...