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।।चौपाई।।
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पेड़
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पंछी डाले अपना डेरा।
आते जाते साँझ सवेरा।
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होती तरुवर से हरियाली।
रहती छायी नित खुशहाली।
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शीतल पवनें हमको मिलते।
आँगन सारे बच्चे खिलते।
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सावन में पानी बरसाती।
धरती माता है हरषाती।
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कितने औषधि जिनसे बनते।
रोगी सारे इनसे तनते।
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आओ साथी पेड़ लगाये।
अपना जीवन हम महकाये।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"
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गुरुवार, 12 सितंबर 2019
पेड़
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