सोमवार, 22 जून 2020

दिनकर के दोहे

★दोहा पंच★

राख राख तैं राख ले,
                बने जतन के राख।
राखत राखत एक दिन,
                जिनगी होही राख।।

आवत बदरा देखि के,
                झूमय नाचय मोर।
सरसर सरसर हे पवन,
                मारय हिया हिलोर।।

जइसे बदरा आत हे,
                भुँइया करय बिचार।
नाँगर जूँड़ा बाँधले,
                बइला धर तइयार।।

टरर टरर मंडुक करे,
                झिंगुर मारय चीख।
धनहा भुँइया देख ले,
                निकले बढ़िहा पीख।।

छानी परवा हे चुहत ,
                जोरा करलौ थोर।
बोनी होगे हे शुरू,
                नाँगर बइला जोर।।

भुँइया के भगवान मैं,
               दिनकर हावय संग।
खेती मोरो पहिचान हे,
               भगवा हावय रंग।।

आज मोर मन हे मघन,
               उमड़त हवय बिचार।
देखव पढ़लव मिल सबो,
               लेवव छाँट निमार।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

मंगलवार, 9 जून 2020

तोर मया मोर जीव के

विषम मात्रिक गजल
बहर /मात्रा /मापनी
२११ २२१ २१२ २१२ २

तोर मया मोर जीव के काल होगे।
देख देख फेर समय जंजाल होगे।

सोच रहिस दुनो मया कुरिया बसाबो,
कोन जनी कते तीर में चाल होगे।

रुसा झनी कभू मोर ले रूप रानी,
फूल सही देह कोयली ढाल होगे।

बात मान मोर संग मा जिबो मरबो,
जरे भले जमाना ह अड़ियाल होगे।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

राम नाम हे सार

राम नाम हे सार रे,जपले तै हरि नाम।
जाती बेरा थोरकिन,करले बढ़िहा काम।।
करले बढ़िहा काम तै,होवय जग मा शोर।
दया मया ला बाँट ले, बात मान ले  मोर।।
बात मान ले मोर सुन,राम भजन मा झूम।
तोर मोर के फेर मा,ऐती ओत न घूम।।

तोषण चुरेन्द्र दिनकर

विशिष्ट पोस्ट

शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...