विषम मात्रिक गजल
बहर /मात्रा /मापनी
२११ २२१ २१२ २१२ २
तोर मया मोर जीव के काल होगे।
देख देख फेर समय जंजाल होगे।
सोच रहिस दुनो मया कुरिया बसाबो,
कोन जनी कते तीर में चाल होगे।
रुसा झनी कभू मोर ले रूप रानी,
फूल सही देह कोयली ढाल होगे।
बात मान मोर संग मा जिबो मरबो,
जरे भले जमाना ह अड़ियाल होगे।
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
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