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रविवार, 12 अप्रैल 2020

अपील

हमारे देश प्रदेश की सरकार हम सबके लिए वृहद रूप से राहत पहुंचाने का कार्य कर रही है जनधन खाता में ₹500 नगद भुगतान किया जा रहा है 2 महीने का चावल बीपीएल के तहत निशुल्क दिया जा रहा है। और तो और उज्जवला गैस योजना के तहत मार्च अप्रैल और मई माह तक सिलेंडर रिफिलिंग मुफ्त । तो क्या हम अपने घर से 1 किलो चावल ₹100 पैसा नहीं दे सकते आइए अपनी सोच को ऊंचा करें और देश के हित में कार्य करें।
                 कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते हमारे भारतवासी और प्रदेश वासी बड़े ही गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। ऐसे में हम सबका फर्ज बनता है कि हम सब देशवासियों प्रदेशवासियों के सहयोग के लिए यथाशक्ति तथा भक्ति के अनुसार 4 आना 8 आना किलो डेढ़ किलो या उससे अधिक दान कर सकें। यह हम सबके लिए बड़े ही गर्व की बात होगी। सरकार जब हमारे लिए इतना सोच रही है तो हमारा फर्ज भी बनता है कि हम भी कुछ अपने देश के लिए अपने प्रदेश के लिए करें ।तो आइए हम सब मिलकर देश के हित में नेक कार्य करें और अपनी यथाशक्ति अनुसार देश को दान दे। 
                  कहा गया है ...देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे... तो आइए इस गीत को चरितार्थ करते हुए हम एक दूसरे के सहयोगी बने जिससे कि किसी का कल्याण हो सके। आइए हम सब मिलकर माननीय प्रधानमंत्री जी का और माननीय मुख्यमंत्री जी का साथ दें । 
                   गीत कहता है ....नदिया न पिए कभी अपना जल, वृक्ष न खाए कभी अपना फल ,अपने तन को मन को धन को, देश को दे जो दान रे वह सच्चा इंसान रे वह सच्चा इंसान रे....
                   भारत माता की जय, जय छत्तीसगढ़,जय जवान, जय किसान ,जय विज्ञान, जय हिंदुस्तान, स्वास्थ्य कर्मी जिंदाबाद, पुलिस विभाग जिंदाबाद,जय हिंद...
बहुत-बहुत धन्यवाद।

सोमवार, 29 जुलाई 2019

आचार्य जी

आचार्य जी....

कितना सम्मानजनक शब्द है,किंतु शब्दार्थ अथाह ।जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नही है। जिन्हे इनकी समझ है वह स्वयं ब्रह्म से कम नही है। कोई भी व्यक्ति आचार्य तभी हो सकता है जब वह सही और गलत का अंतर स्पष्ट करते हुए भैय्या बहनों के अंतकरण में अपनी अमिट छाप छोड़ सके। जो अपने कर्मो के द्वारा अपने पूर्वजों ,महापुरूषों से प्रेरणा पाकर अपने अनुशरणकर्ताओं का पथप्रदर्शक बनकर संबल व प्रोत्साहित करे। आचार्य को मन ,शरीर,बुद्धि ,नैतिक व आध्यत्म दृष्टि से परिपक्व होने की आवाश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बन सके।जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी से घड़ा बनाने के लिए अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए उसका निर्माण करता है ठीक वैसे ही आचार्य भी अपने भैय्या बहनों के सर्वागिण विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग नवाचार आदि प्रतिपादित करता है। श्री रामचरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी धर्मपत्नी से प्रेरित होकर महान ग्रंथ की रचना की।जो आज हम सबके लिए प्रेरणादायी है।अगर हम अपने आने वाली पीढ़ी, समाज, राष्ट्र और विश्व व भैय्या बहनों का कल्याण करना चाहते हैं प्रेरणा बनना चाहते हैं   तो हमें अपने दुर्गुणो का त्यागकर एक अच्छे आचरण करने वाला आचार्य बनना होगा।

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शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...