रविवार, 28 मार्च 2021

मोर गाँव के शीतला


मोर गाँव के शीतला...

मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा
शीतल हे जुड़ तोर छंइहा,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा

दया ले तोर दाई ओ,चलत हे मोर जिनगी ह
देवत हे भर-भर ममता,सुनत हे सबके बिनती ल
करत हे तोर सेवा ल,जोरे जोरे सबो बंइहा....
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

चरन म जेन हर आथे,नंइ खाली हाथ वो जाथे
जय दाई मात शीतला के,सेवा जस गीत ल गाथे
पवनपुत सेऊक तोरे,अउ लखन राम कन्हैया...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....

महादेव ब्रह्मा बिष्णु संग,पूजय तोला ये नर-नारी
हावस तेही सहाई ओ,सबन के हस तै हितकारी
पूजा अउ पाठ नंइ जानँव,मँय दिनकर हँव गा मनबइहा...
मोर गाँव के शीतला,शीतल हे जुड़ तोर छंइहा....


तोषण कुमार चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ 491771

हाय रे मोर परसा के फूल


हाय ओ मोर परसा के फूल,मार डारे हँसाई खुले खुल
हाय गा मोर सरसो के फूल,मोही डारे तोर रेंगना झूले झूल
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फागुन महिना गोरी, उड़त हे गुलाल ओ
उड़त हे गुलाल
मिरगीन कस रेंगना तोरे,चेहरा लाल लाल ओ
चेहरा लाल  लाल 
हाय ओ मोर परसा के फूल........
हाय गा मोर सरसो के फूल........
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मँय तोर राधा रानी,किसन कन्हैया तँय
किसन कन्हैया
बिरिज मा होली खेलबो,जोरे जोरे बंइहा 
जोरे जोरे बंइहा
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय मोर परसा के फूल....
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पीरीत के रंग मा गोरी,जिनगी ला रंग डारे ओ
जिनगी ला रंग डारे
संग कभू छूटे नाहीं,बंधना बध डारे ओ
बंधना बध डारे
हाय ओ मोर परसा के फूल.....
हाय गा मोर सरसो के फूल.....
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संगे मा जिबो बइहा,संगी मर जाबोन गा
संगे मर जाबोन
फूल बगिया कस राजा,कुरिया बनाबोन गा
कुरिया बनाबोन
हाय गा मोर सरसो के फूल....
हाय ओ मोर परसा के फूल....
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गीतकार
तोषण  चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छ.ग.

शनिवार, 13 मार्च 2021

मन बसाले सियाराम

मन म बसाले सिया राम ल...
संगी बिगड़े बनाही सबके काम ल...

1
तरगे अवधपुरी,रानी कौशिल्या ह
गोड़ के धुर्रा ले,उबरे अहिल्या ह
मरा मरा जपो हरि नाम ल...

2
शबरी दाई संग, गिधवा ल तारे
बनके मितान प्रभु,बाली ल मारे
झटकुन पहुंचे हरिधाम ल.....

3
काकभुशुण्डि घलो, गुणे ल गावय
बइठे गरुड़ जी ह, शोर ल लमावय
नारद जपय सुबे शाम न...

4
ये कलजुग म संगी, नाम ह सार हे
भजले राम ल ग, तोर बेड़ा पार हे
लागे नहीं कुछु दाम ल...


तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
6267538036

लोग

★ *लोग* ★
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दीपक बनके न सही जलते हैं लोग।
आस्तीं के सांप जैसे डसते हैं लोग।
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मुस्कान अधरों पर रखकर यूँ झूठी,
बेदर्द जहाँ में अपने छलते हैं लोग।
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देख-देख हँसती खिलती दुनिया मेरी,
फाँसने को मुझे जाल बुनते हैं लोग।
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रहता हूँ घिरा जमाने के रंजो गम से,
राहों पे सदा काँटे बनकर रहते है लोग।
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एक था एक ही रहेगा जहाँ में "तोषण,"
मिलकर मेरे ही गाँव में कहते हैं लोग
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तोषण चुरेन्द्र धनगाँव
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग.

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शिवनाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...