घूंट कड़वा इश्क़ का अब पीया नहीं जाता।
बिना तेरे दीदार के अब जीया नहीं जाता।
कटेंगे कैसे यूं पल पल हर दिन ऐ तोषण,
तन्हाई में बेचैन दिल अब सीया नहीं जाता।
शनिवार, 19 जनवरी 2019
घूंट कड़वा इश्क़ का
गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018
नहीं जाता
छूने की चाहत चाँद को पर हाथ नहीं जाता
गेसुओं पे उसके सोने का यूँ दिन नहीं आता
बड़ी ही कश़्मकश़ में है जिन्दगी अपनी यारों
गम ए जुदाई का यूँ ही जहर पीया नहीं जाता
मंगलवार, 25 सितंबर 2018
शनिवार, 15 सितंबर 2018
मैं तेरी परछाई हूँ
मैं तेरी परछाईं हूँ मुझे छोड़ कहाँ तुम जाओगे।
मैं तेरी राधिका प्यारी मुझसी कहाँ तुम पाओगे।
माखनचोर केशव मेरे तुझमे मैं हूँ मुझमे तुम हो,
अमिट प्रेम का रंग हे कान्हा कहाँ तुम लगाओगे।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
बुधवार, 12 सितंबर 2018
अपनी ना रही
अनजाने दुनिया में अब कोई उम्मीद अपनी ना रही।
माना है जिसे जान से भी ज्यादा वो अपनी ना रही।
प्यार भरी बाते वो वादे वो कसमें अब लगते हैं झूठे,
गम का तो नाम नही यारों 'ख़ुशी' भी अपनी ना रही।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
शुक्रवार, 20 जुलाई 2018
मोबाइल
जेती देखँव तेती सब धरे हवय मोबाइल,
नइ रहय बैलेंस तिहा मारत हे इसटाइल,
खिंचत रहिथे बज्जरहे सेल्फी फोटू,
मन माड़े दे दे के बेंदरा कस इसमाइल
तोषण कुमार चुरेन्द्र
गुरुवार, 28 जून 2018
आभार
शनिवार, 26 मई 2018
क्यों है..
मेरी तन्हाईयों में तेरी याद आती क्यों है.
मेरे जख़्में दिल को तड़पाती क्यों है.
बहते रहते हैं मेरी आँख से आँसू हमेशा,
नसीब मेरा तुझे मुझसे छुपाती क्यों है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
गुरुवार, 17 मई 2018
तुझसे ही
तुझसे ही मेरी सुबह है तुझसे ही मेरी शाम है
तुम ही हो जिन्दगी में मेरी लब पे तेरा नाम है.
छोड़ न जाना मुझे कभी मझधार में ए खुशी,
तुझसे ही करता रहूँ प्यार मैं यही मेरा काम है.
तोषण कुमार चुरेन्द्र
मंगलवार, 15 मई 2018
माँ
दिया तुमने जनम मुझे ये तेरा एहसान है.
माँ तेरे कदमों में ही मेरा सारा जहान है.
कर्म धर्म मेरा कितना भी अच्छा हो माँ
पूरी कायनात में माँ एक तू ही महान है
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
जीवन
फूलों की खुशबूओं सी महकता रहे जीवन
पक्षियों की कलरव सी चहकता रहे जीवन
सदा रहे कायनात तेरी खुशियों से भरी हुई
दीपक की ज्योति सी दमकता रहे जीवन
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छ. ग.
सोमवार, 2 अप्रैल 2018
मोर बिसाय गजरा
मोर बिसाय गजरा ल खोपा म लगाले.
आनी बानी के सोला सिंगार ल सजाले.
गजब दिन होगे रे बइरी देखे रेहेंव तोला,
एक घड़ी बइठ आँखी म अपन बसाले.
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगाँव
गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018
तेरे दर पे
*तेरे दर पे आकर फरियाद करता हूँ.*
*हर घड़ी हर पल तुझे याद करता हूँ.*
*सुनना या ना सुनना मेरी मर्जी है तेरी,*
*आसरा से जिंदगी खुद आबाद करता हूँ.*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७*
सोमवार, 15 जनवरी 2018
तन्हाइयों में
तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र
तन्हाइयों में
तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र
तन्हाइयों में
तन्हाइयों में दर्द-ए -मोहब्बत का एहसास होता है. मिट जाते हैं सारे गम जब वो दिल के पास होता है. नजरों का यूँ रह रहकर मिलना मिलके झुक जाना, खुशनुमा वो हसीन पल जो हरपल खास होता है तोषण कुमार चुरेन्द्र
मुक्त मुक्तक
*तोषण कुमार चुरेन्द्र की कलम से*
[1/7, 2:09 AM] Toshan Kumar Churendra:
रब कहता है
मैं वो करीगर हूं पत्थर को भगवान बना देता हूं
सुनो अबोध बालक को इंसान बना देता हूं
करले जरा मेरी पहचान रे तोषण
सारे जग में तुम सबकी पहचान बना देता हूं
[1/7, 2:13 AM] Toshan Kumar Churendra:
करले मेरी भक्ति तुझे मालामाल कर दूंगा
सोंचा न हेगा तु जग में निहाल कर दूंगा
एक मैं ही हूं सबका साथी तोषण
गरीब को अमीर अमीर को कंगाल कर दूंगा
[1/7, 2:18 AM] Toshan Kumar Churendra:
रहमत तेरी मुझ पर दाता हर कदम बरसता रहे
दुखो का न हो सामना जीवन सदा सरसता रहे
मिलकर बांटूं तेरी गाथा करता रहूं सिर्फ तेरा ध्यान
सब में हे प्रेम भाईचारा विश्व में सदा समरसता रहे
[1/7, 2:25 AM] Toshan Kumar Churendra:
मंच से हमारे हे विप्रवर आपको सादर बिदाई है
आगत का हम करेंगे स्वागत यही आदर पहुनाई है
मधुर मधुर सी तान से पल्वित धरा हमारा है
सुन दर्शक दीर्घा स्रोता समाज ने जोरदार तालियाँ बजाई है
[1/7, 2:33 AM] Toshan Kumar Churendra:
हरी की हरियाली देता संतो
राम नाम गुन गाने का
भक्त और भगवान को एक दुसरे से मिलाने का
पीली आपको इशारा करेगी पांच मिनच है शेष
छा जाए लालिमा मंच में समझो जाना अपना देश
[1/7, 2:37 AM] Toshan Kumar Churendra:
जिनगीच के राहत ले लकर लकर तै करबे
लकर लकर तै झन कर संगी एक दिन तै हफरबे
हफरे के पहिली करले जोरा गाले तै सिया राम ल
संवरे नही जियत ले संगी मरे के बाद संवरबे
[1/7, 2:40 AM] Toshan Kumar Churendra:
जियत ले हे तोर मोर कोनो नइ देवय साथ गा
रुपिया पैसा महल अटारी जावय नइ तो साथ गा
राम रमैय्या जपले तैहा मन में धरले ध्यान जी
पार लगाही दसरथ नंदन मोर सिया पति रघुनाथ गा
[1/7, 2:50 AM] Toshan Kumar Churendra:
ए तन माटी के खिलौना
पानी परे घुर जाही जी
रुपिया पैसा धन डोगानी
काम घलो नइ आही जी
जियत भरके संगी साथी
मरेम पीताम्बर ओढ़ाही जी
रापा कुदारी म गड्ढा करके
भुइया म तोला गडियाही
नइ खवाय तोला तात पेज
दसकरम म भोग लगाही जी
तोर कमइ ल फुदर फुदर के
नंगत मजा उड़ाही जी
राम नाम सुमरन करले संगी
इही काम तोर आही जी
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सोमवार, 18 दिसंबर 2017
सतरा बारा सतरा
जब ये सतरा बारा सतरा आया
वही एहसास फिर दिल में लाया
आरजू थी जमाने से मिलन की
खुशनुमा वो पल जो साथ पाया
आई जब करीब वो मेरे दिल के
तारे चमकने लगी खिल खिल के
बेकाबू होकर लरजते रहे ये लब
नज़रे हमें सताने लगी मिल मिल के
थी सांसे इक दुजे में समाने लगी
हसरत बरसों की क्यूं जगाने लगी
भूल जाना चाहता था सारी बंदिशे
एक वो ही थी बहाने बनाने लगी
तकलीफ़ हुई दिल को उसकी जुदाई पर
हंसती रही रातें ओर चांद मेरी तन्हाई पर
मजबूरी थी उसकी और बेबसी मेरी भी
रास न आया रब को बंदे की दुहाई पर
उस पल का मुझे हमेशा इंतजार रहेगा
बातों पर उसकी हमेशा ऐतबार रहेगा
कहेगी वो कभी आजा करले पुरी हसरत
सच होंगे सपने या दिले राजदार रहेगा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
गुरुवार, 7 जुलाई 2016
विशिष्ट पोस्ट
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