बुधवार, 12 सितंबर 2018

अपनी ना रही

अनजाने दुनिया में अब कोई उम्मीद अपनी ना रही।
माना है जिसे  जान से भी ज्यादा वो अपनी ना रही।
प्यार भरी बाते वो वादे वो कसमें अब लगते हैं झूठे,
गम का तो नाम नही यारों 'ख़ुशी' भी अपनी ना रही।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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