जिनगी मा कभू घमंड झन करबे. माटी के बने हस माटी मा मिलबे.
अलग-अलग पहचान है,अलग- अलग है वेष। भारत की ये शान है,.......कहीं नहीं है क्लेष।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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