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शनिवार, 31 मार्च 2018

दुनिया में मोर बजरंगी

दुनिया में मोर बजरंगी
🌹👏🌹👏🌹👏🌹
दुनिया में मोर बजरंगी के नाम  बड़े हे।
नाम बड़े हे प्रभु के काम बड़े हे।
दुनिया में मोर---------

राम नाम दिन रात जपत हे करत राम के काम।
भरत सही पिरोहिल राम  के ह्रदय लगाये राम ।
सूरज ला लीलने वाला के
सूरज लीलने वाला के  काम बड़े हे।

दुनिया  में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे।
दुनिया में---

अवध पुर में बेंदरा बन आगे  भोला के अंवतारी।
अपने बनगे बेंदरा शिवजी ,अपने बने हे मदारी।
नाच के राम रिझईया के
नाच के राम रिझईया के काम बड़े हे।।

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे।
दुनिया में--

ब्राहम्ण रूप मा मिले राम ला होइस जब बनवास।
बाली के डर में  रिष्यमुक में सुग्रीव  करे निवास ।
राम सुग्रीव के मिलइया के
राम सुग्रीव के मिलइया के काम बड़े हे।।

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे
दुनिया में-----

सीता के पता लगाये खातिर कइसे समुद्र  ला नापे।
रावण के बाटिका उजारे दानव दल सब कांपे।
पूंछ में लंका जलइया के
पूंछ में लंका जलइया के काम बड़े हे।।

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे।
दुनिया में--

विभीषन संग करे मिताई लंका के भेद ला पाये।
माँ सीता के गोदी मा मुंदरी तंही गिराये।
सीता ला सुख पहुंचइया के
सीता ला सुख पहुंचइया के काम बड़े हे।।

दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे।
नाम बड़े हे प्रभु के काम बड़े हे।
दुनिया में मोर बजरंगी के नाम बड़े हे।।

केवरा यदु "मीरा"

मंगलवार, 27 मार्च 2018

निषादराज के दोहे

निषाद राज के दोहे:-
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फूल खिले हैं बाग में,गेंदा अरु कचनार।
भँवरा गातें गीत हैं,कोयल कुहके डार।।

वन में देख बहार है ,परवत पे  हरियाय।
शीतल मंद समीर है, वर्षा खींचे  आय।।

नमन् करूँ गुरुदेव को,दे मुझको वरदान।
मन मेरा उज्ज्वल बने,मिटे मोह अज्ञान।।

शान तुम्हारी जाय ना,ना कर ऐसा काम।
जग में ऐसा तुम करो,चले हमेसा  नाम।।

माँ तो सागर प्यार का,डुबकी लेहु लगाय।
ऐसा अवसर ना मिले,समय बीत पछताय।।
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रचनाकार:-
बोधन राम निषाद राज
सहसपुर लोहारा,कबीरधाम (छ.ग.)
All Rights Reserved@bodhanramnishad

भाखा विज्ञानी

भाखा विज्ञानी बनिस हवय पहिली बेर इहां कुलपति
अब भरोसा जागत हवय बढवार ल मिलही बनेच गति
छत्तीसगढी के मान बाढही सिरतोन के बनही राजभासा
शिक्षा-दीक्षा संग राजकाज चलही एमा अइसे हे आसा
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

हसीन पल

हाइकु पञ्च
***************
हसीन पल
यों बिखर न जायें
थोड़ा संभल

एक भी लम्हा
खुशी का न गुजरा
आज भी तन्हा

हरेक घड़ी
तू मुस्कुराता चल
खुशियां खड़ी

आज न कल
कोई नहीं बाँटता
दुःख के पल

एक ही हल
कर्म सिद्धान्त बड़ा
सत्य पे चल

*************************
🌲💧निर्मल 'नीर'💧🌲

अना है सब में

🌺🌷अना है सब में🌷🌺

मुहब्बत का सागर बसा है
सब में
मत भूलो थोड़ी सी अना* है
सब में

वफ़ा के बदले वफ़ा चाहते
हैं लेकिन
जफा** का घर भी सजा है
सब में

खुशी की चाहत , गमों से नफरत
है मगर
इस जज्बात के पीछे कौन चला है
सब में

जो भी चाहते हैं कर सकते
हैं मगर
डर खुदा का हर पल पला है
सब में

सबको सिर्फ नेकी की राह
चलना है "राकेश"
नेकी-बदी बतानेवाला बसा है
सब में...✍🏼
* अहम ,ईगो
** बेवफाई
_🌺राकेश कुमार मिश्रा🌺_

मेरी आँखें

मेरी आँखों मे, उतर आई है।                                
अब तन्हाई।

दूर तुमसे क्या हुई, ये जहां रास न आई।

कल तलक बाहों का सहारा था बहुत,
आज डराने लगी खुद मेरी परछाई।

तेरी चाहत की हमकों बस तमन्ना थी,
ये न सोचा था कि है कितनी गहराई।

अब भी सुनी हैं हाथें मेहंदी बिन,
कब कानों में गूँजेगी मेरी शहनाई।

प्यार तुझसे नही एकबार कह दिया होता,
न जिल्लतें होती न रुषवाई।

शशि तिवारी, महुवा, दुर्ग cg।

7805806358

गजल

ग़ज़ल

मैं तेरा गम भुला नहीं सकती
दर्द अपना बता नहीं सकती

मैंने काटी कई रातें तन्हा
जिंदा हूँ क्यूँ बता नहीं सकती

ख़्वाब मेरे कई अधूरे है
पर उन्हें मैं भुला नहीं सकती

जागते रहना सीखा आँखों ने
मैं इन्हें अब सुला नहीं सकती

कौन किसका यहाँ पे है सरिता
वक्त को मैं दिखा नहीं सकती

सरिता कोहिनूर 💎

खेलत राम

हाइकु

खेलत राम
माँ कौशल्या अंगना
चारो भइया।

बाजे नूपुर
छुम छुम छनन
मैया मगन।

मात सुमित्रा
देखि देखि सुत को
भाग्य सराहे।

दौड़त राम
लखन भरत भी
संग शत्रुध्न।

माँ कैयकई
मगन मन में हो
निहारे लाला।

अंगना झूमें
प्रभू पांयन  चूमे
धन्य भाग्य है

भोजन छोड़
इत उत भागत
मुख में दधि।

पिता बुलावे
गोद ले दुलरावे
भागत उठ।

चारो भइया
नाचे ता ता  थइया
देखे मंइया।

धन्य भाग्य है
अयोध्या नगर के
आये राम जी।

पंछी चहके
फुलवारी महके
देख राम को।

मगन नर
नारी गीत गाती है
पंइया पड़।

केवरा यदु"मीरा"

जिंदगी की राहों मे..

जिंदगी की राहों में ,
दोस्ती का महफिल मिलता है ,
तुम मिलो या ना मिलो ,
रास्ते हजार मिलते है !

जिंदगी एक टूटी हुई चिंगारी हैं ,
जिसमें आग लगती रहती हैं ,
कभी यह आग सुलगती तो ,
कभी मुरझाती रहती है !

~ रूपेश कुमार©

ईमली

🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷
      भिलाई दुर्ग छग

हाइकु

🥀ईमली🥀

मन मचला
संतान के संकेत ~~
ईमली  खट्टी ।

ईमली  छांव
चौपाल बैठे गांव ~~
कोर्ट के दांव।

पांव है भारी~~
ईमली की चाहत
होती है नारी ।

🌷यशवंत"यश"सूर्यवंशी 🌷
       भिलाई दुर्ग छग.

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