हाइकु
खेलत राम
माँ कौशल्या अंगना
चारो भइया।
बाजे नूपुर
छुम छुम छनन
मैया मगन।
मात सुमित्रा
देखि देखि सुत को
भाग्य सराहे।
दौड़त राम
लखन भरत भी
संग शत्रुध्न।
माँ कैयकई
मगन मन में हो
निहारे लाला।
अंगना झूमें
प्रभू पांयन चूमे
धन्य भाग्य है
भोजन छोड़
इत उत भागत
मुख में दधि।
पिता बुलावे
गोद ले दुलरावे
भागत उठ।
चारो भइया
नाचे ता ता थइया
देखे मंइया।
धन्य भाग्य है
अयोध्या नगर के
आये राम जी।
पंछी चहके
फुलवारी महके
देख राम को।
मगन नर
नारी गीत गाती है
पंइया पड़।
केवरा यदु"मीरा"
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